स्वामी मोहन लाल महाराज द्वारा भूमि पूजन के साथ मंदिर निर्माण शुरू होगा, जिसमें कम्युनिटी हॉल, पुस्तकालय और ज्ञान केंद्र जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी।

राजधानी के मानसरोवर क्षेत्र में आस्था और सामाजिक सरोकार के एक नए अध्याय का सूत्रपात होने जा रहा है। पूज्य सिंधी पंचायत मानसरोवर संस्था के तत्वावधान में वरुण पथ स्थित भगवान झूलेलाल मंदिर के भव्य पुनर्निर्माण का शुभारंभ 25 अप्रैल को प्रातः 11:15 बजे अत्यंत हर्षोल्लास के साथ किया जाएगा। इस ऐतिहासिक परियोजना का विधिवत भूमि पूजन और नींव पूजन प्रख्यात संत स्वामी मोहन लाल जी महाराज (संत श्री मोनूराम) के कर कमलों द्वारा संपन्न होगा।

संस्था के संरक्षक चंदी राम जसवानी ने जानकारी दी कि लगभग 14 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से निर्मित होने वाला यह मंदिर परिसर न केवल सिंधी समाज की अटूट धार्मिक आस्था का प्रतीक होगा, बल्कि इसे एक वृहद सामाजिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में भी स्थापित किया जा रहा है। करीब 1997 वर्गमीटर के विस्तृत क्षेत्र में फैले इस मंदिर का वर्तमान स्वरूप समय के साथ जीर्ण-शीर्ण हो चुका है, जिसे अब आधुनिक स्थापत्य कला और भव्यता के मेल से पुनर्जीवित किया जाएगा।

प्रस्तावित मंदिर परिसर की धार्मिक महत्ता को रेखांकित करते हुए अध्यक्ष ईश्वर करमानी ने बताया कि मुख्य मंदिर में ईष्ट देव भगवान झूलेलाल के साथ-साथ भगवान शिव, भगवान राधा-कृष्ण, माता दुर्गा, भगवान गणेश और सतगुरु स्वामी टेऊँ राम जी की दिव्य प्रतिमाएं पूर्ण विधि-विधान से स्थापित की जाएंगी। इस गरिमामयी समारोह में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। उनके साथ ही बड़ी संख्या में भामाशाह, श्रद्धालु और समाजबंधु इस पुनीत कार्य के साक्षी बनेंगे। मंदिर निर्माण के प्रति उत्साह का आलम यह है कि कई दानदाताओं ने जहां बड़ी आर्थिक सहायता की घोषणा की है, वहीं अनेक श्रद्धालुओं ने बजरी, ईंट, रोड़ी जैसी निर्माण सामग्री अर्पित करने का संकल्प लिया है।

महासचिव रवि हेमलानी के अनुसार, इस परियोजना में धार्मिक आस्था के समानांतर सामाजिक उपयोगिता का विशेष ध्यान रखा गया है। परिसर के भीतर एक भव्य कम्युनिटी हॉल, सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला, समृद्ध पुस्तकालय और युवाओं के मार्गदर्शन हेतु एक अत्याधुनिक ज्ञान केंद्र का निर्माण किया जाएगा। 15 अप्रैल से जारी 11 दिवसीय विशेष धार्मिक अनुष्ठान, सत्संग और भजन-कीर्तन का समापन भी 25 अप्रैल को इस भव्य भूमि पूजन के साथ होगा। संरक्षक चंदी राम जसवानी ने इस संकल्प को दोहराया कि यह परियोजना मात्र एक भवन निर्माण नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए हमारी समृद्ध संस्कृति, अटूट आस्था और निस्वार्थ सेवा का एक स्थायी स्तंभ साबित होगी, जो समाज में एकता और सांस्कृतिक संरक्षण का संदेश प्रसारित करेगी।

Pratahkal Newsroom

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