कोटा-बूंदी को 'जीरो फेटेलिटी' बनाने की मुहिम: सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए अध्यक्ष की बड़ी पहल
कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र को सड़क दुर्घटनाओं से मुक्त बनाने के लिए लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुरू की नई मुहिम। क्या एआई आधारित तकनीक और जनभागीदारी से शून्य हो पाएंगी सड़क मौतें? जानिए इस महत्वाकांक्षी जीरो फेटेलिटी मिशन की पूरी जानकारी।

संसद भवन में कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला।
सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों और उनसे होने वाली असमय मौतों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लोक सभा अध्यक्ष एवं कोटा-बूंदी के सांसद श्री ओम बिरला ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संसद भवन स्थित अपने कार्यालय में आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक में उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र को 'जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट' के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना पर चर्चा की। इस पहल का मुख्य लक्ष्य न केवल सड़क हादसों में होने वाली मौतों को न्यूनतम स्तर तक लाना है, बल्कि दीर्घकालिक रूप से इन्हें शून्य के करीब पहुँचाना है, ताकि किसी परिवार को अपना प्रियजन न खोना पड़े।
बैठक में ‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ के साथ मिलकर सड़क सुरक्षा की जमीनी हकीकत का विश्लेषण किया गया। आंकड़ों के अनुसार, कोटा-बूंदी क्षेत्र में प्रतिवर्ष औसतन 400 से अधिक लोगों की जान सड़क हादसों के कारण जाती है, जिनमें युवाओं की संख्या चिंताजनक रूप से अधिक है। फाउंडेशन ने गहन अध्ययन के बाद 21 अति गंभीर सड़क कॉरिडोर, 19 ट्रैफिक उल्लंघन वाले स्थान और 12 संवेदनशील पैदल यात्री दुर्घटना स्थलों की पहचान की है। रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्र के कुल 60 थानों में से 25 ऐसे हैं जहाँ 80 प्रतिशत दुर्घटनाजन्य मौतें दर्ज की जाती हैं, जिसका एक प्रमुख कारण तेज गति और लापरवाह ओवरटेकिंग है। हालांकि, वर्ष 2025 में पूर्व की तुलना में हादसों में आई कमी एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसे और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।
लोक सभा अध्यक्ष ने इस दिशा में प्रशासनिक और तकनीकी हस्तक्षेप पर बल दिया। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर एक व्यापक कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुर्घटना संभावित स्थलों पर इंजीनियरिंग सुधार, सड़क सुरक्षा ऑडिट और ट्रॉमा केयर प्रणाली को और अधिक सक्षम बनाना अनिवार्य है। साथ ही, श्री बिरला ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी प्रणाली का उपयोग करने का सुझाव दिया, ताकि सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर 24 घंटे नजर रखी जा सके और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि एक सामाजिक अभियान है जिसे जन आंदोलन का स्वरूप देना आवश्यक है। श्री बिरला ने जोर दिया कि सरकार, प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों का समन्वित प्रयास ही कोटा-बूंदी को देश का पहला आदर्श 'जीरो फेटेलिटी संसदीय क्षेत्र' बना सकता है। भविष्य में इस वैज्ञानिक दृष्टिकोण और साझा प्रयासों से सड़क हादसों में 70 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो न केवल अनमोल जीवन बचाएगा, बल्कि राष्ट्र की उत्पादक शक्ति को भी सुरक्षित करेगा।

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