एमएसएमई को आसान ऋण देने के लिए केंद्र सरकार के बड़े कदम, दो साल में खुलीं सिडबी की 71 नई शाखाएं
एमएसएमई के लिए केंद्र सरकार ने ऋण सुविधा बढ़ाने के बड़े कदम उठाए हैं। सिडबी की 71 नई शाखाएं और ईसीएलजीएस 5.0 योजना से क्या होगा बड़ा बदलाव, जानिए।

तस्वीर में राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ कार्यक्रम के दौरान संबोधित करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
केंद्र सरकार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सशक्त बनाने और उन्हें आसान ऋण उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने बताया कि भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) ने पिछले पांच वर्षों में एमएसएमई क्षेत्र के लिए अनेक महत्वपूर्ण पहलें की हैं। राज्यसभा में उनके सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सदन को इन पहलों की विस्तृत जानकारी दी।
मदन राठौड़ ने बताया कि वर्ष 2024-25 के बजट के बाद देशभर में 71 नई सिडबी शाखाएं शुरू की गई हैं, ताकि अधिक से अधिक एमएसएमई इकाइयों तक प्रत्यक्ष ऋण सुविधा पहुंचाई जा सके। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 तक सिडबी का प्रत्यक्ष ऋण पोर्टफोलियो बढ़कर 51,687 करोड़ रुपये हो गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 36.8 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि सिडबी ने पुनर्वित्त सहायता, सह-ऋण व्यवस्था, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के साथ साझेदारी, महिला एवं छोटे उद्यमियों के लिए ‘प्रयास’ योजना तथा जीएसटी सहाय ऐप जैसी पहलें शुरू कर वित्तीय समावेशन को और मजबूत किया है। इन पहलों का उद्देश्य एमएसएमई इकाइयों तक ऋण की पहुंच को सरल और व्यापक बनाना है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि केंद्र सरकार ने मई 2026 में आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) 5.0 भी लागू की है। इस योजना के तहत पात्र एमएसएमई को अतिरिक्त ऋण सुविधा पर 100 प्रतिशत तक गारंटी कवरेज उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना के माध्यम से एमएसएमई, गैर-एमएसएमई तथा अनुसूचित यात्री एयरलाइनों के लिए कुल 2.55 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त ऋण प्रवाह का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मदन राठौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार का उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी, आत्मनिर्भर और रोजगार सृजन का प्रमुख आधार बनाना है। उन्होंने कहा कि सरकार की ये पहलें छोटे उद्यमों को सस्ती और सरल वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ देश की आर्थिक प्रगति को नई गति प्रदान करेंगी।

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