जयपुर, 22 जुलाई। मंगला पशु बीमा योजना की प्रगति में लापरवाही को लेकर पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री श्री जोराराम कुमावत ने सख्त रुख अपनाते हुए शासन सचिवालय में पशुपालन विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि लक्ष्यों की प्राप्ति में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

बैठक के दौरान मंत्री श्री कुमावत ने मंगला पशु बीमा योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए बीमा के निर्धारित लक्ष्यों से पिछड़ने वाले जिलों के संयुक्त निदेशकों के खिलाफ तत्काल 17 सीसी के तहत चार्जशीट जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही बीमा लक्ष्यों की शत-प्रतिशत पूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विभाग को विशेष शिविर लगाने के आदेश भी दिए गए।

उन्होंने निर्देशित किया कि बीमाधारक मृत पशु के पोस्टमार्टम के समय संबंधित पशु चिकित्सक और बीमा सर्वेयर दोनों की उपस्थिति अनिवार्य रहेगी। पशुओं के बीमा कार्य को सुचारू और पारदर्शी बनाए रखने के लिए पशु चिकित्सकों की सेवाओं को प्राथमिकता के आधार पर लेने के भी निर्देश दिए गए।

समीक्षा बैठक में गौशालाओं के बीमाधारक पशुओं की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक गौशाला के टैग का रंग अलग-अलग रखने के आदेश भी दिए गए। मंत्री ने जोधपुर संभाग के बालोतरा, बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में भेड़, बकरी एवं ऊंट के बीमा कार्य तथा पाली, जालोर और सिरोही जिलों में गाय एवं भैंस के बीमा कार्य में तेजी लाकर 42 लाख के लक्ष्य को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए अधिकारियों को पाबंद किया।

मंत्री श्री जोराराम कुमावत ने विभाग में लंबित सभी बीमा क्लेम और बीमा पॉलिसी से जुड़े रुके हुए कार्यों को शीघ्र अति शीघ्र पूरा करने के कड़े निर्देश भी दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं का लाभ पशुपालकों तक पहुंचाने में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में शासन सचिव (पशुपालन) विकास सीताराम भाले, पशुपालन विभाग के डायरेक्टर सुरेश कुमार मीणा, एसआईपीएफ की निदेशक हेमपुष्पा सहित पशुपालन एवं एसआईपीएफ विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों से स्पष्ट संकेत मिला कि मंगला पशु बीमा योजना के लक्ष्यों की समयबद्ध पूर्ति और लंबित कार्यों के निस्तारण को विभाग ने सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा है।

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