हनुमानगढ़। उत्तर पश्चिम रेलवे के बीकानेर मंडल के अंतर्गत आने वाले हनुमानगढ़-सूरतगढ़ रेलखंड पर सुगम और सुरक्षित रेल संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। रेलवे प्रशासन ने अधोसंरचना विकास के उद्देश्य से इस मार्ग पर मेगा ब्लॉक लेने का निर्णय लिया है, जिसके परिणामस्वरूप डबली राठान और पीलीबंगा स्टेशनों के बीच रेल यातायात पूरी तरह प्रभावित रहेगा। इस विकास कार्य के केंद्र में समपार फाटक संख्या 78 पर 'रेलवे अंडर ब्रिज' (आरयूबी) का निर्माण और ब्रिज संख्या 53 पर आरसीसी बॉक्स लॉन्चिंग की जटिल प्रक्रिया शामिल है। आधुनिक तकनीक और बेहतर कनेक्टिविटी की इस कवायद के कारण यात्रियों को आगामी 12 फरवरी को भारी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि इस दिन क्षेत्र की प्रमुख रेल सेवाएं पटरी से उतरी रहेंगी।

उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जन संपर्क अधिकारी श्री शशि किरण ने इस महत्वपूर्ण परिचालन बदलाव की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि रेलवे की प्राथमिकता तकनीकी सुधारों के साथ यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उनके अनुसार, निर्धारित ब्लॉक अवधि के दौरान समपार फाटक संख्या 78 पर आरयूबी के निर्माण कार्य को गति दी जाएगी, जो भविष्य में सड़क यातायात और रेल संचालन दोनों को सुगम बनाएगा। इसी समय अंतराल में ब्रिज संख्या 53 पर भी आरसीसी बॉक्स लॉन्चिंग का कार्य संपन्न किया जाएगा। इन कार्यों की संवेदनशीलता और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने प्रारंभिक स्टेशनों से ही कई प्रमुख स्पेशल और पैसेंजर ट्रेनों को पूर्णतः रद्द करने का आदेश जारी किया है।

इस प्रशासनिक निर्णय के कारण विशेष रूप से बठिण्डा, अनूपगढ़ और सूरतगढ़ के बीच आवागमन करने वाले दैनिक यात्रियों की दिनचर्या प्रभावित होगी। रद्द की गई रेल सेवाओं में गाड़ी संख्या 04771, बठिण्डा-अनूपगढ़ स्पेशल रेलसेवा और गाड़ी संख्या 04772, अनूपगढ़-बठिण्डा स्पेशल रेलसेवा शामिल हैं, जो 12 फरवरी 2026 को अपनी यात्रा प्रारंभ नहीं करेंगी। इसके अतिरिक्त, क्षेत्रीय संपर्क का मुख्य आधार मानी जाने वाली गाड़ी संख्या 59719, सूरतगढ़-बठिण्डा रेलसेवा और गाड़ी संख्या 59720, बठिण्डा-सूरतगढ़ रेलसेवा को भी इसी तिथि के लिए रद्द कर दिया गया है। रेलवे की ओर से लिया गया यह ब्लॉक न केवल तकनीकी उन्नयन का हिस्सा है, बल्कि यह भविष्य के निर्बाध रेल संचालन की नींव भी रखेगा, हालांकि वर्तमान में यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर निर्भर रहना होगा।

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