मानसरोवर में भगवान श्री झूलेलाल मंदिर के पुनर्निर्माण का शुभारंभ
स्वामी मोहन प्रकाश महाराज के सानिध्य में भूमि पूजन संपन्न, मंदिर परिसर में वृद्धाश्रम और सिंधी संग्रहालय सहित कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

जयपुर के मानसरोवर स्थित वरुण पथ पर श्री झूलेलाल मंदिर के पुनर्निर्माण हेतु आयोजित भूमि पूजन कार्यक्रम के दौरान पूजा अर्चना करते स्वामी मोहन प्रकाश जी महाराज और पंचायत के पदाधिकारी।
जानकी नवमी के पावन अवसर पर मानसरोवर स्थित वरुण पथ पर भगवान श्री झूलेलाल मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य का विधिवत शुभारंभ पूज्य सिंधी पंचायत, मानसरोवर संस्था के तत्वावधान में श्री अमरापुर दरबार के स्वामी मोहन प्रकाश जी महाराज के करकमलों द्वारा किया गया। धार्मिक आस्था और सामाजिक सहभागिता के इस महत्वपूर्ण आयोजन ने सिंधी समाज में उत्साह का वातावरण निर्मित किया।
कार्यक्रम के दौरान स्वामी मोहन प्रकाश जी महाराज ने अपने प्रवचनों में सदगुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के उपदेश को उद्धृत करते हुए कहा, “कलयुग में प्रधान है सेवा पुनि सत्संग, कह टेऊँ जिसके किए होवे भव दुःख भंग।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान युग में सेवा और सत्संग ही मोक्ष के प्रमुख साधन हैं तथा समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इन मार्गों पर चलते हुए समाज सेवा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने इस पुनर्निर्माण को सिंधी समाज के लिए गौरव का विषय बताते हुए कहा कि वरुण पथ, मानसरोवर में भव्य श्री झूलेलाल धाम का निर्माण हो रहा है, जिसमें समाज के सभी वर्गों से समर्पण निधि के माध्यम से सहयोग अपेक्षित है।
पंडित विजेंद्र शर्मा के आचार्यत्व में गणेश पूजन, षोडश मातृका पूजन, नवग्रह पूजन एवं भूमि पूजन विधिवत सम्पन्न हुआ। नींव पूजन के दौरान पारंपरिक धार्मिक वस्तुएं—सप्त मृतिका, पंच धातु, पंच रत्न, चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा, कछुआ, मछली, समुद्र का झाग, अमर बेल, चांदी का सिक्का, सफेद कौड़ी, गोमती चक्र तथा मंगल कलश—विधि-विधान से स्थापित किए गए। धार्मिक मान्यताओं एवं वास्तु शास्त्र के अनुसार इन वस्तुओं को सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। सप्त मृतिका भूमि की पवित्रता का प्रतीक है, पंच धातु एवं पंच रत्न स्थिरता और समृद्धि के सूचक हैं। नाग-नागिन भूमि रक्षा के प्रतीक माने जाते हैं, जबकि कछुआ और मछली दीर्घायु एवं प्रगति का संकेत देते हैं। समुद्र का झाग और अमर बेल जीवन की निरंतरता को दर्शाते हैं, वहीं चांदी का सिक्का, सफेद कौड़ी और गोमती चक्र धन-वैभव के प्रतीक माने जाते हैं। मंगल कलश की स्थापना से कार्य में शुभता, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
संरक्षक चंदीराम जसवानी, अध्यक्ष ईश्वर करमानी एवं महासचिव रवि हेमलानी ने जानकारी दी कि इस परियोजना के अंतर्गत सत्संग हॉल, काम्युनिटी हॉल, सिंधी इतिहास का संग्रहालय, आधुनिक कौशल विकास ज्ञान केंद्र, धर्मशाला एवं वृद्धाश्रम सहित अन्य उपयोगी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। कार्यक्रम के दौरान गोरधन आसनानी ने 51000 रुपए का चेक प्रदान किया और कहा कि यदि पंचायत का प्रत्येक घर प्रतिदिन 10 रुपए की छोटी राशि दान दे, तो मंदिर का निर्माण कार्य शीघ्र पूर्ण किया जा सकता है।
इस अवसर पर नारायण दास नाज़वानी, गिरधारी मनकानी, बी.डी. टेकवानी, मोहन नानकानी, चंद्र प्रकाश खेतानी (एडवोकेट), अशोक रावतानी, ईश्वर वाधवा, दीनदयाल वाधवानी, गोपाल लालवानी, नरेश माखीजा, राजकुमार, प्रदीप मलिक, तुलसी संगतानी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ किया, बल्कि सामूहिक सहयोग से सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का मजबूत संदेश भी दिया।

Pratahkal Bureau
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