महाशिवरात्रि पर बन रहे 3 योगों के बारे में ज्योतिष परिषद एवं शोध संस्थान निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ. पंडित पुरुषोत्तम गौड़ ने विस्तार से बताया है। इस बार महाशिवरात्रि पड़ रही है, जो भगवान भोलेनाथ का बहुत ही विशेष दिन है। इस दिन भगवान भोलेनाथ के भक्त विशेष पूजा अर्चना करते हैं। आखिर फरवरी में किस दिन महाशिवरात्रि मनाई जाएगी, कितने बजे से शुरू हो रही है और साथ ही इस बार के महाशिवरात्रि में कौन से तीन विशेष योग बन रहे हैं, जो भोलेनाथ के भक्तों के लिए काफी फलदाई साबित हो सकते हैं, इसकी पूर्ण जानकारी यहाँ दी गई है।


तिथि और शुभ मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य डॉ पंडित पुरुषोत्तम गौड़ बताते हैं कि "इस बार महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण पक्ष त्रयोदशी 15 फरवरी 2026 को है। महाशिवरात्रि यानी त्रयोदशी और चतुर्दशी के मध्य का जो समय होता है, वह बहुत शुभ माना जाता है। दिन में 3 बजकर 59 मिनट के बाद महाशिवरात्रि का पर्व प्रारंभ हो रहा है। महाशिवरात्रि का पर्व जैसे ही शुरू होगा, इसमें उदया तिथि नहीं लिया जाता है। उदित पारण करना चाहिए।"


महाशिवरात्रि पूजन विधि

ज्योतिषाचार्य डॉ पंडित पुरुषोत्तम गौड़ कहते हैं कि महाशिवरात्रि के दिन भक्तों को निम्नलिखित विधि से पूजन करना चाहिए:

  • "प्रातकालीन उठें, स्नान करें और एक पवित्र कलश में शुद्ध जल भर लें।"
  • "साथ में शहद, शक्कर, घी, गुड़ और कुछ प्रसाद ले लें।"
  • "किसी शिवालय में जाकर भगवान भोलेनाथ को स्नान कराएं। दूध, दही, गंगाजल, शहद और शक्कर से स्नान कराएं।"
  • "बेलपत्र, धतूर का पत्ता, धतूर के फल, फूल, आम के बौर और तरह-तरह के ऐसे फूल जो भगवान भोलेनाथ को बहुत प्रिय हैं, 'ओम नमः शिवाय' का जाप करते हुए उन्हें अर्पित करें।"
  • "फिर भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना-आरती करें, जिससे भगवान भोलेनाथ बहुत प्रसन्न होते हैं।"

बन रहे तीन विशेष योग

ज्योतिषाचार्य डॉ पंडित पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया कि इस बार महाशिवरात्रि में 3 प्रकार के विशेष योग भी बन रहे हैं, जो इस महाशिवरात्रि को बहुत विशेष बनाती है:

  1. व्यतिपात योग: "यह विशेष योग होने के कारण जो भी भगवान भोलेनाथ की पूजा करते हैं, इस दौरान साधना, दान, पूजा के लिए अत्यंत फलदाई माना गया है। आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है। ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करने के लिए यह सर्वश्रेष्ठ समय होता है। इस योग में मन को एकाग्र करना आसान होता है, इसलिए ध्यान के लिए उत्तम समय है।"
  2. अमृत सिद्धि योग: "इस दिन शिवजी की कृपा बरसती है। समुद्र, पवित्र नदियों, गंगा या घर में स्नान करें और शिवजी की पूजन कर लें तो अमृत की प्राप्ति होती है।"
  3. सर्वार्थ सिद्धि योग: "इसका मतलब इस दिन कोई भी शुभ कार्य करने के लिए बेहतर समय होता है। कोई नया व्यापार, दुकान शुरू करना है, सोना-चांदी, जमीन खरीदना है, मकान बनाना है तो यह बहुत ही शुभ समय माना जाता है।"

चार प्रहर की पूजा का महत्व

ज्योतिषाचार्य डॉ पंडित पुरुषोत्तम गौड़ कहते हैं कि महाशिवरात्रि में 4 प्रहर की जो पूजा होती है, वह विशेष मानी गई है। बहुत लोग दिन-रात मिलाकर चार पहर पूजा करना पसंद करते हैं, उनके लिए समय इस प्रकार है:

  • प्रथम प्रहर: 15 तारीख की सुबह 6:00 से लेकर 12:00 बजे तक।
  • द्वितीय प्रहर: दोपहर 12:00 से लेकर शाम को 6:00 बजे तक।
  • तृतीय प्रहर: शाम 6:00 बजे से रात 12:00 बजे तक।
  • चतुर्थ प्रहर: रात को 12:00 से सुबह 6:00 बजे तक।

"चार प्रहर की पूजा के बाद आरती, हवन करें और ब्राह्मण भोज कराएं। इसके बाद खुद का भी पारण करें। जिससे भगवान शिव की कृपा आप पर बरसती है। मन को शांति मिलती है और घर में शांति आती है।"

Pratahkal Bureau

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