जोराराम कुमावत के जन्मदिन पर राजस्थान की गौशालाओं में 50 हजार गौवंश का टीकाकरण
पशुपालन मंत्री के जन्मदिवस पर 41 जिलों में आयोजित 1000 शिविरों में 15 हजार पशुओं का बांझपन उपचार और 54 हजार का एफएमडी टीकाकरण किया गया।

राजस्थान के पशुपालन, गोपालन एवं देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत का जन्मदिवस शुक्रवार, 08 मई को प्रदेशभर में 'गौसेवा दिवस' के रूप में श्रद्धा और सेवाभाव के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर राज्य की समस्त पंजीकृत और अपंजीकृत गौशालाओं में विशाल एक दिवसीय पशु चिकित्सा एवं बांझपन निवारण शिविरों का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य ध्येय गौवंश के स्वास्थ्य का संरक्षण करना और उनकी दुग्ध उत्पादन क्षमता में गुणात्मक वृद्धि करना था। इन शिविरों के माध्यम से पशुपालकों को विभाग की सभी महत्वपूर्ण सेवाओं का लाभ एक ही स्थान पर सुलभ कराया गया।
पशुपालन विभाग की सक्रियता से प्रदेश के 41 जिलों में एक हजार से अधिक चिकित्सा शिविरों का जाल बिछाया गया। विभागीय निदेशक डॉ. सुरेशचंद मीना ने इन आयोजनों की सफलता पर विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि शिविरों में तैनात विशेषज्ञ चिकित्सकों ने गौवंश का सघन स्वास्थ्य परीक्षण किया और बीमार पशुओं को मौके पर ही आवश्यक औषधियां वितरित कीं। इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू बांझपन निवारण रहा, जिसके अंतर्गत चिकित्सकों ने प्रभावित गौवंश की बारीकी से जांच कर उन्हें उचित उपचार, कृत्रिम गर्भाधान की सेवाएं और वैज्ञानिक परामर्श प्रदान किया। आंकड़ों के अनुसार, इन शिविरों में कुल 15 हजार से अधिक पशुओं का बांझपन के लिए सफल उपचार किया गया, जबकि 35 हजार से अधिक अन्य बीमारियों से ग्रस्त पशुओं का परीक्षण कर उन्हें निशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई गईं।
पशुधन को घातक संक्रामक रोगों से सुरक्षित करने की दिशा में भी रिकॉर्ड कदम उठाए गए, जहां 54 हजार से अधिक पशुओं का एफ.एम.डी. (खुरपका-मुंहपका) टीकाकरण किया गया। इसके अतिरिक्त, एक हजार से अधिक पशुओं का बधियाकरण संपन्न हुआ। गौवंश के स्वास्थ्य संवर्धन हेतु 27 हजार से अधिक पशुओं की डस्टिंग और 30 हजार से अधिक पशुओं को डोजिंग सेवाएं दी गईं। मंत्री जोराराम कुमावत के जन्मदिवस पर आयोजित यह व्यापक स्वास्थ्य अभियान न केवल गौसेवा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले गौवंश के जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में एक प्रभावी मील का पत्थर भी सिद्ध हुआ है।

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