ओटीटी क्रांति ने खोले वृत्तचित्रों के नए द्वार, 19वें एमआईएफएफ में विशेषज्ञों ने बताई बदलती दुनिया की तस्वीर
19वें मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में विशेषज्ञों ने बताया कि ओटीटी प्लेटफॉर्म किस तरह वृत्तचित्र फिल्म निर्माताओं के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं। चर्चा में इतिहास, संस्कृति और वैश्विक दर्शकों तक पहुंच के बदलते आयाम सामने आए।

मुंबई में आयोजित 19वें मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के आईडीपीए ओपन फोरम में 'स्ट्रीमिंग रिवॉल्यूशन: डॉक्यूमेंटिंग इन द एज ऑफ ओटीटी' विषय पर चर्चा करते विशेषज्ञ पैनलिस्ट।
डिजिटल युग में कहानी कहने के स्वरूप तेजी से बदल रहे हैं और वृत्तचित्र फिल्म निर्माण भी इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। 19वें मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (एमआईएफएफ) में आयोजित एक महत्वपूर्ण सत्र में विशेषज्ञों ने इस बात पर विस्तार से चर्चा की कि ओटीटी प्लेटफॉर्म किस प्रकार वृत्तचित्र फिल्म निर्माताओं के लिए नए अवसरों का विस्तार कर रहे हैं और उनके कार्य को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इंडियन डॉक्यूमेंट्री प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईडीपीए) के ओपन फोरम के अंतर्गत आयोजित “स्ट्रीमिंग रिवॉल्यूशन: डॉक्यूमेंटिंग इन द एज ऑफ ओटीटी” विषयक सत्र में ओटीटी, मीडिया और वृत्तचित्र जगत के प्रमुख विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस चर्चा में शेमारू की बिजनेस हेड किन्नरी दवे, वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी साउथ एशिया के कंटेंट हेड साई अभिषेक, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं पद्मश्री सम्मानित रमेश पटांगे तथा अनुभवी छायाकार एवं फिल्म निर्माता धर्म गुलाटी शामिल रहे। सत्र का संचालन फिल्म निर्माता ललित वचानी ने किया।
चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति जताई कि ओटीटी प्लेटफॉर्म ने वृत्तचित्रों के वितरण की पारंपरिक सीमाओं को तोड़ दिया है। अब वृत्तचित्र केवल फिल्म समारोहों, फिल्म समितियों या सार्वजनिक प्रसारकों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि वे भारत सहित दुनिया भर के विशाल दर्शक वर्ग तक पहुंच रहे हैं। पैनलिस्टों ने कहा कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने फिल्म निर्माताओं को अपनी कहानियां प्रस्तुत करने और दर्शकों से सीधे संवाद स्थापित करने का अभूतपूर्व अवसर प्रदान किया है।
वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी साउथ एशिया के कंटेंट हेड साई अभिषेक ने बताया कि वृत्तचित्र उनकी कंटेंट रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं। उनके अनुसार इतिहास, पौराणिक कथाएं, रोमांच, जीवनी और सच्ची अपराध कथाओं पर आधारित वृत्तचित्र दर्शकों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्लेटफॉर्म ऐसे मौलिक विषयों, विशिष्ट पहुंच वाली कहानियों और नए दृष्टिकोणों की तलाश में रहते हैं, जिनमें भारत की ऐसी कहानियां शामिल हों जो वैश्विक स्तर पर भी दर्शकों को आकर्षित कर सकें।
शेमारू की बिजनेस हेड किन्नरी दवे ने बदलती दर्शक प्राथमिकताओं को समझने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय के दर्शक प्रभावशाली और आकर्षक कहानी कहने की अपेक्षा रखते हैं। ऐसे में वृत्तचित्र निर्माताओं को अपनी कहानियों की प्रामाणिकता बनाए रखते हुए बदलती देखने की आदतों के अनुरूप स्वयं को ढालना होगा। उन्होंने फिल्म निर्माताओं को नवाचारी विचारों के साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म से सक्रिय रूप से जुड़ने का भी आह्वान किया।
अनुभवी फिल्म निर्माता और छायाकार धर्म गुलाटी ने वृत्तचित्रों के व्यापक प्रदर्शन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि अनेक सराहनीय वृत्तचित्र अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान हासिल कर लेते हैं, लेकिन भारत में उन्हें अपेक्षित वितरण और दर्शक वर्ग प्राप्त करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
वृत्तचित्रों की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए पद्मश्री रमेश पटांगे ने कहा कि ये माध्यम महान व्यक्तित्वों के जीवन, उनके योगदान और ऐतिहासिक घटनाओं को जनसामान्य तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि वृत्तचित्र इतिहास और संस्कृति के संरक्षण, सामाजिक जागरूकता के विस्तार तथा युवा पीढ़ी को भारत की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय मूल्यों से परिचित कराने का प्रभावी साधन हैं।
सत्र का समापन कहानी कहने की कला, वितरण व्यवस्था, दर्शकों की सहभागिता और ओटीटी युग में वृत्तचित्र फिल्म निर्माण के भविष्य पर केंद्रित संवादात्मक चर्चा के साथ हुआ। यह विमर्श स्पष्ट संकेत देता है कि डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म न केवल वृत्तचित्रों की पहुंच को नया आयाम दे रहे हैं, बल्कि भारतीय कहानी कहने की परंपरा को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

Pratahkal Bureau
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