जयपुर, 17 अप्रेल। राजस्थान की राजधानी में शुद्ध मसालों और सहकारिता की शक्ति का उत्सव 'राष्ट्रीय सहकार मसाला मेला-2026' शुक्रवार से शुरू हो गया है। सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम कुमार दक ने जवाहर कला केन्द्र के दक्षिण परिसर में शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां डॉ. समित शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलित कर और फीता काटकर इस प्रतिष्ठित मेले का विधिवत शुभारम्भ किया। सहकारिता विभाग एवं राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ (कॉनफेड) द्वारा आयोजित यह मेला 26 अप्रेल तक चलेगा, जहाँ आमजन को मिलावट रहित गुणवत्तापूर्ण मसाले और विविध उत्पाद एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगे।

शुभारम्भ समारोह को संबोधित करते हुए सहकारिता मंत्री श्री गौतम कुमार दक ने कहा कि वर्ष 2003 से अनवरत आयोजित हो रहा यह राष्ट्रीय मेला अब अपनी एक विशिष्ट पहचान बना चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे आयोजन सहकारी संस्थाओं द्वारा निर्मित उत्पादों को एक सशक्त मंच प्रदान करते हैं, जिससे न केवल किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलता है, बल्कि सहकारिता के मूल ध्येय वाक्य ‘एक सबके लिए, सब एक के लिए’ की भावना भी साकार होती है। श्री दक ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की 'विकसित भारत' की परिकल्पना में सहकारी आन्दोलन की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने घोषणा की कि राज्य स्तरीय मेले की सफलता और संभाग स्तर पर इसके सफल क्रियान्वयन के बाद अब आगामी समय में जिला स्तर पर भी सहकार मेलों का भव्य आयोजन किया जाएगा।

मेले की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि मिलावट के दौर में शुद्धता की तलाश कर रहे जयपुरवासियों के लिए यह मेला एक भरोसेमंद गंतव्य है। इस वर्ष मेले में लगभग 150 स्टॉल्स लगाई गई हैं, जहाँ राजस्थान के अलावा केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कश्मीर, पंजाब और मध्य प्रदेश जैसे विभिन्न राज्यों की सहकारी संस्थाएं अपने उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय कर रही हैं। उद्घाटन के पश्चात सहकारिता मंत्री और शासन सचिव ने विभिन्न स्टॉल्स का अवलोकन किया और सहकारी समितियों द्वारा प्रदर्शित मसालों व क्षेत्रीय उत्पादों की विस्तार से जानकारी ली।

इस 10 दिवसीय आयोजन में देश के कोने-कोने की विशिष्टताएं आकर्षण का केन्द्र बनी हुई हैं। मेले में केरल की काली मिर्च एवं लौंग, इरोड (तमिलनाडू) की हल्दी व दालचीनी, कश्मीर की केसर एवं ड्राई फ्रूट्स, पंजाब के प्रसिद्ध चावल व रेडी टू ईट उत्पाद और मध्य प्रदेश का सिहोरी गेहूं उपलब्ध है। वहीं राजस्थान की माटी की खुशबू समेटे मथानिया की लाल मिर्च, रामगंजमंडी एवं बारां का धनिया, नागौर का जीरा व कसूरी मैथी, जालोर की ईसबगोल, सिरोही की सौंफ, प्रतापगढ़ की हींग, चित्तौड़गढ़ की अजवाइन, पुष्कर का गुलकन्द, नाथद्वारा की ठण्डाई, भुसावर का अचार, राजसमंद का शर्बत, सोजत की मेहंदी, डूंगरपुर का आम पापड़, झाड़ोल की अरहर दाल और बीकानेर के पापड़ आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण हैं।

मनोरंजन और उत्साह को बनाए रखने के लिए मेले में प्रतिदिन लकी ड्रॉ और समापन पर मेगा बम्पर ड्रॉ का आयोजन किया गया है। साथ ही, विभिन्न संभागों के लोक कलाकारों द्वारा प्रतिदिन सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जो राजस्थान की समृद्ध विरासत की झलक पेश करेंगी। कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर राजफेड के प्रबंध निदेशक श्री सौरभ स्वामी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में सहकारजन उपस्थित रहे, जो सहकारी आंदोलन की इस मजबूती और विस्तार के साक्षी बने।




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