जयपुर में आदिवासी युवाओं का महासंगम: प्रकृति के उपासकों ने भरी विकास की हुंकार, राष्ट्रीय मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प
जयपुर में आयोजित 17वें आदिवासी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम का भव्य समापन हुआ, जिसमें 5 राज्यों के 200 युवाओं ने शिरकत की। डॉ. सतीश पूनिया ने आदिवासी समाज को प्रकृति का सच्चा उपासक बताते हुए केंद्र सरकार के अभूतपूर्व विकास कार्यों की सराहना की। इस लेख में युवाओं के सशक्तिकरण, सांस्कृतिक विनिमय और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर विस्तृत प्रकाश डाला गया है।

जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर के अमिटी विश्वविद्यालय परिसर में गुरुवार को एक ऐसी तस्वीर उभरी जिसने न केवल देश की सांस्कृतिक विविधता को जीवंत कर दिया, बल्कि विकास की दौड़ में पीछे रह गए अंचलों के युवाओं के भीतर एक नया आत्मविश्वास भी भरा। अवसर था भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (माय भारत केंद्र) और गृह मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित '17वें आदिवासी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम' के भव्य समापन का। 16 से 22 जनवरी 2026 तक चले इस सात दिवसीय आयोजन में छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा जैसे राज्यों के 8 संवेदनशील और आदिवासी बहुल जिलों से आए 200 युवाओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंतिम दिन की गूँज ने यह स्पष्ट कर दिया कि आदिवासी समाज अब केवल वनों का रक्षक ही नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माण का एक सशक्त आधार स्तंभ भी है।
समारोह के मुख्य अतिथि एवं पूर्व विधायक डॉ. सतीश पूनिया ने अपने संबोधन में आदिवासी समाज को प्रकृति का सच्चा उपासक बताते हुए कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा करने वाला यह समुदाय आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास की एक नई इबारत लिख रहा है। डॉ. पूनिया ने इस बात पर विशेष बल दिया कि केंद्र सरकार ने आदिवासी क्षेत्रों में सड़क, चिकित्सा, स्वास्थ्य और शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए जो अभूतपूर्व कार्य किए हैं, उनका परिणाम अब धरातल पर दिखने लगा है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे भारत की इस गौरवशाली विकास यात्रा के सारथी बनें।
इस विनिमय कार्यक्रम की गहराई को स्पष्ट करते हुए गृह मंत्रालय के निदेशक रामराज मीणा ने कहा कि वामपंथी हिंसा और नक्सलवाद की छाया से दूर अमिटी विश्वविद्यालय के सौहार्दपूर्ण वातावरण ने इन युवाओं को अपने व्यक्तित्व को निखारने का एक सुनहरा अवसर प्रदान किया है। उन्होंने रेखांकित किया कि सरकार का मुख्य लक्ष्य इन युवाओं को भयमुक्त वातावरण देकर उन्हें राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय करना है। इसी क्रम में माय भारत राजस्थान के राज्य निदेशक कृष्ण लाल पारचा ने शिक्षा की शक्ति को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि राजस्थान इन युवाओं के लिए एक 'दूसरे घर' जैसा है, जहाँ से प्राप्त अनुभव उन्हें आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से सशक्त बनाएंगे।
आयोजन की सफलता के सूत्रधारों में शामिल माय भारत जयपुर के जिला युवा अधिकारी पंकज यादव और राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक डॉ. मनोज कुमार ने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए आभार व्यक्त किया। सात दिनों तक चले इस शिविर में युवाओं ने न केवल लोक नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियाँ दीं, बल्कि नेतृत्व विकास, करियर मार्गदर्शन और उच्च शिक्षा पर आधारित महत्वपूर्ण कार्यशालाओं में भी शिरकत की। इन युवाओं ने जयपुर के ऐतिहासिक स्थलों, विधानसभा भवन और संग्रहालयों का भ्रमण कर राजस्थान की समृद्ध विरासत को भी करीब से जाना।
कार्यक्रम के समापन पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी युवाओं को नकद पुरस्कार और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। प्रतिभागियों ने अपनी भावनाओं को साझा करते हुए इसे अपने जीवन का सबसे 'अविस्मरणीय अनुभव' बताया। समापन की यह बेला केवल एक कार्यक्रम का अंत नहीं थी, बल्कि उन 200 युवाओं के नए भविष्य की शुरुआत थी, जो अब अपने गांवों में जाकर 'विकसित भारत' का संदेश फैलाएंगे। यह आयोजन एक बार फिर इस सत्य को प्रमाणित कर गया कि विविधता में एकता ही भारत की वास्तविक शक्ति है और आदिवासी युवाओं की प्रतिभा देश के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है।

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