ब्यावर में गहराया खनिज संकट: अस्तित्व बचाने की जंग में आज सड़क पर उतरेंगे उद्यमी
ब्यावर में खनिज उद्योग पर मंडराते संकट के बीच आज लघु उद्योग संघ अध्यक्ष आशीषपाल पदावत के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट तक विशाल रैली निकालेगा। 50% उद्योगों के बंद होने के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम जिलाधीश कमलराम मीना को ज्ञापन सौंपा जाएगा। परिवहन, मशीनरी और श्रमिक संघों के समर्थन से होने वाला यह प्रदर्शन क्षेत्र की आर्थिक रक्षा के लिए निर्णायक माना जा रहा है।

ब्यावर। राजस्थान के औद्योगिक मानचित्र पर अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले ब्यावर का खनिज उद्योग इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। संकट की यह आंच इतनी तीव्र है कि क्षेत्र की लगभग आधी औद्योगिक इकाइयां दम तोड़ चुकी हैं, जबकि शेष अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। इसी विकट स्थिति और उद्योगों के संरक्षण की मांग को लेकर आज ब्यावर लघु उद्योग संघ के बैनर तले समस्त व्यापारिक वर्ग लामबंद होकर हुंकार भरेगा।
संकट की इस घड़ी में भविष्य की रणनीति तय करने के लिए ब्यावर लघु उद्योग संघ के कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। संघ के अध्यक्ष आशीषपाल पदावत की अध्यक्षता में आयोजित इस सभा में औद्योगिक पतन पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। चर्चा के दौरान यह तथ्य उभर कर आया कि करीब पचास प्रतिशत खनिज उद्योग पहले ही बंद हो चुके हैं, जिससे न केवल राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका पर भी तलवार लटक गई है। उद्योगों को इस दलदल से बाहर निकालने और सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए संघ ने गुरुवार, 8 जनवरी को पूर्णतः कारोबार बंद रखने का कड़ा निर्णय लिया है।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, आज प्रातः 9 बजे संघ कार्यालय से एक विशाल रैली का आगाज होगा। इस रैली का नेतृत्व अध्यक्ष आशीषपाल पदावत करेंगे, जिसमें खनिज उद्योग से जुड़े हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इस आंदोलन को व्यापक समर्थन देते हुए परिवहन संघ, बारदाना आपूर्ति कर्ता, मशीनरी एवं विद्युत उपकरण आपूर्ति कर्ता, कल-पुर्जे विक्रेता, जेसीबी व डम्पर धारक, कच्चा माल आपूर्ति कर्ता और बड़ी संख्या में श्रमिक कंधे से कंधा मिलाकर कलेक्ट्रेट कूच करेंगे।
रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचने के पश्चात उद्यमी जिलाधीश कमलराम मीना को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम एक स्मरण पत्र (ज्ञापन) सौंपेंगे। इस ज्ञापन में खनिज उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए तत्काल राहत पैकेज और सुधारात्मक नीतियों की मांग की जाएगी। यह आयोजन केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि ब्यावर की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले खनिज क्षेत्र को विलुप्त होने से बचाने की एक अंतिम पुकार है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह औद्योगिक संकट एक बड़े सामाजिक और आर्थिक संकट का रूप ले सकता है।

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