कानोता कैंप में प्रकृति, पक्षी और पर्यावरण संरक्षण का जीवंत संदेश, एनएसएस स्वयंसेवकों ने जाना जैव-विविधता का महत्व
जयपुर के कानोता कैंप में एनएसएस और ग्रीन पीपल सोसाइटी के सहयोग से आयोजित प्रकृति, पक्षी एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने जैव-विविधता, पक्षी संरक्षण और मरुस्थलीय पारिस्थितिकी पर सारगर्भित जानकारी दी, जिससे स्वयंसेवक संरक्षण के लिए प्रेरित हुए।

जयपुर, 24 दिसम्बर।
राजधानी जयपुर के समीप कानोता झील क्षेत्र में स्थित कानोता कैंप रिसॉर्ट उस समय पर्यावरणीय चेतना और जैव-विविधता के संदेश का केंद्र बन गया, जब राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के विशेष शिविर के अंतर्गत आईआईएस जयपुर (डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय) की एनएसएस इकाइयों द्वारा ग्रीन पीपल सोसाइटी (जयपुर चैप्टर) के सहयोग से एक व्यापक प्रकृति, पक्षी एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य युवा स्वयंसेवकों को प्रकृति से जोड़ते हुए संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाना रहा।
कार्यक्रम के दौरान एनएसएस स्वयंसेवकों के लिए तीन महत्वपूर्ण और ज्ञानवर्धक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विशेषज्ञों ने प्रकृति के विविध पहलुओं को गहराई से प्रस्तुत किया। पहले सत्र ‘पक्षियों की अद्भुत दुनिया’ में प्रसिद्ध प्रकृतिविद् मनोज कुलश्रेष्ठ ने पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों, उनके प्राकृतिक आवास, जीवन चक्र और प्रवासन (आव्रजन) की वैज्ञानिक एवं रोचक जानकारी दी। उन्होंने पक्षियों की भूमिका को पारिस्थितिकी संतुलन के लिए अनिवार्य बताते हुए संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।
दूसरे सत्र में निर्देशित प्रकृति भ्रमण का आयोजन किया गया, जिसमें गोविंद सिंह (एडीबी सलाहकार), डॉ. स्मिता शेखावत और तान्या गुप्ता (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) ने स्वयंसेवकों को कानोता क्षेत्र की वनस्पतियों, पक्षी आवासों और स्थानीय जैव-विविधता से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराया। इस मैदानी अनुभव के दौरान विद्यार्थियों ने प्रकृति को नज़दीक से समझते हुए उसके संरक्षण के व्यावहारिक पहलुओं को जाना।
तीसरे और अंतिम सत्र में थार मरुस्थल पर आधारित चर्चित दस्तावेज़ी फिल्म ‘इट्स नॉट ए वेस्टलैंड’ का प्रदर्शन किया गया। फिल्म के निर्देशक दिनकर सामोरे ने मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र, वहां पनपने वाले जीवन और पर्यावरणीय चुनौतियों पर गहन दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जिससे स्वयंसेवकों को शुष्क क्षेत्रों की वास्तविकता और संभावनाओं को समझने का अवसर मिला।
सभी सत्रों में संवादात्मक वातावरण देखने को मिला। एनएसएस समन्वयक डॉ. शरद राठौड़ के नेतृत्व में स्वयंसेवकों ने पर्यावरण, जैव-विविधता और संरक्षण से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने तथ्यपरक और विस्तार से समाधान किया। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी, प्रेरणादायी और सीखने से भरपूर अनुभव बताया।
कार्यक्रम के समापन पर यह स्पष्ट किया गया कि इस जागरूकता शिविर ने विद्यार्थियों में पर्यावरणीय समस्याओं के प्रति समझ को और गहरा किया है तथा वे एक स्वस्थ, संतुलित और हरित पृथ्वी के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित हुए हैं। पूरे आयोजन का मार्गदर्शन और समन्वय ग्रीन पीपल सोसाइटी के उपाध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्री विक्रम सिंह द्वारा किया गया, जिनके नेतृत्व में यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हुई।
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Pratahkal Bureau
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