भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस को महिला विरोधी बताते हुए शाहबानो मामले और महिला आरक्षण विधेयक पर कड़ा प्रहार किया और इसे आत्मसम्मान पर आघात बताया।

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए उसे महिला विरोधी करार दिया है। जयपुर में आयोजित प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इतिहास महिलाओं के अधिकारों के प्रति सदैव उपेक्षापूर्ण रहा है, जिसका सबसे स्पष्ट और ज्वलंत उदाहरण शाहबानो प्रकरण है। राठौड़ ने आरोप लगाया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने संविधान में संशोधन कर उच्चतम न्यायालय के निर्णय को निष्प्रभावी बना दिया था, जिससे एक बेसहारा महिला को न्याय से वंचित होना पड़ा। उन्होंने इस कदम को न केवल उस महिला के साथ अन्याय बताया, बल्कि इसे देश की करोड़ों मुस्लिम बहनों के आत्मसम्मान पर गहरा आघात करार दिया।

मदन राठौड़ ने कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने महिलाओं को कभी सशक्त नेतृत्व के रूप में नहीं, बल्कि केवल एक "साइलेंट वोटर" के रूप में देखा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज की नारी किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है; वे न केवल उद्योग चला रही हैं, बल्कि विज्ञान और अंतरिक्ष जैसे जटिल क्षेत्रों में भी अपनी विशिष्ट पहचान बना रही हैं। राठौड़ के अनुसार, महिलाएं अब मूक मतदाता नहीं, अपितु देश के भविष्य को दिशा देने वाली एक निर्णायक शक्ति हैं, जिन्हें विधानसभा और लोकसभा में पर्याप्त अवसर मिलना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी ने मुस्लिम महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए हैं, जिससे उनके आत्मविश्वास और स्वाभिमान में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि श्रद्धेय भैंरो सिंह शेखावत ने पंचायतों और निकायों में महिलाओं को आरक्षण प्रदान कर उनके राजनीतिक सशक्तिकरण की ऐतिहासिक नींव रखी थी। इसी वैचारिक यात्रा को आगे बढ़ाते हुए अटल बिहारी वाजपेयी सहित भाजपा के कई दिग्गज नेताओं ने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व दिलाने के निरंतर प्रयास किए। उन्होंने रेखांकित किया कि ऐसे महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जिसमें कांग्रेस के सकारात्मक सहयोग की अपेक्षा थी। हालांकि, राठौड़ ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि कांग्रेस को सदैव यह भय सताता रहा है कि महिलाओं को अधिक अधिकार मिलने से उसका राजनीतिक आधार कमजोर हो जाएगा, इसीलिए वह ऐसे विधेयकों का समर्थन करने से बचती रही है।

राठौड़ ने कड़े शब्दों में कहा कि कांग्रेस की यह असुरक्षा उसकी पारंपरिक वोट बैंक की राजनीति को बचाने की कोशिश है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि देश की महिलाएं अब जागृत हो चुकी हैं और वे अपने सम्मान तथा प्रतिनिधित्व के मार्ग में किसी भी प्रकार के राजनीतिक छल-कपट को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगी। समय की मांग है कि महिलाओं को विधायी निकायों में उनका उचित अधिकार मिले और जो भी इस मार्ग में अवरोध उत्पन्न करेगा, उसे प्रदेश और देश की जनता कड़ा जवाब देगी। इस प्रकार, मदन राठौड़ ने महिला सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।

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