राजस्थान की राजधानी जयपुर में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा के तत्वाधान में आयोजित "जन आक्रोश महिला पदयात्रा" ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना की गई यह पदयात्रा बीजेपी कार्यालय से शहीद स्मारक तक निकाली गई, जिसमें प्रदेशभर से उमड़ी महिलाओं के हुजूम ने कांग्रेस सहित समूचे विपक्ष के खिलाफ तीखा आक्रोश व्यक्त किया। इस दौरान कैबिनेट मंत्री मंजू बाघमार, प्रदेश उपाध्यक्ष ज्योति मिर्धा, अल्का मूदंडा, सरिता गैना, सांसद मंजू शर्मा और महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष राखी राठौड़ सहित बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं ने बैनर थामकर विपक्ष की नीतियों के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सभा को संबोधित करते हुए कड़े शब्दों में कहा कि 17 अप्रैल का दिन भारतीय इतिहास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बनने वाला था, लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने इसे एक "काला पृष्ठ" बना दिया। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि 70 वर्षों तक शासन करने वालों ने महिलाओं को केवल वोट बैंक समझा और अब जब उनके वास्तविक सशक्तिकरण का अवसर आया, तब भी उनके हितों की घोर अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि विपक्ष परिवारवाद से इस कदर ग्रसित है कि उन्हें सामान्य परिवार की महिलाओं के आगे बढ़ने से अपने वर्चस्व के खोने का डर सता रहा है। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संचालित 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ', 'उज्ज्वला योजना', 'लखपति दीदी' और 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' जैसे क्रांतिकारी कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष ने न केवल महिला अधिकारों का विरोध किया, बल्कि धारा 370 और सीएए जैसे राष्ट्रहित के निर्णयों में भी अड़ंगा लगाया।

उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने इस विरोध को भारत माता का अपमान करार देते हुए तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के संकल्पों का विरोध कर विपक्ष ने महिलाओं के अवसर छीनने का कृत्य किया है, जिसके लिए उन्हें "चुल्लू भर पानी में डूब जाना चाहिए"। उन्होंने 5 जुलाई 2023 से महिला विरोधी कांग्रेस के खिलाफ शुरू हुए मोर्चे को याद दिलाते हुए आह्वान किया कि अब फिर से उसी तर्ज पर संघर्ष का समय आ गया है। वहीं, जयपुर शहर सांसद मंजू शर्मा ने "नारी शक्ति वंदन अधिनियम" को महिलाओं का संवैधानिक हक बताते हुए कहा कि यदि यह सर्वसम्मति से पारित होता तो लोकतंत्र और सशक्त होता, परंतु कांग्रेस के दोगले चरित्र ने इसे बाधित किया।

सम्मेलन का संचालन करते हुए प्रदेशाध्यक्ष राखी राठौड़ ने स्पष्ट किया कि दशकों तक जिस बिल को 'अटकाया, लटकाया और भटकाया' गया, उसे धरातल पर उतारने का संकल्प मोदी जी ले चुके हैं और अब देश की आधी आबादी अपने राजनीतिक अधिकारों के रास्ते में आने वाले हर रोड़े का हिसाब लेगी। इस आक्रोश सम्मेलन को एकता अग्रवाल, स्टेफी चौहान, रमा चौपड़ा और सुमन शर्मा ने भी संबोधित कर विपक्ष की महिला विरोधी मानसिकता को बेनकाब किया। जयपुर की सड़कों पर उमड़ा यह जनसैलाब इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि मातृशक्ति अब अपने अधिकारों और सम्मान के लिए पूरी तरह सजग हो चुकी है।

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