HCG जयपुर में 15 साल पुराने लिम्फेडेमा का सफल इलाज, पहली VLNT सर्जरी से मरीज को राहत
एचसीजी जयपुर में 15 साल पुराने लिम्फेडेमा का सफल इलाज, पहली VLNT सर्जरी के बाद मरीज के पैर की सूजन में 80% कमी आई।

तस्वीर में एचसीजी हॉस्पिटल जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉक्टर और मेडिकल टीम बैठे हुए नजर आ रहे हैं।
नागौर के 61 वर्षीय पुरुष मरीज को 15 वर्षों से बाएं पैर में गंभीर सूजन की समस्या से जूझने के बाद एचसीजी हॉस्पिटल जयपुर में नई उम्मीद मिली है। अस्पताल के डॉक्टरों ने पहली बार वैस्कुलराइज्ड लिम्फ नोड ट्रांसफर (VLNT) सर्जरी सफलतापूर्वक की। इस जटिल प्रक्रिया के बाद मरीज के प्रभावित पैर के आकार में लगभग 80 प्रतिशत की कमी आई है और भारीपन व परेशानी से भी राहत मिली है।
लिम्फेडेमा ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर का लिम्फेटिक सिस्टम अतिरिक्त तरल पदार्थ को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाता। इसके कारण शरीर के प्रभावित हिस्से में लगातार सूजन बनी रहती है। मरीज एक दशक से अधिक समय से इस समस्या से जूझ रहा था। वर्षों के दौरान सूजन गंभीर होती गई, जिससे उसे चलने-फिरने, रोजमर्रा के काम करने और सामान्य जीवन जीने में कठिनाई होने लगी। सर्जरी सहित पारंपरिक उपचार आजमाने के बावजूद परेशानी बनी रही, जिसके बाद उसने एचसीजी में विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता ली।
विस्तृत जांच के बाद मेडिकल टीम ने वैस्कुलाइज्ड लिम्फ नोड ट्रांसफर को मरीज के लिए सबसे उपयुक्त उपचार माना। इस प्रक्रिया में शरीर के एक हिस्से से स्वस्थ लिम्फ नोड्स निकालकर प्रभावित हिस्से में प्रत्यारोपित किए जाते हैं। इससे लिम्फेटिक फ्लूइड के प्राकृतिक प्रवाह को बहाल करने और समय के साथ सूजन कम करने में मदद मिलती है।
सर्जरी डॉ. सौरभ गर्ग और डॉ. मनीष जैन ने सफलतापूर्वक की। प्रक्रिया में डॉ. गौरव गोयल का भी सहयोग रहा, जिन्होंने सर्जरी के लिए आवश्यक स्वस्थ लिम्फ नोड टिश्यू विशेषज्ञता के साथ प्राप्त किया। जटिल सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया प्रबंधन में डॉ. विकास लाखोटिया का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और समन्वित प्रयासों से सर्जरी सुरक्षित एवं सफलतापूर्वक पूरी हुई।
सर्जरी के दौरान मरीज के दाएं कंधे के क्षेत्र से स्वस्थ लिम्फ नोड टिश्यू सावधानीपूर्वक लिया गया और उसे पिंडली में प्रत्यारोपित किया गया। उन्नत माइक्रोसर्जिकल तकनीकों की मदद से बेहद छोटी रक्त वाहिकाओं को जोड़ा गया, ताकि प्रत्यारोपित टिश्यू को पर्याप्त रक्त आपूर्ति मिल सके और वह लिम्फेटिक ड्रेनेज में सहायता करना शुरू कर सके। करीब 3 घंटे चली सर्जरी बिना किसी जटिलता के पूरी हुई।
सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी सुचारू रही और कोई जटिलता सामने नहीं आई। वह अच्छी तरह स्वस्थ हुआ और सर्जरी के तीसरे दिन उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। प्रक्रिया के बाद करीबी चिकित्सकीय निगरानी में उसकी रिकवरी हुई। प्रभावित पैर के आकार में लगभग 80 प्रतिशत की कमी आई। मरीज ने लक्षणों में भी महत्वपूर्ण सुधार बताया है। प्रभावित पैर में पहले महसूस होने वाले भारीपन और परेशानी से उसे पूरी तरह राहत मिली है। उसे नियमित फॉलो-अप और रिहैबिलिटेशन की सलाह दी गई है, जिससे समय के साथ लिम्फेटिक फंक्शन में और सुधार तथा सूजन में कमी आने की उम्मीद है।
