नई दिल्ली: देश के इतिहास में पहली बार एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक दृश्य देखा गया, जब 22 राज्यों के कृषि मंत्री एक साथ एक मंच पर एकत्रित हुए। राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस के इस भव्य मंच से सभी मंत्रियों ने देश की कृषि और किसानों की जिंदगी को बेहतर, समृद्ध और खुशहाल बनाने का दृढ़ संकल्प लिया।

इस ऐतिहासिक नेशनल खरीफ कॉन्फ्रेंस में पहली बार देर रात तक गहन मंथन और विचार-विमर्श का दौर चला, जिसके बाद अब खेतों में कृषि प्रगति का महा-मिशन धरातल पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है। राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस में जुटे तमाम राज्यों के कृषि मंत्रियों ने सामूहिक संकल्प लेते हुए यह घोषणा की कि वे अपने-अपने राज्यों के खेतों में भी प्राकृतिक खेती को अनिवार्य रूप से बढ़ावा देंगे और इसे लागू करेंगे।

कृषि अनुसंधान के प्रमुख और प्रतिष्ठित केंद्र 'पूसा' से समग्र कृषि विकास का शंखनाद करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने अत्यंत प्रेरणादायी शब्दों में कहा कि ‘बड़ा पद नहीं, बड़ा संकल्प चाहिए’। पूसा के इस गरिमामयी सम्मेलन में श्री शिवराज सिंह ने धरती बचाओ, देश बचाओ का नारा देते हुए राष्ट्रीय ‘खेत बचाओ अभियान’ का भव्य आगाज़ किया।

इस विशेष सम्मेलन के दौरान दो दिनों तक अत्यंत गहन विमर्श हुआ, जिसने भारतीय खेती को एक नई और प्रगतिशील दिशा प्रदान की है। श्री शिवराज सिंह की दूरदर्शी पहल पर देश में कृषि आत्मनिर्भरता का एक ठोस और व्यापक रोडमैप तैयार किया गया है। खरीफ सीजन की शुरुआत से ठीक पहले केंद्र, राज्य और वैज्ञानिकों के एक मंच पर आने से कृषि परिवर्तन का यह राष्ट्रीय खाका पूरी तरह तैयार हो चुका है, जो आने वाले समय में भारतीय कृषि के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।

Pratahkal Newsroom

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