पूर्वोत्तर भारत के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने की दिशा में पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। 17 जून 2026 की दोपहर 14:22 बजे, रेलवे ने हाफलंग ग्रिड सब-स्टेशन से न्यू हाफलंग ट्रैक्शन सब-स्टेशन तक 132 केवी ट्रांसमिशन लाइन को सफलतापूर्वक ऊर्जावान कर दिया। यह मील का पत्थर रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण लामडिंग-बदरपुर हिल सेक्शन में रेल बिजलीकरण की दिशा में एक निर्णायक कदम है। बराक घाटी और पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत से जोड़ने वाले इस चुनौतीपूर्ण पहाड़ी रूट पर अब इलेक्ट्रिक ट्रेनों के संचालन का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

इस बुनियादी ढांचे के सक्रिय होने के साथ ही, ट्रैक्शन पावर सप्लाई से जुड़े सभी महत्वपूर्ण कार्य अब पूर्णता की ओर हैं। परियोजना के अंतिम चरण में प्रवेश करने के साथ ही, अब सुरक्षा मानकों की जांच, आवश्यक निरीक्षण और ट्रायल रन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। रेलवे प्रशासन के अनुसार, सभी तकनीकी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आगामी कुछ दिनों के भीतर ही इस पहाड़ी खंड पर विद्युत ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।

लामडिंग-बदरपुर सेक्शन का विद्युतीकरण केवल तकनीकी परिवर्तन नहीं, बल्कि इस पूरे क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था के लिए एक व्यापक सुधार है। इलेक्ट्रिक इंजनों के आने से ट्रेनों की ऑपरेशनल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, साथ ही जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होने से न केवल पर्यावरण का संरक्षण होगा, बल्कि रेल परिचालन के मेंटेनेंस खर्च में भी भारी कमी आएगी। माल ढुलाई की बढ़ी हुई क्षमता और तेज गति से संचालित होने वाली रेल सेवाएं भविष्य में पूर्वोत्तर की आर्थिक प्रगति की नई आधारशिला रखेंगी। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे की यह उपलब्धि न केवल बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण का प्रमाण है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र को एक स्वच्छ, तीव्र और अधिक कुशल रेल नेटवर्क के युग में ले जाने की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है।

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