भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कुचामन में अपनी गाड़ी पर हुए हमले का उल्लेख करते हुए विपक्ष की राजनीति और असंसदीय भाषा पर गहरी चिंता जताई।

जयपुर, 30 मई 2026। भारतीय जनता पार्टी के राजस्थान प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने विपक्षी राजनेताओं द्वारा लगातार अपनाई जा रही असंसदीय भाषा, अराजक राजनीति और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध किए जा रहे आचरण पर अत्यंत गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि राजनीति में वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक है और विरोध भी दर्ज होना चाहिए, लेकिन विरोध और दुश्मनी के बीच की पतली रेखा को लांघना लोकतंत्र के लिए बेहद घातक है। राठौड़ ने स्पष्ट किया कि भाजपा विचारों का विरोध करती है, परंतु हमारी राजनीतिक संस्कृति में शब्दों की मर्यादा और सार्वजनिक जीवन की गरिमा को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का धर्म सरकार की कमियों को उजागर करना, जनता के मुद्दों को उठाना और वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है, लेकिन व्यक्तिगत कटुता, अपमानजनक शब्दों और सामाजिक वैमनस्य को बढ़ावा देना किसी भी जिम्मेदार राजनीतिक दल या नेता को कतई शोभा नहीं देता। जनप्रतिनिधि की भाषा, व्यवहार और राजनीति कभी भी लोकतांत्रिक मूल्यों के विरूद्ध नहीं होनी चाहिए।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर प्रहार करते हुए कहा कि आज राजनीति में सबसे बड़ी आवश्यकता संवाद, शालीनता और वैचारिक संघर्ष की है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण रूप से कुछ नेता राजनीतिक लाभ के लिए समाज में टकराव और आवेश का वातावरण तैयार करने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। हनुमान बेनीवाल की भाषा और उनके सार्वजनिक वक्तव्यों में बार-बार इसी अराजक प्रवृत्ति की झलक साफ दिखाई देती है। राठौड़ ने अपने कुचामन प्रवास के दौरान हुए घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां हनुमान बेनीवाल के समर्थकों द्वारा उनकी गाड़ी पर हमला किया गया। उस दौरान अचानक कुछ लोग हाथों में तख्तियां लेकर उनके वाहन के समीप पहुंचे और आक्रामक व्यवहार करने लगे। जमीनी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा कर्मियों ने तत्परता दिखाई और उन्हें सुरक्षा कारणों से वाहन से नीचे उतरने से रोक दिया। राठौड़ ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी बात शालीनता से रखना चाहता है तो उसका हमेशा स्वागत है, लेकिन यदि किसी की मंशा संवाद के बजाय भय का वातावरण बनाने या हमला करने जैसी प्रतीत हो, तो यह लोकतांत्रिक विरोध नहीं बल्कि विशुद्ध रूप से अराजकता का संकेत है। इस प्रकार की घिनौनी घटनाएं यह अवश्य दर्शाती हैं कि कुछ लोग लोकतांत्रिक विरोध के बजाय टकराव की राजनीति को बढ़ावा देना चाहते हैं।

मदन राठौड़ ने जनप्रतिनिधियों के नैतिक दायित्वों को रेखांकित करते हुए कहा कि एक जनप्रतिनिधि की मूल जिम्मेदारी युवाओं को सकारात्मक दिशा देना, कानून का सम्मान करना और समाज में अनुशासन एवं लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना होती है। इसके विपरीत, जब कोई नेता सार्वजनिक मंचों से खड़े होकर आम लोगों को बिजली बिल नहीं भरने, मीटर रीडर का विरोध करने, सरकारी व्यवस्थाओं को चुनौती देने या कानून व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करने वाले संदेश देता है, तो वह युवाओं को गलत दिशा में ले जाने का आत्मघाती कार्य करता है। ऐसे नेता सीधे तौर पर कानून के शासन को कमजोर करते हैं। यह पूरी तरह स्पष्ट है कि बेनीवाल युवा पीढ़ी को बर्बाद करने के साथ ही उन्हें पथभ्रष्ट कर रहे हैं और स्वयं एक स्वयंभू सुप्रीमो बन रहे हैं। लोकतंत्र में हर नागरिक को असहमति का पूरा अधिकार है, लेकिन कानून तोड़ने और लोगों को उकसाने का अधिकार किसी को भी नहीं दिया जा सकता।

संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा का हवाला देते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि संविधान की शपथ लेकर संसद और विधानमंडलों में पहुंचने वाले जनप्रतिनिधियों से यह बुनियादी अपेक्षा की जाती है कि वे कानून और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति गहरा सम्मान का भाव रखें। जो लोग स्वयं संविधान की शपथ लेते हैं और फिर बाहर आकर जनता को व्यवस्था के खिलाफ भड़काने का घृणित कार्य करते हैं, उन्हें आत्ममंथन करने की सख्त आवश्यकता है। राजनीतिक जीवन में शब्दों का अपना एक विशेष महत्व होता है, क्योंकि एक नेता के शब्द लाखों लोगों के विचारों को प्रभावित करते हैं। इसलिए सार्वजनिक जीवन में भाषा की गरिमा बनाए रखना अनिवार्य है। अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज कुछ नेता ऐसी घटिया शब्दावली का प्रयोग कर रहे हैं जो न केवल राजनीतिक संवाद को दूषित कर रही है बल्कि लोकतंत्र की प्रतिष्ठा को भी अपूरणीय नुकसान पहुंचा रही है। भाजपा का यह स्पष्ट मानना है कि लोकतंत्र में विपक्ष मजबूत होना चाहिए, सरकार की तीखी आलोचना भी होनी चाहिए और जनहित के मुद्दों पर संघर्ष भी होना चाहिए, लेकिन विरोध का अर्थ व्यक्तिगत दुश्मनी कदापि नहीं होता और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी कभी शत्रु नहीं होते। लोकतंत्र में ऐसा स्वस्थ वातावरण होना चाहिए कि विचारों में घोर मतभेद होने के बावजूद व्यक्ति एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखें।

राठौड़ ने पूरे तंत्र को सचेत करते हुए कहा कि राजनीति को व्यक्तिगत आरोपों, अभद्र भाषा और उकसावे की इस संस्कृति से तत्काल मुक्त करने की आवश्यकता है, क्योंकि समाज के सामने एक आदर्श प्रस्तुत करना ही राजनीतिक नेतृत्व की असली जिम्मेदारी है। यदि राजनीतिक दल और नेता स्वयं स्थापित मर्यादाओं का पालन नहीं करेंगे तो लोकतांत्रिक व्यवस्था अत्यंत कमजोर होगी और व्यवस्था से जनता का विश्वास भी प्रभावित होगा। उन्होंने मीडिया जगत से भी पुरजोर अपील की कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों, शालीन राजनीतिक संवाद और सकारात्मक राजनीति को बढ़ावा देने में अपनी रचनात्मक व निष्पक्ष भूमिका निभाएं। समाज और लोकतंत्र के व्यापक हित में ऐसी राजनीति को प्रोत्साहन मिलना चाहिए जो संवाद, विकास, संवैधानिक मूल्यों और जनसेवा पर आधारित हो। भारतीय जनता पार्टी लोकतांत्रिक परंपराओं, राजनीतिक शुचिता और स्वस्थ संवाद की हमेशा से पक्षधर रही है और आगे भी दृढ़ता से रहेगी। भाजपा वैचारिक संघर्ष से कभी पीछे नहीं हटेगी, लेकिन राजनीति को व्यक्तिगत दुश्मनी, असंसदीय भाषा और अराजकता का माध्यम बनाने के किसी भी कुप्रयास का लोकतांत्रिक व संवैधानिक तरीके से मुंहतोड़ जवाब देती रहेगी।

Pratahkal Newsroom

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