मदन राठौड़ का कांग्रेस पर प्रहार, गहलोत-डोटासरा की राजनीति को बताया 'जलेबी रेस'
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत और डोटासरा पर सोशल मीडिया की राजनीति करने का आरोप लगाया और महिला आरक्षण विधेयक पर कांग्रेस के रुख को नादानी बताया।

जयपुर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने विपक्षी नेताओं की बयानबाजी पर तीखा प्रहार करते हुए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को आड़े हाथों लिया है। राठौड़ ने तंज कसते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बीच इन दिनों 'जलेबी रेस' चल रही है, जहाँ हर कोई एक-दूसरे से आगे निकलकर राजनीतिक अवसर लपकने की व्याकुलता में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके अशोक गहलोत के पास अब कोई ठोस कार्य शेष नहीं बचा है, इसलिए वे अपनी उपस्थिति दर्ज कराने और मनोरंजन के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर अनर्गल सीरीज चला रहे हैं। राठौड़ ने गहलोत की बदलती शब्दावली पर चिंता जताते हुए कहा कि उनकी भाषा अब गंभीरता खो चुकी है और वे जनहित के बजाय केवल व्यक्तिगत व्यस्तता दिखाने के लिए ट्वीट कर रहे हैं।
प्रदेश अध्यक्ष ने गोविंद सिंह डोटासरा के व्यवहार को अमर्यादित बताते हुए कहा कि कांग्रेस अब केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए सकारात्मक सामाजिक कार्यक्रमों का विरोध कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कॉलेज में मणिशंकर अय्यर का कार्यक्रम होता है तो कांग्रेस सराहना करती है, लेकिन जब महिलाएँ अनुमति लेकर कोई आयोजन करती हैं तो उसका विरोध किया जाता है। उन्होंने एनएसयूआई द्वारा महिलाओं के कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जोड़कर फर्जी पोस्टर फैलाने की राजनीति की कड़े शब्दों में निंदा की। राठौड़ ने पूछा कि क्या अब एनएसयूआई में पद पाने की एकमात्र योग्यता केवल आरएसएस का विरोध और भ्रामक नैरेटिव खड़ा करना ही रह गया है? डोटासरा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें डर है कि कहीं टीकाराम जूली उनसे आगे न निकल जाएं, इसलिए वे अपनी खिसकती जमीन बचाने के लिए हर कार्य में नुक्ताचीनी कर रहे हैं।
मदन राठौड़ ने कांग्रेस की वर्तमान राजनीति को केवल वक्तव्य, स्टेटमेंट और सोशल मीडिया तक सीमित करार दिया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं का धरातल पर जनहित से कोई वास्ता नहीं रह गया है और ये तीनों नेता केवल 'मुंगेरी लाल के हसीन सपने' देख रहे हैं। राठौड़ ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना आवश्यक है, लेकिन कांग्रेस तब तक मजबूत नहीं हो सकती जब तक वह परिवारवाद से बाहर नहीं निकलती। उन्होंने बंगाल, पंजाब, बिहार, तमिलनाडु और केरल का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस का पतन सुनिश्चित है। महिला आरक्षण विधेयक पर कांग्रेस को घेरते हुए राठौड़ ने कहा कि जब यह लोकसभा में सर्वसम्मति से पारित हुआ, तब शायद इनके नेता विदेश यात्रा पर थे। अब राज्यसभा में होने वाली बहस से डरी कांग्रेस बैकडोर से इसका विरोध कर रही है, जो उनके महिला विरोधी चरित्र को उजागर करता है।

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