महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के 39वें स्थापना दिवस समारोह में राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने विद्यार्थियों को सभ्यता, नैतिकता और मानवता का पाठ पढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल बौद्धिक विकास नहीं, बल्कि ईमानदारी और मानवीय मूल्यों से युक्त व्यक्तित्व निर्माण भी होना चाहिए।

राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने समारोह में कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती ने अशिक्षा को दूर कर वैदिक ज्ञान के प्रसार को अपनी गुरुदक्षिणा माना था। उनके द्वारा स्थापित आर्य समाज ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया और भारत विभाजन के समय शरणार्थियों की सहायता भी की। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती ने समाज सुधार और समाज के संगठन के लिए विशेष कार्य किया, जिसकी पहचान विश्वभर में है। उनके बताए आदर्शों को जीवन में अपनाना चाहिए।

शनिवार को आयोजित स्थापना दिवस समारोह में राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थियों को सभ्यता, नैतिकता और मानवता की शिक्षा देने से उनमें ईमानदारी के गुण विकसित होंगे। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति में नैतिक शिक्षा को विशेष स्थान दिया गया है। राज्यपाल ने कहा कि लॉर्ड मैकाले ने भारत को गुलाम बनाए रखने के लिए अंग्रेजी शिक्षा पद्धति लागू की, जिससे व्यक्ति अपनी जड़ों से दूर होने लगा। उस समय 8 लाख से अधिक गुरुकुल संचालित होते थे, जिन्हें बंद किया गया। साथ ही प्रत्येक घर में चलने वाले घरेलू उद्योगों को भी नष्ट किया गया। उन्होंने कालीबाई भील के शिक्षा के लिए दिए गए बलिदान का भी उल्लेख किया।

राज्यपाल श्री बागडे ने कहा कि विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता बढ़ाने से प्रतिभाशाली युवा तैयार होंगे और भारतीय युवा विश्व में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएंगे। उन्होंने हाल ही में आयोजित नीट परीक्षा के परिणामों का उल्लेख करते हुए कहा कि संख्या के अनुसार राजस्थान दूसरे स्थान पर तथा परिणाम की दृष्टि से प्रथम स्थान पर रहा। उत्तरप्रदेश में 3.28 लाख विद्यार्थियों ने परीक्षा दी, जिनमें से 1.70 लाख विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए, जो 51.93 प्रतिशत है। वहीं राजस्थान में 1.92 लाख विद्यार्थियों में से 1.33 लाख विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए, जो 69.34 प्रतिशत है।

उन्होंने कहा कि नकल रोकने के लिए सरकार ने नया कानून बनाया है। इसमें 10 करोड़ रुपये के जुर्माने के साथ-साथ कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। इससे असामाजिक तत्व अपराध करने से डरेंगे। नकल मुक्त परीक्षा की दिशा में यह शुरुआत है और भविष्य में सभी परीक्षाएं नकल मुक्त होंगी। उन्होंने बताया कि नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत रविवार को शपथ दिलाई जाएगी।

समारोह में विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा संभाग स्तर पर विश्वविद्यालय शुरू करने के लिए आंदोलन चलाया गया था, जिसके कारण महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1987 में हुई। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के प्रथम कुलगुरू श्री पुरुषोत्तम चतुर्वेदी थे और इसकी शुरुआत डीएवी कॉलेज परिसर से हुई थी। वर्तमान में 464 महाविद्यालय इससे संबद्ध हैं। विश्वविद्यालय को बी++ नेट ग्रेड मिला है। उन्होंने बताया कि अब नया योग विश्वविद्यालय भी अजमेर में बनने जा रहा है।

श्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि भारत के विश्वविद्यालय ज्ञान के मंदिर हैं। यहां विद्यार्थियों के लिए जीवन का उद्देश्य और दृष्टि निर्माण का कार्य किया जाता है। विश्वविद्यालयों की उपलब्धियां यहां के विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त किए गए लक्ष्यों से तय होती हैं। उन्होंने कहा कि भारत सर्वाधिक युवा आबादी वाला देश है और यह युवा दर्शक की भूमिका के बजाय व्यवस्था परिवर्तन की चाह रखता है। इसलिए विश्वविद्यालयों को परिणाम देने वाला बनना होगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल परीक्षा लेने के स्थान नहीं, बल्कि अनुसंधान और नवाचार के केंद्र बनने चाहिए तथा अपने ज्ञान का उपयोग मानवता के हित में करना चाहिए।

जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय का छात्र होना गौरवशाली है और विधायक के रूप में विश्वविद्यालय की सेवा करना सौभाग्यशाली है। उन्होंने कहा कि पुराने समय से अजमेर का विशेष महत्व रहा है। पुष्कर की अपनी पहचान है और यहां सम्पूर्ण भारत बसता है।

समारोह में विश्वविद्यालय के नवोद्धार कार्यों का लोकार्पण, शुभारम्भ और शिलान्यास किया गया। इनमें एकलव्य भवन, वाल्मिकी भवन, 11 केवी केन्द्र भवन, चारदिवारी, प्राणज्ञ भवन, महाराणा प्रताप भवन, विश्वकर्मा भवन, राजस्थानी भाषा अध्ययन केन्द्र, महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय पॉडकास्ट कक्ष, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष और विश्वविद्यालय का उत्तर प्रवेश द्वार शामिल हैं।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय की त्रैमासिक पत्रिका ‘त्रिवेणी’ का विमोचन किया गया। साथ ही वैदिक हवन में पूर्णाहुति दी गई। समारोह के दौरान रक्तदान शिविर और स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का अवलोकन किया गया। ईसीजी केन्द्र का उद्घाटन कर वृक्षारोपण भी किया गया। स्थापना दिवस समारोह में शिक्षा, नैतिक मूल्यों और विश्वविद्यालय के विकास कार्यों को लेकर कई महत्वपूर्ण संदेश दिए गए।

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