जयपुर। राजस्थान की गुलाबी नगरी आज एक ऐतिहासिक ऊर्जा क्रांति की साक्षी बनी, जब 'भारत रिन्यूएबल एक्सपो 2026' के मंच पर लॉरिट्ज़ नुडसेन (Lauritz Knudsen) इलेक्ट्रिकल एंड ऑटोमेशन ने अपने अगली पीढ़ी के ऊर्जा पोर्टफोलियो का अनावरण किया। यह आयोजन महज एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में आने वाले उस बड़े बदलाव का संकेत है, जहाँ अब फोकस केवल नई क्षमता जोड़ने पर नहीं, बल्कि दशकों तक चलने वाले भरोसेमंद संचालन पर टिक गया है। जयपुर की तपती धूप और राजस्थान की अग्रणी सौर क्षमता के बीच, यह एक्सपो देश के ऊर्जा भविष्य की नई इबारत लिख रहा है।

भारत की सौर ऊर्जा यात्रा ने पिछले एक दशक में अविश्वसनीय रफ्तार पकड़ी है। कुसुम योजना और पीएलआई स्कीम जैसे सरकारी प्रोत्साहनों के दम पर दिसंबर 2025 तक देश ने 135.8 गीगावाट की स्थापित सौर क्षमता का आंकड़ा पार कर लिया है। लेकिन जैसे-जैसे ग्रिड पर बोझ बढ़ रहा है, उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन परियोजनाओं के 20 से 25 वर्षों के जीवनकाल के दौरान उनके प्रदर्शन को बरकरार रखने की है। जयपुर में आयोजित इस एक्सपो में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि मॉड्यूल क्षरण और कमजोर विद्युत कनेक्शन जैसी समस्याओं के कारण उत्पादन में होने वाली कमी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब समय 'डिजिटल इंटेलिजेंस' और 'प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस' का है, ताकि सौर परिसंपत्तियों से पूंजी पर अधिकतम रिटर्न सुनिश्चित किया जा सके।

इस तकनीकी बदलाव का नेतृत्व करते हुए लॉरिट्ज़ नुडसेन ने स्मार्ट इलेक्ट्रिफिकेशन और आईओटी (IoT) आधारित समाधानों की एक विस्तृत श्रृंखला पेश की है। कंपनी ने एक्सपो में अपने उन्नत एसी सॉल्यूशंस, डीसी स्विचगियर, 11kV और 33kV के एमवी स्विचगियर के साथ-साथ स्मार्ट मीटरिंग और क्लाउड-आधारित रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम का प्रदर्शन किया। ये उपकरण न केवल सौर ऊर्जा उत्पादन को सुचारू बनाते हैं, बल्कि रियल-टाइम में खराबी का पता लगाकर उसे तुरंत दूर करने की क्षमता भी रखते हैं। विशेष रूप से एकीकृत ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम और स्टोरेज-इंटीग्रेटेड सिस्टम ने डेवलपर्स और नीति-निर्माताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

लॉरिट्ज़ नुडसेन इलेक्ट्रिकल एंड ऑटोमेशन के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) नरेश कुमार ने इस अवसर पर उद्योग को एक नई दिशा देने वाला वक्तव्य दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा अब उस महत्वपूर्ण मोड़ पर है, जहाँ हर मेगावाट से दीर्घकालिक मूल्य मिलना अनिवार्य है। नरेश कुमार के अनुसार, असली अंतर इस बात से पैदा होगा कि ये संपत्तियां समय के साथ कितना अडिग रहती हैं। उन्होंने वैश्विक अनुभवों का हवाला देते हुए बताया कि कैसे डिजिटल ऑटोमेशन के जरिए मशीनों के बंद रहने के समय (डाउनटाइम) को न्यूनतम किया जा सकता है। उनके संबोधन ने यह स्पष्ट कर दिया कि भविष्य की सौर प्रणालियों में ग्रिड-तैयारी और प्रदर्शन की जवाबदेही ही सफलता का असली पैमाना होगी।

जयपुर का यह एक्सपो केवल तकनीक का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह एक साझा मंच है जहाँ नीति-निर्माता और तकनीक प्रदाता एक सुर में भारत को ऊर्जा-स्वतंत्र बनाने का संकल्प ले रहे हैं। श्नाइडर इलेक्ट्रिक समूह का हिस्सा होने के नाते, लॉरिट्ज़ नुडसेन का यह कदम भारत के 'नेट जीरो' लक्ष्यों को नई मजबूती प्रदान करता है। जैसे-जैसे राजस्थान के विशाल रेगिस्तानों से निकलने वाली सौर ऊर्जा राष्ट्रीय ग्रिड को रोशन कर रही है, जयपुर से निकली यह तकनीकी गूंज पूरे देश के नवीकरणीय ऊर्जा परिदृश्य को और अधिक सुरक्षित, कुशल और निवेश योग्य बनाने का वादा करती है।

Pratahkal Bureau

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