राजस्थान की धरा को खुशहाल और समृद्ध बनाने के संकल्प के साथ सूबे के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने गुरुवार को जयपुर स्थित पंत कृषि भवन में एक अत्यंत महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस उच्च स्तरीय बैठक में 01 से 30 जून तक संचालित किए जा रहे 'खेत बचाओ अभियान' और खरीफ-2026 सीजन के लिए उर्वरक आपूर्ति की सघन समीक्षा की गई। इस दौरान कृषि मंत्री ने दोटूक शब्दों में कहा कि स्वस्थ मिट्टी, संरक्षित पानी और जागरूक किसान ही समृद्ध राजस्थान की असली पहचान हैं। उन्होंने उपस्थित जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और कृषि वैज्ञानिकों से बेहद गंभीर अपील करते हुए कहा कि इस विशेष अभियान को धरातल पर पूरी निष्ठा के साथ क्रियान्वित किया जाए और इसे एक व्यापक जनांदोलन का स्वरूप दिया जाए ताकि प्रदेश का प्रत्येक काश्तकार इससे जुड़ सके।

इस महाअभियान के शुरुआती तीन दिनों की प्रगति रिपोर्ट बेहद उत्साहजनक और चौंकाने वाली रही है। बैठक में प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अभियान के प्रथम तीन दिनों के भीतर ही समूचे प्रदेश में 2,382 विभिन्न कृषि गतिविधियां आयोजित की जा चुकी हैं, जिनके माध्यम से रिकॉर्ड 77,806 किसानों से सीधा और जीवंत संवाद स्थापित किया गया है। कृषि विभाग की इस त्वरित सक्रियता के तहत आयोजित 294 कृषक गोष्ठियों में 13,273 काश्तकारों को सीधे तौर पर लाभान्वित किया गया। इसी तरह संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए आयोजित 184 विशेष कार्यक्रमों में 8,987 किसान सम्मिलित हुए। ग्रामीण अंचलों में कृषि व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 127 जनप्रतिनिधियों तथा 312 अधिकारियों एवं कृषि वैज्ञानिकों ने रात्रि चौपालों के माध्यम से सीधे किसानों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं का मौके पर ही त्वरित समाधान सुनिश्चित किया। ग्रामीण विकास और कृषि की धुरी बनीं कृषि सखी, पशु सखी, लखपति दीदी एवं नमो ड्रोन दीदियों के माध्यम से सरकार जैविक एवं नैनो उर्वरकों के अभिनव उपयोग का संदेश घर-घर तक पहुँचाने में जुटी है।

किसानों की सबसे बड़ी चिंता यानी उर्वरक आपूर्ति और इसकी कालाबाजारी पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कृषि मंत्री ने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि राज्य में खरीफ सीजन के लिए उर्वरक का पर्याप्त और बंपर भंडार उपलब्ध है। वर्तमान में विभिन्न सोसायटियों एवं पंजीकृत डीलर्स के पास कुल 8.27 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का स्टॉक सुरक्षित है, जो कि गत वर्ष की समान अवधि की तुलना में 84,166 मीट्रिक टन अधिक है। इसके अतिरिक्त, किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार द्वारा जून माह के लिए 4.70 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का अतिरिक्त आवंटन भी स्वीकृत किया जा चुका है। यूरिया के अवैध परिवहन, जमाखोरी और कालाबाजारी जैसी आपराधिक गतिविधियों को सख्ती से कुचलने के लिए राज्य की सीमाओं पर 61 चेकपोस्ट पूरी तरह सक्रिय कर दिए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले तत्वों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से लाइसेंस निलंबन एवं सामग्री जब्ती की कड़ी विधिक व दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

खेती-किसानी के इस नए युग में कृषि मंत्री ने नीतिगत बदलावों हेतु एक बड़ा जन-आह्वान किया। उन्होंने खेती से जुड़े सभी जनप्रतिनिधियों से विशेष आग्रह किया कि वे स्वेच्छा से अपनी स्वयं की कम से कम 25 प्रतिशत कृषि भूमि पर जीवामृत, वर्मी कम्पोस्ट एवं हरी खाद पर आधारित प्राकृतिक खेती को अपनाएं ताकि वे समाज और अन्य पारंपरिक किसानों के लिए एक अनुकरणीय प्रेरणास्रोत बन सकें। उन्होंने धरती के घटते जलस्तर को देखते हुए जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की वकालत की और किसानों से फार्म पौंड के निर्माण, मेड़बंदी तथा ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों के अधिकतम उपयोग पर विशेष बल देने को कहा। इस अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक बैठक के दौरान पंत कृषि भवन में आयुक्त उद्यानिकी श्रीमती श्वेता चौहान तथा निदेशक कृषि विपणन विभाग श्री राजेश कुमार चौहान सहित कृषि विभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहे, जबकि विभिन्न जिलों में पदस्थापित समस्त विभागीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से इस नीतिगत मंथन से जुड़े रहे।

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