जयपुर, 23 जुलाई 2026। राजस्थान की महिलाओं को परिवार और समुदाय में स्वास्थ्य परिवर्तन की अग्रणी भूमिका देने के उद्देश्य से प्रिंसेस पद्मजा कुमारी परमार ने गुरुवार को जयपुर में ‘मेवाड़ की मिट्टी की बेटी’ अभियान का शुभारंभ किया। इसी अवसर पर जोधपुर में 30 जुलाई से 1 अगस्त तक आयोजित होने वाले इंटरनेशनल टाइप-1 डायबिटीज समिट 2026 का कर्टेन-रेजर भी आयोजित किया गया।

‘मेवाड़ की मिट्टी की बेटी’ महिलाओं और बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता के लिए द फ्रेंड्स ऑफ मेवाड़ की व्यापक सामाजिक पहल है। इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य टाइप-1 डायबिटीज के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इससे प्रभावित बच्चों एवं उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना है।

अभियान और सम्मेलन की एक साथ शुरुआत के पीछे यह सोच है कि एक स्वस्थ और जागरूक महिला केवल अपने जीवन को ही बेहतर नहीं बनाती, बल्कि पूरे परिवार के स्वास्थ्य की मजबूत आधारशिला भी तैयार करती है। बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज के लक्षणों की समय रहते पहचान, नियमित उपचार और भावनात्मक सहयोग सुनिश्चित करने में महिलाओं और विशेष रूप से माताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई है।

अभियान की अवधारणा स्पष्ट करते हुए पद्मजा कुमारी परमार ने कहा, “‘मेवाड़ की मिट्टी की बेटी’ एक ऐसी पहचान है, जिसे मैं राजस्थान की प्रत्येक महिला के साथ साझा करती हूं। यह अपनी जड़ों, अपने संस्कारों और उस मिट्टी से हमारे जुड़ाव का प्रतीक है, जिसने हमें आकार दिया है। यह अभियान राजस्थान की महिलाओं की शक्ति और संघर्षशीलता का सम्मान करता है तथा उन्हें अधिक स्वस्थ, आत्मविश्वासी, स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बनने में सहयोग देने का प्रयास है।”

यह अभियान पद्मजा कुमारी परमार के व्यक्तिगत जीवन और उनके सामाजिक उद्देश्य को भी एक सूत्र में जोड़ता है। पांच वर्ष की आयु से टाइप-1 डायबिटीज के साथ जीवन जी रहीं पद्मजा ने चार दशक से अधिक के अपने अनुभव को स्वास्थ्य जागरूकता और रोगियों के सशक्तीकरण की मुहिम में बदल दिया है। ‘मेवाड़ की मिट्टी की बेटी’ के माध्यम से राजस्थान की महिलाओं और बालिकाओं तक यह संदेश पहुंचाया जाएगा कि स्वास्थ्य संबंधी चुनौती उनकी पहचान या उनकी संभावनाओं को सीमित नहीं कर सकती।

द फ्रेंड्स ऑफ मेवाड़ का मानना है कि महिलाओं की वास्तविक आत्मनिर्भरता उनके स्वास्थ्य, जानकारी और निर्णय लेने की क्षमता से शुरू होती है। इसी सोच के तहत ‘मेवाड़ की मिट्टी की बेटी’ अभियान में महिला स्वास्थ्य, निवारक चिकित्सा, स्वच्छता, शिक्षा, आजीविका, जागरूकता और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच जैसे विषयों पर कार्य किया जाएगा।

अभियान का विशेष फोकस ग्रामीण और वंचित समुदायों पर रहेगा। इसके माध्यम से महिलाओं को केवल सरकारी या सामाजिक योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि अपने परिवार और समाज में परिवर्तन लाने वाली सशक्त भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

टाइप-1 डायबिटीज को भी ऐसी ही स्वास्थ्य चुनौती बताया गया है, जिसके प्रति जागरूकता का अभाव बच्चों और उनके परिवारों के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है। यह जीवनभर रहने वाली एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर इंसुलिन बनाना बंद कर देता है। इसके प्रभावी प्रबंधन के लिए समय पर पहचान, नियमित इंसुलिन और उचित चिकित्सकीय देखभाल आवश्यक मानी गई है।

