मुरकंगसेलेक-सिल्ले नई रेल लाइन पर ट्रेन परिचालन को सीआरएस की मंजूरी
15.70 किमी लंबे नवनिर्मित सेक्शन पर 110 केएमपीएच की गति से चलेंगी ट्रेनें, अरुणाचल प्रदेश में रेल कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा।

रेल संरक्षा आयुक्त सुमीत सिंघल ने मुरकंगसेलेक-पासीघाट परियोजना के तहत 15.70 किलोमीटर लंबे नवनिर्मित ट्रैक का सफल स्पीड ट्रायल पूरा किया।
सीआरएस द्वारा निरीक्षण और सफल स्पीड ट्रॉयल
मालीगांव, 19 फरवरी, 2026: पूर्वोत्तर सीमांत परिमण्डल के रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) श्री सुमीत सिंघल ने 12 और 13 फरवरी, 2026 को मुरकंगसेलेक - सिल्ले (15.70 कि.मी.) नवनिर्मित बीजी लाइन सेक्शन पर ट्रेनों के परिचालन को मंजूरी दे दी।
"सफल निरीक्षण और स्पीड ट्रॉयल के बाद, सीआरएस ने इस क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी का मार्ग प्रशस्त करते हुए, 110 केएमपीएच की अधिकतम स्वीकार्य गति से उक्त मार्ग पर ट्रेन परिचालन को मंजूरी प्रदान की।"
परियोजना की रूपरेखा और बुनियादी ढांचा
यह सेक्शन मुरकंगसेलेक और पासीघाट के बीच चल रहे 26.15 कि.मी. लंबी नई रेल लाइन परियोजना का हिस्सा है। यह एक अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पहल है, जिसका उद्देश्य अरुणाचल प्रदेश में रेल कनेक्टिविटी को और अधिक मजबूत करना है।
- 26.15 कि.मी. लंबी मुरकंगसेलेक – पासीघाट नई रेल लाइन असम के मुरकंगसेलेक से अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट तक जाती है।
- बिछाई गई यह नई रेल लाइन निकट भविष्य में इस मार्ग से ज़्यादा माल और यात्री परिवहन के आवागमन में मददगार साबित होगी।
- इस परियोजना में सिल्ले, लाबो और पासीघाट जैसे तीन नए स्टेशन और 27 बड़े पुल शामिल हैं।
अरुणाचल प्रदेश में रेल नेटवर्क का ऐतिहासिक विकास
29 मार्च, 2014 को हारमती से नाहरलगुन रेलवे स्टेशन तक एक नई लाइन शुरू होने के साथ अरुणाचल प्रदेश की राजधानी राष्ट्रीय ब्रॉड-गेज रेलवे नेटवर्क से जुड़ गई।
- इस माइलस्टोन ने अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर को पहली बार भारत के ब्रॉड-गेज मानचित्र से जोड़ा।
- हारमती – नाहरलगुन रूट पर यात्री ट्रेन सेवा 07 अप्रैल 2014 को शुरू हुईं, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में काफी बढ़ोतरी हुई।
- इस लिंक को और अधिक सुदृढ़ करते हुए, 22 फरवरी 2015 को नाहरलगुन-नई दिल्ली एसी एक्सप्रेस शुरू की गई, जिससे अरुणाचल प्रदेश को राष्ट्रीय राजधानी से पहली बार सीधी रेल सेवा मिली।
कनेक्टिविटी के लाभ और आर्थिक प्रभाव
मुरकंगसेलेक – पासीघाट नई रेल लाइन परियोजना से अरुणाचल प्रदेश, असम और देश के बाकी हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी काफी बेहतर होगी। परियोजना पूर्ण होने के बाद नई लाइन रंगिया – मुरकंगसेलेक रूट और बोगीबील ब्रिज के माध्यम से पासीघाट तक लंबी दूरी की रेल कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा, जिससे यह क्षेत्र प्रमुख स्थानों से अच्छी तरह जुड़ जाएगा।
"यह बेहतर रेल नेटवर्क यात्रियों और सामग्रियों दोनों के लिए यात्रा का समय और परिवहन खर्च कम करने में मदद करेगा, साथ ही आवश्यक सामग्रियों की अधिक भरोसेमंद और निर्बाध आपूर्ति भी सुनिश्चित होगी।"
यह रंगिया और मुरकंगसेलेक जैसे स्थानीय केंद्रस्थलों तक लंबी दूरी की रेलवे द्वारा सीधी पहुँच मिलेगी, जिससे लोगों के लिए मोबिलिटी और समग्र सुविधा को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, बेहतर कनेक्टिविटी से छोटे उद्योगों, क्षेत्रीय व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा तथा अरुणाचल प्रदेश को एक उभरते हुए पर्यटन हब के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी, जिससे आर्थिक विकास को व्यापक बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
(कपिंजल किशोर शर्मा)
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी
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