जयपुर के जेकेके में 'मेलोडी ऑफ कलर्स' का आगाज: उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने जलरंगों में निहारी मानवीय संवेदनाएं
जयपुर के जवाहर कला केंद्र में उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने डॉ. सुषमा महाजन की जलरंग प्रदर्शनी 'मेलोडी ऑफ कलर्स' का उद्घाटन किया। 60 उत्कृष्ट कलाकृतियों के साथ सजी इस प्रदर्शनी में मानवीय संवेदनाओं और जीवंत रंगों का अनूठा संगम देखने को मिला। 19 जनवरी तक चलने वाले इस कला उत्सव में पेरिस और दिल्ली में सराही गई कृतियां भी शामिल हैं, जो राजस्थान की कला को वैश्विक पहचान दे रही हैं।

जयपुर के जेकेके में 'मेलोडी ऑफ कलर्स' का आगाज: उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने जलरंगों में निहारी मानवीय संवेदनाएं
जयपुर। गुलाबी नगरी के कला गलियारों में शनिवार का दिन सृजन और संवेदनाओं के एक अनूठे संगम का साक्षी बना। राजस्थान की उपमुख्यमंत्री तथा पर्यटन, कला एवं संस्कृति मंत्री दिया कुमारी ने जवाहर कला केंद्र (JKK) की सुप्रसिद्ध अलंकार आर्ट गैलरी में ख्यातिप्राप्त कलाकार डॉ. सुषमा महाजन की तीन दिवसीय एकल चित्रकला प्रदर्शनी 'मेलोडी ऑफ कलर्स' का भव्य उद्घाटन किया। दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुए इस समारोह ने न केवल कला प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में आधुनिक कला के एक नए अध्याय को भी जोड़ा।
प्रदर्शनी में सजी डॉ. सुषमा महाजन की 60 जलरंग कृतियों का बारीकी से अवलोकन करते हुए उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी भावविभोर नजर आईं। उन्होंने चित्रों में उकेरी गई सूक्ष्मताओं की सराहना करते हुए कहा कि जलरंगों के माध्यम से साकार होती ये संवेदनाएं वास्तव में कल्पना से परे हैं। उपमुख्यमंत्री ने डॉ. महाजन को जलरंग कला का सिद्धहस्त 'मास्टर' बताते हुए कहा कि उनकी कलात्मकता में जीवंत रंगों का जो प्रवाह है, वह सीधे मानवीय भावनाओं को स्पर्श करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि डॉ. सुषमा जैसी कलाकारों की यह अद्भुत प्रतिभा न केवल प्रदेश बल्कि समूचे देश और सृजन जगत के लिए एक अनमोल धरोहर है, जो वैश्विक पटल पर राजस्थान की कला संस्कृति का परचम शान से फहरा रही है।
कलात्मक बारीकियों से सजी इस प्रदर्शनी की विशेषता इसमें शामिल चित्रों की विविधता है। 'मेलोडी ऑफ कलर्स' में प्रदर्शित कुल 60 कृतियों में से 22 नई कृतियां विशेष रूप से इसी आयोजन के लिए तैयार की गई हैं, जो कलाकार के निरंतर विकसित होते दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। इसके अतिरिक्त, इस संग्रह में पेरिस, जयपुर और नई दिल्ली में पूर्व में प्रदर्शित की जा चुकीं उन चुनिंदा कालजयी कृतियों को भी शामिल किया गया है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉ. महाजन को पहचान दिलाई है।
यह तीन दिवसीय कला उत्सव 19 जनवरी तक जारी रहेगा, जहां कला के जिज्ञासु और पारखी प्रतिदिन प्रातः 11:00 बजे से सायं 7:30 बजे तक इन नायाब चित्रों का दीदार कर सकेंगे। यह प्रदर्शनी न केवल डॉ. सुषमा महाजन के कलात्मक सफर का प्रतिबिंब है, बल्कि यह उभरते कलाकारों के लिए प्रेरणा का एक ऐसा पुंज भी है, जो यह सिद्ध करता है कि ब्रश की एक महीन छुअन और पानी के रंगों का मेल किस तरह बेजान कागज पर जीवन की धड़कनें उकेर सकता है।

Pratahkal Bureau
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