नई दिल्ली। भारतीय रेल के इतिहास में एक नए युग का सूत्रपात करते हुए केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने देश की जीवनरेखा माने जाने वाले इस विशाल नेटवर्क के कायाकल्प का बिगुल फूंक दिया है। राजधानी दिल्ली स्थित रेल भवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में भारतीय रेलवे की कार्यप्रणाली, सुरक्षा और यात्री सेवाओं को पूरी तरह बदलने के लिए 'मिशन 52' का खाका तैयार किया गया। नव वर्ष की ऊर्जा और नए संकल्पों से सजी इस बैठक में रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब रेलवे केवल पटरी पर दौड़ने वाली गाड़ी नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की तकनीक और दक्षता का प्रतीक बनेगी।

इस महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक में केंद्रीय रेल राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना और केंद्रीय रेल राज्य मंत्री श्री रवनीत सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। साथ ही, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं सीईओ सहित विभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मंथन में भाग लेकर भविष्य की योजनाओं को साझा किया। बैठक का मुख्य आकर्षण '52 सप्ताह में 52 सुधार' की महत्वाकांक्षी योजना रही, जिसके तहत प्रत्येक सप्ताह रेलवे की दक्षता, संचालन और सेवा वितरण में एक बड़ा प्रणालीगत बदलाव सुनिश्चित किया जाएगा। यह पहल न केवल प्रशासनिक सुस्ती को दूर करेगी बल्कि आम यात्री के अनुभव को भी पूरी तरह से बदल देगी।

रेल मंत्री ने सुरक्षा के मोर्चे पर विभाग की पीठ थपथपाते हुए और भी कड़े लक्ष्य निर्धारित किए। आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि 2014-15 में जहां गंभीर रेल दुर्घटनाओं की संख्या 135 थी, वहीं निरंतर प्रयासों से 2025-26 में यह घटकर महज 11 रह गई है। सुरक्षा के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को दोहराते हुए श्री वैष्णव ने इसे जल्द ही 'एकल अंक' यानी 10 से कम करने का निर्देश दिया। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए रेलवे अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत प्रौद्योगिकियों का सहारा लेगी। रखरखाव से लेकर ट्रेन संचालन तक, एआई का उपयोग सुरक्षा कवच को और अधिक अभेद्य बनाने के लिए किया जाएगा।

सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि रेलवे की 'आत्मा' यानी उसके कर्मचारियों और सेवाओं पर भी इस बैठक में गहन चर्चा हुई। श्री वी. सोमन्ना और श्री रवनीत सिंह ने अपने जमीनी अनुभवों को साझा करते हुए बुनियादी ढांचे के विकास और क्षमता वृद्धि पर जोर दिया। कर्मचारियों के कौशल विकास और प्रतिभा प्रबंधन के लिए नवीन प्रशिक्षण विधियों को अपनाने पर सहमति बनी। इसके साथ ही, यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायत यानी भोजन और खानपान की व्यवस्था में भी बड़े सुधारों की घोषणा की गई। आने वाले समय में ट्रेनों में भोजन की गुणवत्ता और कैटरिंग सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।

बैठक के अंत में रेल मंत्रालय ने बुनियादी ढांचे के विकास, समयबद्ध रखरखाव और यात्री-केंद्रित सेवाओं के प्रति अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रदर्शन किया। यह बैठक केवल एक प्रशासनिक चर्चा नहीं थी, बल्कि भारतीय रेलवे को आधुनिक, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक निर्णायक प्रस्थान बिंदु साबित हुई है। '52 सप्ताह के 52 सुधार' आने वाले दिनों में करोड़ों रेल यात्रियों के सफर को सुगम और सुखद बनाने का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

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