नई दिल्ली। भारत की सीमाओं की रक्षा करने वाले उन वीर प्रहरियों के सम्मान में, जिन्होंने अपना सर्वस्व देश को समर्पित कर दिया, आगामी 14 जनवरी, 2026 को संपूर्ण राष्ट्र 10वां रक्षा बल वयोवृद्ध दिवस (Armed Forces Veterans Day) पूरी गरिमा के साथ मनाएगा। यह दिन केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उन जांबाजों के अदम्य साहस, बलिदान और सेवा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक राष्ट्रीय संकल्प है। दिल्ली कैंट स्थित ऐतिहासिक मानेकशॉ सेंटर में आयोजित होने वाले मुख्य समारोह की शोभा रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह बढ़ाएंगे, जहाँ दिल्ली-एनसीआर के पूर्व सैनिकों का विशाल समागम भारतीय सैन्य परंपराओं की जीवंतता का साक्षी बनेगा।

देश की अखंडता के लिए समर्पित रहे पूर्व सैनिकों के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए इस बार का आयोजन अभूतपूर्व होने जा रहा है। दिल्ली के मुख्य कार्यक्रम के समांतर, देश के कोने-कोने में स्थित 34 राज्य सैनिक बोर्डों और 434 जिला सैनिक बोर्डों के माध्यम से इस गौरवशाली दिवस का उत्सव मनाया जाएगा। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य न केवल सम्मान देना है, बल्कि वयोवृद्धों और उनके आश्रितों की व्यावहारिक समस्याओं का समाधान करना भी है। इसी कड़ी में देशभर में पूर्व सैनिकों की रैलियां आयोजित की जाएंगी, जहाँ पेंशन प्रशासन प्रणाली - रक्षा (स्पर्श) और पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ECHS) के माध्यम से त्वरित सहायता प्रदान की जाएगी। भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना के अभिलेख कार्यालय विशेष रूप से शिकायत निवारण काउंटर और सहायता डेस्क स्थापित करेंगे, ताकि पेंशन और अन्य सेवा संबंधी चिंताओं का मौके पर ही निपटारा हो सके। साथ ही, रोजगार एजेंसियां और बैंकिंग संस्थान भी पूर्व सैनिकों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से स्टॉल लगाकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा करेंगे।

इस दिवस की ऐतिहासिक महत्ता भारत के सैन्य इतिहास के उस स्वर्णिम अध्याय से जुड़ी है, जब भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ, फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा (ओ.बी.ई.) ने देश को अपनी सेवाएं समर्पित करने के बाद 14 जनवरी, 1953 को सेवानिवृत्ति ली थी। 1947 के युद्ध में भारतीय सेना का सफल नेतृत्व कर विजय पताका फहराने वाले फील्ड मार्शल करियप्पा की विरासत आज भी प्रत्येक सैनिक के लिए प्रेरणा का पुंज है। यह दिन उनके द्वारा स्थापित अनुशासन और देशभक्ति के उन आदर्शों को जीवंत करता है, जो आज की पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं। रक्षा बल वयोवृद्ध दिवस का यह आयोजन न केवल हमारे पूर्व सैनिकों और वर्तमान सैन्य कर्मियों के बीच के सेतु को मजबूत करता है, बल्कि नागरिक समाज को भी यह संदेश देता है कि राष्ट्र अपने नायकों के त्याग को कभी नहीं भुलाता। यह कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से अपने नायकों को एक भावपूर्ण और गौरवमयी सलाम है।

Pratahkal Bureau

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