जयपुर। राजस्थान की वीर धरा पर इस साल मकर संक्रांति का पर्व एक ऐतिहासिक अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। पर्यटन विभाग की एक अभूतपूर्व पहल के चलते पहली बार राज्य के सभी सातों संभागों— जयपुर, जोधपुर, अजमेर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर और भरतपुर— में एक साथ भव्य 'पतंगोत्सव 2026' का आयोजन किया गया। बुधवार को प्रदेश का आसमान केवल पतंगों से ही नहीं, बल्कि राजस्थान की गौरवशाली लोक संस्कृति और परंपराओं के इंद्रधनुषी रंगों से भी सराबोर नजर आया। इस आयोजन ने न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि सात समंदर पार से आए विदेशी सैलानियों को भी राजस्थानी आतिथ्य और उल्लास के मोहपाश में बांध लिया।

राजधानी जयपुर में उत्सव का मुख्य केंद्र ऐतिहासिक जल महल की पाल बनी। इस भव्य समारोह का शुभारंभ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और हवामहल विधायक बालमुकुंदाचार्य ने नीले गगन में रंगीन गुब्बारे छोड़कर और पतंग उड़ाकर किया। जैसे ही मुख्यमंत्री की पतंग ने आसमान छुआ, पूरा वातावरण उत्साह से भर गया। जल महल की लहरों और अरावली की पहाड़ियों के बीच लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। बाड़मेर के भंवर खान द्वारा लंगा गायन, भवानी नाथ समूह का कालबेलिया नृत्य, और नागौर के अशोक कुमार शर्मा के मयूर नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके साथ ही चित्तौड़गढ़ के भंवर लाल जाट का गैर नृत्य, बालोतरा के हरीश का भपंग वादन, धर्मेंद्र सिंह राजपुरोहित की चंग धमाल और दौसा के बनवारी लाल जाट का कच्ची घोड़ी नृत्य राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता को जीवंत कर रहे थे। जयपुर के प्रेम मीणा का पद दंगल, आनंद बैंड का वादन, बाड़मेर के अकबर का बहुरूपिया रूप, राजू भाट का कठपुतली नृत्य, हनुमान का रावण हत्था और अली मोहम्मद के शहनाई दल ने उत्सव को पूर्णता प्रदान की। सालेहा गाजी की अंग्रेजी और राजेश आचार्य की हिंदी कमेंट्री ने आयोजन के हर पल को जीवंत बनाए रखा।




पर्यटन विभाग, जिला प्रशासन जयपुर, नगर निगम और पुरातत्व विभाग के साझा प्रयासों से आयोजित इस उत्सव में पर्यटकों के लिए तिल के लड्डू, गजक, रेवड़ी और दाल के पकौड़ों का विशेष प्रबंध था। विदेशी मेहमानों के लिए ऊंटगाड़ी की सवारी और निःशुल्क पतंगों ने इस अनुभव को यादगार बना दिया। वहीं भरतपुर के MSJ कॉलेज ग्राउंड में जिला कलेक्टर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, भरतपुर विकास प्राधिकरण आयुक्त, उपखंड अधिकारी और IPS वृत्ताधिकारी सहित जन प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति में पतंगें उड़ीं। जोधपुर के गांधी मैदान में पर्यटन विभाग और नगर निगम के तत्वाधान में इजराइल और फ्रांस के पर्यटकों ने स्थानीय स्कूली बच्चों के साथ मिलकर पतंगबाजी की, जहाँ जोधपुर के ट्रेवल ट्रेड प्रतिनिधियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

रेगिस्तान के शहर बीकानेर में रायसर के धोरों पर एक अलग ही नजारा था, जहाँ पारंपरिक वेशभूषा में बीकानेर वासियों ने अपनी पारंपरिक 'चंदा' पतंग को आसमान की ऊंचाइयों तक पहुँचाया। अजमेर की आनासागर चौपाटी पर जिला कलेक्टर लोक बन्धु, अतिरिक्त जिला कलेक्टर ज्योति ककवानी, नगर निगम उपायुक्त मंजू कुमावत और पर्यटन उप निदेशक कृष्ण कुमार ने उत्सव की कमान संभाली, जहाँ कच्ची घोड़ी नृत्य ने स्थानीय लोगों का उत्साह दोगुना कर दिया। शिक्षा नगरी कोटा के सिटी पार्क में होटल फेडरेशन ऑफ राजस्थान के पदाधिकारियों और लगभग 400 कोचिंग छात्रों ने निःशुल्क पतंगों के साथ संक्रांति का आनंद लिया। झीलों की नगरी उदयपुर के आसमान में पतंगें तितलियों की तरह मंडराती दिखीं, तो वहीं जैसलमेर के शहीद पूनम सिंह स्टेडियम में मुख्य कार्यकारी अधिकारी और उपखंड अधिकारी की मौजूदगी में काईट फेस्टिवल संपन्न हुआ। सिरोही के माउंट आबू स्थित पोलो ग्राउंड में जिला कलेक्टर ने दीप प्रज्वलित कर आयोजन का उद्घाटन किया, जिसमें भारी संख्या में पर्यटकों ने हिस्सा लिया। यह व्यापक आयोजन न केवल मनोरंजन का साधन बना, बल्कि इसने वैश्विक पटल पर राजस्थान की सांस्कृतिक एकता और पर्यटन की असीम संभावनाओं को एक नई पहचान दी है।

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Pratahkal Newsroom

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