द फ्रेंड्स ऑफ मेवाड़, ब्रेकथ्रू T1D और विलियम जे. क्लिंटन फाउंडेशन के सहयोग से जोधपुर में इंटरनेशनल टाइप-1 डायबिटीज समिट 2026 का आयोजन किया जाएगा। इस सम्मेलन में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और भारत के विभिन्न राज्यों से एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, स्वास्थ्य विशेषज्ञ, शोधकर्ता, नीति-निर्माता, सरकारी प्रतिनिधि, रोगी अधिकार कार्यकर्ता और जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ भाग लेंगे।

सम्मेलन के बारे में पद्मजा कुमारी परमार ने कहा, “आज हम केवल एक और स्वास्थ्य सम्मेलन की घोषणा नहीं कर रहे हैं। यह टाइप-1 डायबिटीज के साथ जीवन जी रहे प्रत्येक बच्चे और उसके परिवार के लिए एक मजबूत भविष्य बनाने का आह्वान है। हम ऐसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच चुके हैं, जहां जागरूकता को ठोस कार्रवाई, सहयोग और सार्थक नीतिगत परिणामों में बदलना आवश्यक है। इस सम्मेलन के माध्यम से हमारा प्रयास वैश्विक विशेषज्ञता और भारतीय नेतृत्व को एक मंच पर लाकर ऐसे व्यावहारिक समाधान विकसित करना है, जिनसे उपचार तक पहुंच और मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सके।”

तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान बीमारी की शीघ्र पहचान, इंसुलिन तक समान और किफायती पहुंच, डायबिटीज टेक्नोलॉजी, कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य व्यवस्था, डिजिटल इनोवेशन, देखभाल के एकीकृत मॉडल और जनस्वास्थ्य नीति जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी।

सम्मेलन में इस बात पर भी विशेष विचार किया जाएगा कि परिवारों, माताओं और स्थानीय समुदायों को टाइप-1 डायबिटीज की पहचान और उसके प्रभावी प्रबंधन में किस प्रकार अधिक सक्षम बनाया जा सकता है। साथ ही, सम्मेलन से प्राप्त विशेषज्ञ सुझावों और अनुभवों को ‘मेवाड़ की मिट्टी की बेटी’ जैसे जमीनी अभियानों के माध्यम से समुदायों तक पहुंचाने की दिशा भी तय की जाएगी।

समिट के व्यापक उद्देश्य पर कुश परमार ने कहा, “हर डायग्नोसिस के पीछे एक बच्चा होता है, हर बच्चे के पीछे एक परिवार और हर परिवार के पीछे एक उम्मीद होती है। हमारी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि टाइप-1 डायबिटीज के साथ जीवन जी रहा कोई भी व्यक्ति स्वयं को अनदेखा या असहाय महसूस न करे। यह सम्मेलन ऐसे लोगों को एक मंच पर लाने का प्रयास है, जो संवाद को वास्तविक बदलाव में बदलने की क्षमता रखते हैं।”

तीन दिवसीय सम्मेलन से निकलने वाले सुझावों को व्यावहारिक अनुशंसाओं का रूप दिया जाएगा। इनका उद्देश्य सरकार, स्वास्थ्य संस्थानों, शिक्षण एवं शोध संस्थानों, सामाजिक संगठनों और रोगी समूहों के बीच सहयोग को मजबूत करना होगा।

उदयपुर से शुरू हुई यह पहल अब अखिल भारतीय और अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले रही है। एक ओर ‘मेवाड़ की मिट्टी की बेटी’ अभियान राजस्थान की महिलाओं को स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता से जोड़ने का प्रयास करेगा, वहीं दूसरी ओर इंटरनेशनल टाइप-1 डायबिटीज समिट वैश्विक विशेषज्ञता, नीति और आधुनिक उपचार के माध्यम से बच्चों एवं परिवारों के लिए बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा तय करेगा। दोनों पहलों का साझा उद्देश्य जागरूकता को कार्रवाई में बदलना और राजस्थान की महिलाओं को स्वस्थ परिवार तथा सशक्त समाज के निर्माण में बदलाव की अगुआ बनाना है।

Pratahkal Newsroom

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