कोटा: राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती पर सेवा संगम का किया शंखनाद, 31 संस्थाएं सम्मानित
कोटा में स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती पर आयोजित 'सेवा संगम' कार्यक्रम में राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने शिरकत की। राज्यपाल ने गरीब कल्याण को ईश्वर की सच्ची सेवा बताते हुए स्वामी जी के चरित्र निर्माण और सकारात्मकता के संदेश को आत्मसात् करने का आह्वान किया। इस अवसर पर समाज सेवा में उत्कृष्ट कार्य करने वाली कोटा की 31 संस्थाओं को सम्मानित कर सेवा के संकल्प को सुदृढ़ किया गया।

जयपुर/कोटा। अध्यात्म और राष्ट्रवाद के पुरोधा स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी एक जीवंत मशाल की तरह हैं, जो आधुनिक भारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। इसी पावन संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से सोमवार को कोटा के शिव ज्योति कॉन्वेंट स्कूल सभागार में एक भव्य 'सेवा संगम' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भारत विकास परिषद कोटा महानगर द्वारा आयोजित इस गरिमामयी समारोह में राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यपाल ने न केवल उनके दर्शन की प्रासंगिकता को रेखांकित किया, बल्कि समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों का उत्साहवर्धन भी किया।
राज्यपाल श्री बागडे ने अपने संबोधन की शुरुआत स्वामी विवेकानंद के ओजस्वी व्यक्तित्व को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि विवेकानंद ने युवाओं को आत्मविश्वास और निडरता का जो मंत्र दिया था, वह आज के प्रतिस्पर्धी युग में और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि यदि व्यक्ति दृढ़ संकल्प के साथ अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित हो जाए, तो दुनिया की कोई भी शक्ति उसे सफल होने से नहीं रोक सकती। उन्होंने विवेकानंद के मानवतावादी दृष्टिकोण को साझा करते हुए स्पष्ट किया कि ईश्वर की सच्ची आराधना मंदिरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गरीब, वंचित और कमजोर वर्ग के कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य करना ही सबसे बड़ी ईश्वर सेवा है। शिक्षा पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि वास्तविक शिक्षा वह है जो केवल सूचनाओं का भंडार न होकर मनुष्य के चरित्र का निर्माण करे और उसमें साहस व एकाग्रता का संचार करे।
समारोह के दौरान राज्यपाल ने विवेकानंद के शिकागो प्रवास का स्मरण कराते हुए कहा कि 1893 के उस ऐतिहासिक भाषण ने वैश्विक स्तर पर भारत की संस्कृति, आध्यात्म और गौरवशाली परंपराओं का लोहा मनवाया था। उन्होंने कहा कि विवेकानंद ने विश्व को सार्वभौमिक सहनशीलता और बंधुत्व का पाठ पढ़ाया था, जिसकी आज पूरे विश्व को आवश्यकता है। राज्यपाल श्री बागडे ने उपस्थित जनसमूह और युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि भारत अपनी बौद्धिक और शारीरिक क्षमता के बल पर पुनः विश्व गुरु के सिंहासन पर विराजमान होगा। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से राष्ट्र की प्रतिष्ठा को विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास करने की अपील की। कार्यक्रम के समापन सत्र में राज्यपाल ने सामाजिक सरोकारों में मिसाल पेश करने वाली कोटा की 31 विभिन्न संस्थाओं को सम्मानित किया, जो निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा में संलग्न हैं। यह आयोजन न केवल एक उत्सव रहा, बल्कि स्वामी विवेकानंद के आदर्शों पर चलकर 'विकसित भारत' के संकल्प को दोहराने का एक महत्वपूर्ण मंच भी बना।

Pratahkal Bureau
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