मदन राठौड़ का गहलोत पर पलटवार, बोले- पहले तय करें सचिन पायलट के साथ हैं या नहीं
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयानों पर पलटवार करते हुए परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर तीखा हमला बोला है।

जयपुर में भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़।
जयपुर, 14 अक्टूबर 2026। राजस्थान में परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयानों पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने गहलोत के बयानों को कुर्सी की चाह, छटपटाहट और खीझ का परिणाम बताते हुए कहा कि परिसीमन के नाम पर कांग्रेस अपनी नाकामियों को छिपाने की कोशिश कर रही है। राठौड़ ने गहलोत के सामने सचिन पायलट को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें पहले स्पष्ट करना चाहिए कि वह पायलट के साथ हैं या आज भी उन्हें पहले की तरह नाकारा और निकम्मा मानते हैं।
मदन राठौड़ ने कहा कि परिसीमन को लेकर अनर्गल बयान देने वाले अशोक गहलोत भूल रहे हैं कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने स्वयं नगर निकायों का किस तरह परिसीमन करवाया था। उनके अनुसार, उस दौरान शहरों में दो-दो नगर निगम बनाए गए, ताकि भाजपा की जीत नहीं हो सके। उन्होंने आरोप लगाया कि समुदाय विशेष के वार्डों की संख्या बढ़ाने और भाजपा के परंपरागत वार्डों की संख्या सीमित करने का काम किया गया था। राठौड़ ने कहा कि अब गहलोत को परिसीमन याद आ रहा है और उनके मौजूदा बयान को भी इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि गहलोत बार-बार राजस्थान में अपनी ही पार्टी के नेताओं की ओर से उनके खिलाफ किए गए विद्रोह को लेकर भाजपा पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने विद्रोह किया था, उन्हीं के साथ कभी बाइक पर तो कभी आलाकमान के सामने तस्वीरें खिंचवाकर गहलोत यह संदेश देते रहे कि सब एक हैं। राठौड़ ने कहा कि गहलोत को पहले स्पष्ट करना चाहिए कि वह सचिन पायलट के साथ हैं या आज भी उन्हें नाकारा और निकम्मा मानकर दोयम दर्जे का व्यवहार कर रहे हैं।
महिला आरक्षण और परिसीमन के जरिए लोकसभा एवं विधानसभा की सीटों में बढ़ोतरी को लेकर दिए जा रहे बयानों पर राठौड़ ने कहा कि अशोक गहलोत की बातों से लगता है कि उन्हें इस विषय की आधी-अधूरी जानकारी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष से महिला आरक्षण विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कराने की अपील की थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि इसका श्रेय भी विपक्ष अपने पास रख सकता है, लेकिन देश की आधी आबादी को अधिकार देने में बाधा नहीं बनना चाहिए। राठौड़ ने आरोप लगाया कि उस समय गहलोत के आलाकमान और स्वयंभू राजकुमार राहुल गांधी महिलाओं को महिला आरक्षण के माध्यम से न्याय दिलाने में बाधा बन गए थे।
चीन का उदाहरण देने पर भी राठौड़ ने गहलोत से सवाल किया। उन्होंने कहा कि गहलोत को बताना चाहिए कि चीन के साथ कांग्रेस का आधिकारिक रूप से ऐसा कौन-सा समझौता हुआ था, जिस पर हस्ताक्षर किए गए थे। राठौड़ ने आरोप लगाया कि चीन के साथ कांग्रेस का आधिकारिक समझौता है, जिसके बारे में आज तक देश की जनता को नहीं बताया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा क्या है, जिसे छिपाया जा रहा है। राठौड़ ने कहा कि गहलोत देश के वरिष्ठ नेता हैं और यदि उन्हें देश की चिंता है तो उन्हें चीन के साथ हुए एमओयू को सार्वजनिक करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिस समझौते पर देश के सर्वोच्च न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए सवाल उठाया था कि एक राजनीतिक दल दूसरे देश की सरकार या दल के साथ समझौता कैसे कर सकता है।
परिसीमन को लेकर कांग्रेस की आलोचना करते हुए राठौड़ ने कहा कि परिसीमन तो 2024 में हुआ है, लेकिन कांग्रेस कई प्रदेशों में चार-चार दशक से सत्ता से बाहर है। ऐसे में परिसीमन पर ठीकरा फोड़कर कांग्रेस अपनी नाकामियों को छिपाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा भी वर्षों तक विपक्ष में रही, लेकिन उसने जनता के साथ विश्वास बनाया और सत्ता में आने के बाद लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का काम किया। राठौड़ के मुताबिक, यही कारण है कि हर दशक में भारतीय जनता पार्टी का ग्राफ बढ़ता गया, जबकि कांग्रेस का ग्राफ लगातार गिरता चला गया।
सुप्रीम कोर्ट जाने की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए राठौड़ ने कहा कि हर जगह की अपनी व्यवस्था और मर्यादा होती है। यदि उसका पालन नहीं किया जाएगा तो देश का लोकतांत्रिक ढांचा चरमरा जाएगा और अराजकता का माहौल पैदा होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस न तो देश की जनता के जनादेश को मानती है और न ही बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के लिखे संविधान की व्यवस्थाओं को स्वीकार करती है।
राठौड़ ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि वह जो कह देंगे, देश की न्यायपालिका, चुनाव आयोग और कार्यपालिका भी उसी तरह चलने लगेंगी, जैसे कांग्रेस में उनकी बात मानी जाती है और गहलोत भी उसे मानते हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने अपने बयान में परिसीमन, महिला आरक्षण, चीन के साथ समझौते और कांग्रेस के राजनीतिक रुख को लेकर गहलोत तथा राहुल गांधी पर सवाल उठाए।

