जयपुर। राजस्थान की ऐतिहासिक धरा पर ज्ञान, कला और संस्कृति के सबसे बड़े समागम 'जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल' (JLF) का गुरुवार को भव्य आगाज हुआ। पिंक सिटी के सांस्कृतिक वैभव के बीच मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर इस उत्सव का शुभारंभ किया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने राजस्थान को ज्ञान और वीरता की पुण्यभूमि बताया और स्पष्ट किया कि उनकी सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और समृद्ध साहित्य को संजोने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। उन्होंने इस आयोजन को विचारों का एक ऐसा महासागर करार दिया जो न केवल साहित्य प्रेमियों को जोड़ता है, बल्कि राजस्थान की गौरवशाली विरासत को वैश्विक पटल पर नई पहचान देता है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति की विशिष्टता को रेखांकित करते हुए कहा कि हमारा देश वह पावन स्थान है जहाँ प्रकृति के कण-कण, वृक्षों, पहाड़ों और नदियों की पूजा की जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और उनमें गर्व की अनुभूति जगाने के लिए सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण अनिवार्य है। श्री शर्मा ने जनमानस से साहित्य को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने की भावुक अपील भी की। उन्होंने आमेर के किले से लेकर हवा महल तक का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश की हर विरासत में संस्कृति की अनूठी झलक दिखाई देती है। उनके अनुसार, पृथ्वीराज रासो जैसी वीरगाथाएं, मीरा की अनन्य भक्ति और ढोला-मारू के प्रेम किस्से आज भी करोड़ों दिलों को प्रेरित करते हैं।





साहित्यकारों के योगदान को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने विजयदान देथा, कन्हैयालाल सेठिया और कोमल कोठारी जैसे मनीषियों को राजस्थान की सांस्कृतिक चेतना की मशाल बताया। उन्होंने महाराणा प्रताप के शौर्य, पन्नाधाय के त्याग और अमृता देवी के बलिदान को याद करते हुए कहा कि यह धरती भक्ति और शक्ति का अनुपम संगम है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संदेश को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गुलदस्ते के स्थान पर पुस्तक भेंट करने की परंपरा विकसित होनी चाहिए, क्योंकि किताबें पीढ़ियों तक ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं। उन्होंने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए बताया कि साहित्य ने मुगल आक्रांताओं के खिलाफ संघर्ष से लेकर आजादी के आंदोलन और आपातकाल के काले दौर में तानाशाही को चुनौती देने तक, राष्ट्र निर्माण में सदैव अग्रणी भूमिका निभाई है।

इस गरिमामय समारोह में उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा की उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक श्री राजीव कुमार शर्मा, जेएलएफ की डायरेक्टर सुश्री नमिता गोखले, प्रख्यात इतिहासकार श्री विलियम डेलरिंपल और टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक श्री संजय रॉय सहित देश-विदेश के विख्यात लेखक और बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। यह उत्सव आगामी दिनों में संवाद, विमर्श और सृजन के नए कीर्तिमान स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है।

Pratahkal Bureau

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