अलवर के 48 वर्षीय मरीज की रोबोटिक-सहायता प्राप्त पार्शियल नेफ्रेक्टोमी की गई, जिससे स्वस्थ अंग को सुरक्षित रखते हुए ट्यूमर निकाला गया।

गुरुग्राम/अलवर: चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में रोबोटिक तकनीक ने किडनी कैंसर के उपचार की परिभाषा बदल दी है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण हाल ही में मेदांता- द मेडिसिटी में देखने को मिला। अलवर निवासी 48 वर्षीय राकेश, जो अपने व्यस्त पेशेवर और पारिवारिक जीवन के बीच स्वास्थ्य की अनदेखी कर रहे थे, उनकी पत्नी और बच्चों के आग्रह पर कराई गई एक नियमित स्वास्थ्य जांच ने परिवार को स्तब्ध कर दिया। परीक्षणों में उनकी बाईं किडनी में एक छोटा ट्यूमर पाया गया, जो अंग की रक्त आपूर्ति के अत्यंत निकट स्थित था। हालांकि, समय रहते निदान और ट्यूमर का आकार छोटा होने के कारण डॉक्टरों ने पूरी किडनी निकालने के बजाय केवल कैंसरग्रस्त हिस्से को हटाने का परामर्श दिया, ताकि स्वस्थ किडनी को सुरक्षित रखा जा सके।

सभी आवश्यक चिकित्सा आकलनों के उपरांत, राकेश की रोबोटिक-सहायता प्राप्त पार्शियल नेफ्रेक्टोमी संपन्न की गई। न्यूज़वीक द्वारा वर्ष 2026 में भारत के सर्वश्रेष्ठ अस्पताल के रूप में प्रतिष्ठित मेदांता- द मेडिसिटी के अनुभवी विशेषज्ञों ने इस जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। अत्याधुनिक रोबोटिक सिस्टम की सटीकता के कारण राकेश की रिकवरी उम्मीद से कहीं अधिक तेज रही और वे कुछ ही दिनों में सामान्य रूप से चलने-फिरने में सक्षम होकर घर लौट आए।

भारत में किडनी कैंसर, जिसे रीनल सेल कार्सिनोमा (आरसीसी) भी कहा जाता है, शीर्ष दस सबसे आम कैंसरों में शामिल है, जिसके प्रतिवर्ष लगभग 16,000 से 18,000 नए मामले दर्ज किए जाते हैं। मेदांता गुरुग्राम में यूरो-ऑन्कोलॉजी और रोबोटिक सर्जरी के सीनियर डायरेक्टर एवं एचओडी, डॉ. पुनीत अहलूवालिया ने इस सफलता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ट्यूमर की खबर से अक्सर मरीज घबरा जाते हैं कि उनकी पूरी किडनी निकालनी होगी, किंतु आधुनिक रोबोटिक तकनीक ने अब इसे वैकल्पिक बना दिया है। डॉ. अहलूवालिया के अनुसार, रोबोटिक आर्म्स सर्जन को शरीर के संवेदनशील हिस्सों में उच्च सटीकता और 3डी आवर्धित दृश्य के साथ ऑपरेशन करने की सुविधा देते हैं। इससे स्वस्थ किडनी को बचाना संभव होता है, जो भविष्य में होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं जैसे हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और डायलिसिस की आवश्यकता के जोखिम को न्यूनतम कर देता है।

पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में यह तकनीक कम दर्द, न्यूनतम रक्तस्राव, छोटे निशान और अस्पताल में कम प्रवास जैसे लाभ प्रदान करती है। डॉ. अहलूवालिया ने रिकवरी के लिए पर्याप्त जल संचयन, पौष्टिक आहार और धूम्रपान व शराब से दूरी बनाए रखने के साथ-साथ भारी वजन उठाने से बचने की सलाह दी है। उन्होंने जनहित में चेतावनी दी कि पेशाब में खून आना, पीठ या बाजू में दर्द, अकारण वजन घटना, थकान या बार-बार बुखार जैसे लक्षणों को कदापि नजरअंदाज न करें, क्योंकि ये किडनी कैंसर के प्रारंभिक संकेत हो सकते हैं।

Pratahkal Newsroom

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