गुरु-शिष्य परंपरा और आधुनिक शिक्षा पर जोर, मुंडोती में शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित
मुंडोती के उच्च माध्यमिक विद्यालय में भारतीय शिक्षण मंडल और राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय इकाई ने शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किया। गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय संस्कार, गणित शिक्षा और शोध पर विद्यार्थियों को मार्गदर्शन दिया गया।

तस्वीर में मुंडोती के उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित शैक्षणिक कार्यक्रम के दौरान मंच पर खड़े अतिथि और नीचे बैठे विद्यार्थी नजर आ रहे हैं।
मुंडोती में 25 सितंबर को भारतीय शिक्षण मंडल, चित्तौड़ प्रांत एवं राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय इकाई के तत्वावधान में उच्च माध्यमिक विद्यालय, मुंडोती में शैक्षणिक सत्र 2026–27 के तहत शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व, आधुनिक युग में भारतीय संस्कारों के संरक्षण तथा विद्यार्थियों में शिक्षा और शोध के प्रति रुचि विकसित करना रहा। कार्यक्रम माननीय कुलपति प्रो. आनंद भालेराव के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ ध्येय श्लोक एवं ध्येय वाक्य के साथ हुआ। संचालन एवं प्रारंभिक संबोधन डॉ. राजेंद्र पवार, सह-प्रमुख, गुरुकुल शिक्षा गतिविधि ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा और गुरु-शिष्य संबंधों के महत्व पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर प्रो. राजेश प्रताप सिंह, प्रमुख, गुरुकुल शिक्षा गतिविधि ने भारतीय शिक्षण मंडल (बीएसएम) के उद्देश्यों और विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों में गणित के अध्ययन के प्रति रुचि विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही विषय की गहन समझ विकसित करने, तार्किक चिंतन को बढ़ावा देने और शोध के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया।
कार्यक्रम में डॉ. जयप्रकाश त्रिपाठी, प्रांत सह-मंत्री, भारतीय शिक्षण मंडल, चित्तौड़ प्रांत ने भारतीय शिक्षण मंडल का विस्तृत परिचय दिया और गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता रेखांकित की। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था में गुरु-शिष्य संबंध केवल ज्ञान प्राप्ति तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह जीवन-मूल्यों, नैतिकता, संस्कारों एवं चरित्र निर्माण का भी आधार रहा है। उन्होंने आधुनिक युग में भारतीय संस्कारों को आत्मसात करने तथा शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों के समन्वय पर विशेष बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़े रहते हुए आधुनिक शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने का संदेश दिया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में गणित विभाग के शोधार्थी अनुप कुमार, सुनील कुमार एवं विवेक कुमार का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम के अंत में उच्च माध्यमिक विद्यालय, मुंडोती की शिक्षिका मेघा जी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन एवं सफल संचालन के लिए सभी अतिथियों, प्राध्यापकों, शोधार्थियों तथा सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर गुरुकुल शिक्षा गतिविधि के प्रमुख प्रोफेसर राजेश प्रताप सिंह ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के बीच गणित विषय को रोचक एवं सरल बनाने के उद्देश्य से विशेष गणित सत्र आयोजित किया। कार्यक्रम के माध्यम से गुरु-शिष्य परंपरा के आदर्शों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने, भारतीय संस्कारों को बढ़ावा देने तथा विद्यार्थियों में शिक्षा एवं शोध के प्रति रुचि विकसित करने का संदेश दिया गया।

