पाली/जयपुर, 10 जनवरी। राजस्थान के पाली जिले में शनिवार को खेल और उत्साह का एक अनूठा संगम देखने को मिला, जब स्थानीय बांगड़ कॉलेज का खेल मैदान कबड्डी के खिलाड़ियों की हुंकार से गूंज उठा। क्रीड़ा भारती, पाली के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य कबड्डी प्रतियोगिता का शुभारंभ प्रदेश के पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री श्री जोराराम कुमावत ने किया। उद्घाटन समारोह के दौरान मंत्री कुमावत ने न केवल खिलाड़ियों का परिचय लेकर उनका उत्साह बढ़ाया, बल्कि स्वयं भी कबड्डी के मैदान में उतरकर और रेड डालकर टूर्नामेंट की पारंपरिक और ऊर्जावान शुरुआत की। इस दृश्य ने वहां मौजूद सैकड़ों दर्शकों और युवा खिलाड़ियों में जोश भर दिया।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 'खेलो इंडिया' विजन को धरातल पर उतारती इस प्रतियोगिता की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें कुल 132 पुरुष और महिला टीमों ने भाग लिया। मैदान पर उम्र की सीमाएं टूटती नजर आईं, जहां एक ओर 10 साल के बच्चों की चपलता दिखी, वहीं दूसरी ओर 57 साल के बुजुर्गों का अनुभव और दमखम भी देखने को मिला। बांगड़ कॉलेज ग्राउंड में विशेष रूप से तैयार किए गए 12 कोर्ट्स पर एक साथ मैचों का रोमांच शुरू हुआ। इस महाकुंभ को सफल बनाने के लिए 60 शारीरिक शिक्षकों और 40 समर्पित कार्यकर्ताओं की टीम ने कमान संभाली। प्रतियोगिता से पूर्व स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत जिम्नास्टिक के हैरतअंगेज करतबों ने समारोह में चार चांद लगा दिए।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि आज देश प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में खेलों के स्वर्णिम युग की ओर अग्रसर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार द्वारा खिलाड़ियों को दिए जा रहे निरंतर प्रोत्साहन का ही परिणाम है कि आज भारतीय खिलाड़ी वैश्विक पटल पर तिरंगा लहरा रहे हैं। मंत्री कुमावत ने खेलों को व्यक्तित्व विकास और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य बताते हुए कहा कि खेल के मैदान में कोई हारता नहीं है, बल्कि या तो जीतता है या फिर सीखता है। उन्होंने क्रीड़ा भारती के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन ही युवाओं में फिर से जीतने का जज्बा पैदा करते हैं।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) राजस्थान क्षेत्र के सह क्षेत्रीय संपर्क प्रमुख योगेंद्र कुमार ने कबड्डी को केवल एक खेल नहीं बल्कि एक संपूर्ण जीवनशैली करार दिया। उन्होंने कहा कि यह पारंपरिक खेल हमें टीम वर्क, अनुशासन और रणनीति सिखाने के साथ-साथ सांस्कृतिक जुड़ाव को भी मजबूत करता है। वहीं, क्रीड़ा भारती जोधपुर प्रांत के अध्यक्ष पृथ्वीराज सिंह जोधा ने एक महत्वपूर्ण लक्ष्य साझा करते हुए बताया कि देशभर में इन प्रतियोगिताओं के आयोजन के पीछे भारत की एक बड़ी दावेदारी है। उन्होंने कहा कि साल 2036 के ओलंपिक खेलों में कबड्डी को शामिल कराने के उद्देश्य से क्रीड़ा भारती देशभर में वातावरण तैयार कर रही है। इसी कड़ी में जनवरी के अंत तक जोधपुर प्रांत के सभी 13 जिलों में ऐसी प्रतियोगिताएं संपन्न कराई जाएंगी, जिसके उपरांत राष्ट्रीय नेतृत्व ओलंपिक कमेटी के समक्ष आधिकारिक प्रस्ताव रखेगा।

प्रतियोगिता के पहले दिन मैदान पर बेटियों का जबरदस्त दबदबा देखने को मिला। खेल परिणामों की बात करें तो 35 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में जांगिड़ समाज की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी फिटनेस का लोहा मनवाया, जबकि जय हिन्द क्लब दूसरे स्थान पर रही। बालिकाओं के 10 से 14 वर्ष आयु वर्ग में रेपडावास की टीम ने खिताब जीता और चीमा बाई संचेती स्कूल पाली की टीम उपविजेता रही। वहीं, 14 से 19 वर्ष आयु वर्ग की बालिकाओं में भी रेपडावास की टीम ने अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह आयोजन न केवल पाली के लिए बल्कि राजस्थान की खेल प्रतिभाओं के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रहा है, जो स्थानीय स्तर पर ओलंपिक के सपनों को संजोने का काम कर रहा है।

Pratahkal Newsroom

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