जोधपुर में उमड़ा माहेश्वरी महाकुंभ: राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा—जहाँ बैलगाड़ी नहीं पहुँचती, वहाँ माहेश्वरी समाज राष्ट्र निर्माण की अलख जगाता है
जोधपुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय माहेश्वरी महाअधिवेशन में राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने माहेश्वरी समाज को भारतीय सांस्कृतिक चेतना का सशक्त स्वरूप बताया। उन्होंने समाज की उद्यमिता, राष्ट्र निर्माण में योगदान और अखिल भारतीय माहेश्वरी महासभा के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए परंपराओं के साथ भविष्य गढ़ने का आह्वान किया। पढ़ें, जोधपुर महाकुंभ की यह विशेष रिपोर्ट।

जोधपुर। सूर्य नगरी जोधपुर की धरा रविवार को उस समय भारतीय उद्यमिता और सांस्कृतिक वैभव की साक्षी बनी, जब अंतरराष्ट्रीय माहेश्वरी महाअधिवेशन एवं माहेश्वरी महाकुंभ के मंच से राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने समाज की गौरवशाली विरासत और भविष्य के रोडमैप का शंखनाद किया। समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि माहेश्वरी समाज केवल एक समुदाय विशेष तक सीमित नहीं है, अपितु यह भारतीय सांस्कृतिक चेतना का वह सशक्त स्वरूप है जिसने सदियों से देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना को संबल प्रदान किया है।
महाकुंभ के भव्य आयोजन में जनसमूह को उद्वेलित करते हुए राज्यपाल श्री बागडे ने समाज की अंतर्निहित शक्ति और प्रतिभाओं का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि प्रगति की असली मशाल वही समाज जला सकता है जो अपनी प्रतिभाओं को न केवल पहचानता है, बल्कि उन्हें पुष्पित-पल्लवित होने के उचित अवसर भी प्रदान करता है। राष्ट्र की परिभाषा को भौगोलिक सीमाओं से ऊपर उठाते हुए उन्होंने इसे एक 'जीवंत दर्शन' बताया, जिसमें माहेश्वरी समाज की एकता, समान संस्कृति और नैतिक मूल्य राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बनकर उभरे हैं। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि जिस प्रकार एक निरंतर प्रवाहमान धारा अपनी राह स्वयं बनाती है, वैसे ही यह समाज भारतीय संस्कृति के संरक्षण में अग्रणी रहा है।
संबोधन के दौरान राज्यपाल ने माहेश्वरी समाज की ऐतिहासिक उत्पत्ति और उनकी विख्यात उद्यमिता का भावपूर्ण उल्लेख किया। उन्होंने उस लोकप्रिय कहावत को उद्धृत करते हुए समाज के साहस की सराहना की कि "जहाँ बैलगाड़ी नहीं पहुँचती, वहाँ मारवाड़ी पहुँचते हैं," और इस साहसिक यात्रा में माहेश्वरी समाज की भूमिका सदैव नेतृत्वकारी रही है। उद्योग, व्यापार और वर्तमान के स्टार्ट-अप युग से लेकर महिला सशक्तिकरण और समाज कल्याण तक, अखिल भारतीय माहेश्वरी महासभा द्वारा किए जा रहे कार्यों की उन्होंने मुक्त कंठ से प्रशंसा की। राज्यपाल ने समाज की वर्तमान पीढ़ी से आह्वान किया कि वे परंपराओं की जड़ों को थामे रखते हुए शिक्षा, कौशल विकास और मानवीय मूल्यों के माध्यम से भविष्य की चुनौतियों का सामना करें। यह महाकुंभ न केवल एक सम्मेलन रहा, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माण में एक जागरूक समाज की सक्रिय सहभागिता का जीवंत प्रमाण बन गया।

Pratahkal Bureau
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