मदन राठौड़ का कांग्रेस पर हमला, विदेशी संगठनों से संबंधों पर मांगा जवाब
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व से विदेशी संगठनों के साथ संपर्कों और विरोध-प्रदर्शनों की फंडिंग पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

जयपुर में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस पर विदेशी संगठनों से संबंधों का आरोप लगाया।
जयपुर, 23 अक्टूबर 2026। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व से विदेशी संगठनों के साथ संपर्क, अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक समूहों के प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात, समझौतों और विरोध-प्रदर्शनों की फंडिंग को लेकर उठ रहे सवालों पर जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को चुप्पी तोड़कर तथ्यों और दस्तावेजों के साथ अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। देश की जनता इन मामलों में जवाब चाहती है और कांग्रेस नेतृत्व को सवालों से बचने के बजाय पारदर्शिता बरतनी चाहिए।
मदन राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस को स्पष्ट करना होगा कि विदेशी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठकों का उद्देश्य क्या था, किन विषयों पर चर्चा हुई और क्या समझौते किए गए। उन्होंने एक प्रतिष्ठित न्यूज मैगजीन की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल और इंडियन अलायंस पेरिस का जिक्र फ्रांस सहित दुनिया के विभिन्न देशों में हुए दंगों, आगजनी और ऐतिहासिक स्मारकों को नष्ट करने की घटनाओं के संदर्भ में किया गया है। राठौड़ के अनुसार, इन संगठनों का संबंध दुनिया के 9 देशों में काम करने वाले 101 संगठनों से जुड़ता है और कांग्रेस के संबंध इन दोनों संगठनों से स्थापित होते हैं। उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि क्या उसका संबंध रेड ग्रीन इको सिस्टम से है, जिसमें वामपंथी और इस्लामिस्ट समूह शामिल हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने 10 जनपथ पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी की प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई मुलाकात के संदर्भ में भी कांग्रेस से पारदर्शिता बरतने की मांग की। उन्होंने कहा कि जनता जानना चाहती है कि इस बैठक का एजेंडा क्या था, किन मुद्दों पर चर्चा हुई और क्या इस संगठन का कांग्रेस पार्टी, राहुल गांधी के कार्यालय अथवा इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के साथ कोई समझौता है। राठौड़ ने कहा कि यदि सब कुछ स्पष्ट और नियमों के अनुरूप है, तो कांग्रेस को तथ्य सार्वजनिक करने में संकोच नहीं करना चाहिए।
राठौड़ ने कहा कि भारतीय राजनीति में विदेशी प्रभाव, आर्थिक सहायता और राजनीतिक गतिविधियों के बीच संभावित संबंधों को लेकर उठने वाले सवालों की अनदेखी नहीं की जा सकती। उन्होंने विरोध-प्रदर्शनों की फंडिंग पर भी कांग्रेस से स्पष्ट जानकारी मांगी। उन्होंने सवाल किया कि इन प्रदर्शनों को कितनी विदेशी सहायता मिली है और प्राप्त सहायता का स्रोत, स्वरूप तथा उद्देश्य क्या है। उनके अनुसार, इन सवालों का जवाब आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि प्रमाणित तथ्यों के आधार पर दिया जाना चाहिए।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस नेतृत्व से चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ वर्ष 2008 में हुए समझौते के संबंध में भी देश के सामने स्पष्ट जानकारी रखने को कहा। उन्होंने सवाल उठाया कि उस समझौते का उद्देश्य क्या था, उसमें किन विषयों को शामिल किया गया था और उसके तहत क्या प्रतिबद्धताएं व्यक्त की गई थीं। राठौड़ ने कहा कि इन सवालों पर पारदर्शिता लोकतांत्रिक जवाबदेही का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र किसी राजनीतिक परिवार की सुविधा से नहीं, बल्कि संविधान, कानून और जनता के जनादेश से चलता है। संसद, सर्वोच्च न्यायालय और अन्य संवैधानिक संस्थाएं देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के मजबूत स्तंभ हैं। इन संस्थाओं की गरिमा और स्वतंत्रता की रक्षा करना प्रत्येक राजनीतिक दल का दायित्व है। राजनीतिक विरोध के नाम पर हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कानून तोड़ने की छूट किसी को नहीं है।
राठौड़ ने राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि वे देश के आंतरिक मामलों से जुड़े मुद्दों पर भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक प्रक्रियाओं को सर्वोपरि मानते हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि भारत की समस्याओं का समाधान देश की संसद, न्यायपालिका, संवैधानिक व्यवस्था और जनता के जनादेश के माध्यम से ही होना चाहिए। किसी भी विदेशी संगठन को भारत के आंतरिक राजनीतिक मामलों में अनुचित प्रभाव डालने का अवसर नहीं मिलना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए राठौड़ ने कहा कि भारत वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका और प्रतिष्ठा मजबूत कर रहा है। ऐसे समय में सभी राजनीतिक दलों से अपेक्षा है कि वे राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन देश की संप्रभुता, लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और राष्ट्रीय हितों के प्रश्न पर किसी भी प्रकार की अस्पष्टता नहीं होनी चाहिए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने दोहराया कि राष्ट्रीय हितों से ऊपर राजनीति नहीं हो सकती और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को भाजपा बर्दाश्त नहीं करेगी।