डॉ. सौरभ गर्ग, कंसल्टेंट – प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी, ने कहा, “लिम्फेडेमा से पीड़ित कई मरीजों को लगता है कि उन्हें जीवनभर सूजन के साथ ही रहना होगा, क्योंकि उपचार के विकल्प सीमित हैं। आज वैस्कुलाइज्ड लिम्फ नोड ट्रांसफर (VLNT) और लिम्फो-वेनस एनास्टोमोसिस (LVA) जैसी उन्नत प्रक्रियाएं हमें केवल लक्षणों को नियंत्रित करने के बजाय समस्या के मूल कारण का उपचार करने की सुविधा देती हैं। हमारी पहली VLNT सर्जरी का सफलतापूर्वक किया जाना एचसीजी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और यह राजस्थान में मरीजों के और करीब उन्नत रिकंस्ट्रक्टिव उपचार उपलब्ध कराने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
डॉ. मनीष जैन, कंसल्टेंट – प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी, ने कहा, “इस सर्जरी में असाधारण सटीकता की आवश्यकता होती है, क्योंकि हम ऐसी रक्त वाहिकाओं के साथ काम करते हैं, जिनका आकार केवल कुछ मिलीमीटर होता है। हर चरण की सावधानीपूर्वक योजना बनाना और उसे सही तरीके से पूरा करना जरूरी होता है। इस प्रक्रिया की सफलता एचसीजी में टीमवर्क की मजबूती और उन्नत रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे उन मरीजों को उम्मीद मिलती है, जो कई वर्षों से लिम्फेडेमा के साथ जीवन जी रहे हैं।”
मरीज ने कहा, “15 वर्षों से अधिक समय तक मैं लगातार सूजन और परेशानी से जूझता रहा, जिसका असर मेरी रोजमर्रा की जिंदगी के हर हिस्से पर पड़ा। मैंने लगभग यह स्वीकार कर लिया था कि मुझे जीवनभर इसी स्थिति के साथ रहना होगा। एचसीजी के डॉक्टरों ने मुझे उम्मीद दी, इलाज के हर चरण को समझाया और मेरी पूरी यात्रा के दौरान मेरा साथ दिया। आज मैं अपने भविष्य को लेकर कहीं अधिक आत्मविश्वास महसूस कर रहा हूं और मुझे बेहतर और स्वस्थ जीवन जीने का अवसर देने के लिए पूरी एचसीजी टीम का दिल से धन्यवाद करता हूं।”
डॉ. नरेश सोमानी, डायरेक्टर – ऑन्कोलॉजी एवं एचओडी – मेडिकल ऑन्कोलॉजी, ने कहा, “यह सफल सर्जरी एचसीजी जयपुर के लिए लिम्फेडेमा से पीड़ित मरीजों के लिए उन्नत उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वैस्कुलाइज्ड लिम्फ नोड ट्रांसफर (VLNT) और लिम्फो-वेनस एनास्टोमोसिस (LVA) जैसी प्रक्रियाओं की सुविधा उपलब्ध कराकर अस्पताल का उद्देश्य लंबे समय से अंगों में सूजन से पीड़ित मरीजों को गतिशीलता वापस पाने, परेशानी कम करने और उनके जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करना है।”
डॉक्टरों ने ऑपरेशन थिएटर टीम, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट, नर्सिंग स्टाफ और सपोर्ट स्टाफ के समर्पित प्रयासों को भी सराहा। उनके समन्वित टीमवर्क ने इस जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एचसीजी जयपुर राजस्थान का एकमात्र व्यापक कैंसर केयर सेंटर है, जहां सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं। अस्पताल में अत्याधुनिक तकनीक मौजूद है और मरीजों को कैंसर के उपचार, रिसर्च और तकनीक के क्षेत्र में नवीनतम सुविधाओं तक पहुंच प्राप्त है। एचसीजी कैंसर केयर जयपुर कैंसर केयर प्रदान करने के लिए एक इंटीग्रेटेड अप्रोच अपनाता है। इसमें कुशल और अनुभवी विशेषज्ञों की टीम के साथ उन्नत तकनीकों का संयोजन है, जिससे मरीजों को कैंसर के लिए सही देखभाल और उपचार मिल सके। मरीजों को कैंसर केयर की पूरी श्रृंखला उपलब्ध है—रोकथाम, स्क्रीनिंग, डायग्नोसिस और उपचार से लेकर रिहैबिलिटेशन तथा सपोर्टिव/पैलिएटिव केयर तक।
यह सफल प्रक्रिया एचसीजी जयपुर में लिम्फेडेमा के लंबे समय से पीड़ित मरीजों के लिए उन्नत रिकंस्ट्रक्टिव उपचार सुविधा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

