उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर मंडल के अंतर्गत आने वाला खैरथल रेलवे स्टेशन अब अपनी नई भव्यता और आधुनिक सुविधाओं के साथ क्षेत्र की आर्थिक प्रगति का मुख्य केंद्र बनने को तैयार है। स्थानीय कला और समकालीन डिजाइन के अनूठे संगम के रूप में पुनर्विकसित यह स्टेशन न केवल परिवहन का माध्यम है, बल्कि यह अलवर जिले के प्रमुख व्यापारिक केंद्र और यहाँ की विशाल अनाज एवं सब्जी मंडी की व्यावसायिक शक्ति को नई ऊंचाई देने वाला एक महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध होगा। किशनगढ़ बास, तिजारा और खैरथल क्षेत्र के यात्रियों के लिए जीवनरेखा माने जाने वाले इस स्टेशन पर वर्तमान में 46 ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित है, जहाँ से प्रतिदिन औसतन 4830 यात्री अपनी यात्रा का शुभारंभ करते हैं।

अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत लगभग 12.79 करोड़ रुपये की भारी निवेश राशि से इस स्टेशन का संपूर्ण स्वरूप परिवर्तित कर इसे पूर्णतः यात्री-अनुकूल बनाया गया है। आधुनिकीकरण की इस प्रक्रिया में स्टेशन भवन का पूर्ण नवीनीकरण करते हुए एक भव्य पोर्च का निर्माण किया गया है। यात्रियों की सुविधा हेतु सर्कुलेटिंग क्षेत्र को 1200 वर्ग मीटर से तीन गुना बढ़ाकर 3600 वर्ग मीटर किया गया है, जिसमें सुचारू आवागमन के लिए पृथक प्रवेश और निकास द्वारों की व्यवस्था की गई है। साथ ही, दोपहिया और चौपहिया वाहनों के लिए अलग-अलग पार्किंग क्षेत्रों का प्रावधान किया गया है। सुरक्षा और सुगमता को प्राथमिकता देते हुए 4.19 करोड़ रुपये की लागत से 12 मीटर चौड़े ऊपरी पैदल पुल (एफओबी) का निर्माण किया गया है, जो रैंप और कवरिंग शेड जैसी सुविधाओं से सुसज्जित है।

स्टेशन के बुनियादी ढांचे में व्यापक सुधार करते हुए मौजूदा प्लेटफॉर्म शेल्टरों में 150 वर्ग मीटर का विस्तार किया गया है और 4197 वर्ग मीटर प्लेटफॉर्म सतह का नवीनीकरण पूर्ण हो चुका है। सांस्कृतिक गौरव को संजोने हेतु स्टेशन भवन के आंतरिक भाग में 300 वर्ग मीटर क्षेत्र में अत्यंत आकर्षक और कलात्मक चित्र उकेरे गए हैं। यात्रियों के विश्राम के लिए नए प्रतीक्षा कक्षों का निर्माण किया गया है और आधुनिक फिटिंग के साथ मौजूदा शौचालय ब्लॉकों का कायाकल्प किया गया है। समावेशी विकास की दिशा में कदम बढ़ाते हुए दिव्यांगजनों के लिए हेल्प बूथ, विशेष शौचालय, वाटर बूथ, रैंप, समर्पित टिकट विंडो, स्पष्ट साइनेज और आरामदायक कुर्सियों जैसे विशेष प्रावधान किए गए हैं। खैरथल रेलवे स्टेशन का यह पुनर्विकास न केवल स्थानीय जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करेगा, बल्कि एक सशक्त परिवहन केंद्र के रूप में यह क्षेत्र में आर्थिक अवसरों के सृजन, सामाजिक विकास और सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा प्रदान करने में मील का पत्थर साबित होगा।

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