जैसलमेर में रात के समय घरों में घुसकर चोरी करने वाली अंतरराज्यीय नकबजन गैंग का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। जिला पुलिस अधीक्षक अभिषेक शिवहरे के निर्देशन में हुई कार्रवाई में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। चित्तौड़गढ़ जिला विशेष टीम के सहयोग से पुलिस ने घटना के करीब 20 दिन के भीतर आरोपियों तक पहुंचने में सफलता हासिल की। पूछताछ में आरोपियों ने जैसलमेर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कई नकबजनी की वारदातें करना स्वीकार किया है।

मामले की शुरुआत 5 अक्टूबर 2026 की रात ग्राम भैंसड़ा में हुई चोरी की दो घटनाओं से हुई थी। अज्ञात चोरों ने एक ही रात में दो अलग-अलग घरों को निशाना बनाया था। इसके बाद पुलिस ने विशेष टीमें गठित कर जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों व मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर चित्तौड़गढ़ जिले में दबिश देकर गैंग का पर्दाफाश किया।

भैंसड़ा निवासी भंवरूराम पुत्र जोगाराम ने थाना सांकड़ा में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि चोर उनके घर में घुसे और कमरे व सूटकेस के ताले तोड़कर एक सोने की अंगूठी, चार जोड़ी सोने के लूंग, एक चांदी की कटोरी, चार चांदी के सिक्के और 6,000 रुपये नकद चुरा ले गए।

इसी रात उनके चचेरे भाई राजेश कुमार (28) के घर में भी चोरी हुई। चोर पीछे के दरवाजे से घर में घुसे और कमरे व अलमारी के ताले तोड़कर करीब 30 तोला चांदी की पायजेब और 50,000 रुपये नकद लेकर फरार हो गए। दोनों घटनाओं के संबंध में थाना सांकड़ा में 6 अक्टूबर 2026 को मुकदमा दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया।

रात्रिकालीन नकबजनी की रोकथाम और वारदातों के त्वरित खुलासे के लिए जिला पुलिस अधीक्षक ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेश सांखला, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पोकरण वीरेन्द्र सिंह, वृत्ताधिकारी जैसलमेर रूपसिंह ईंदा और वृत्ताधिकारी पोकरण कैलाश कंवर को विशेष निर्देश दिए।

इसके बाद थाना सांगड़, सांकड़ा और सदर जैसलमेर के थानाधिकारियों के नेतृत्व में विशेष टीमें गठित की गईं। इन टीमों के कार्यों की रोजाना निगरानी की गई। पुलिस ने घटनास्थलों और संभावित आवागमन मार्गों का बारीकी से विश्लेषण किया। तकनीकी साक्ष्यों का मिलान करने के साथ मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर आसूचना जुटाई गई।

मानवीय आसूचना और तकनीकी विश्लेषण से मिले सुरागों के आधार पर सांगड़ थानाधिकारी राजेश कुमार के नेतृत्व में टीम ने चित्तौड़गढ़ जिले में जिला विशेष टीम के सहयोग से कार्रवाई की। पुलिस टीम ने दिन-रात मेहनत कर और भेष बदलकर आरोपियों से जुड़ी आसूचना व डेटा जुटाया, जिसके बाद गैंग का पर्दाफाश किया गया।

पुलिस ने मामले में जसवंत कंजर पुत्र लक्ष्मीनारायण, लोकेश पुत्र पियूलाल, बहादुर दरोगा पुत्र रतनलाल, धर्मराज दरोगा पुत्र कालू निवासी बेंगू तथा राहुल कुमार सोनी पुत्र मिठालाल निवासी राश्मी जिला चित्तौड़गढ़ को गिरफ्तार किया है।

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने जैसलमेर जिले में कई अन्य नकबजनी की वारदातों को अंजाम देना भी स्वीकार किया। इनमें 6 अक्टूबर 2026 की रात गांव चेलक थाना खुहड़ी में नकबजनी, 7 सितम्बर 2026 की रात सांवला गांव थाना सदर जैसलमेर क्षेत्र में नकबजनी, 5 अगस्त 2026 की रात गांव झाबरा थाना भणियाणा में नकबजनी और 17 मार्च 2026 की रात कस्बा फतेहगढ़ थाना सांगड़ में नकबजनी शामिल है। इसके अलावा करीब 7-8 माह पूर्व थाना फलसुण्ड क्षेत्र में भी नकबजनी की वारदात करना आरोपियों ने स्वीकार किया है।

पुलिस के अनुसार, गैंग वारदातों को अंजाम देने के लिए मोबाइल फोन बंद कर देती थी। आरोपी ट्रेलर, ईको और बोलेरो जैसे वाहनों में सवार होकर घटनास्थल से 3-4 किलोमीटर दूर आधी टीम को उतार देते थे। वाहन में सवार साथी निर्धारित स्थान पर लौटने की बात कहकर आगे निकल जाते थे।

इसके बाद गैंग के सदस्य गांव में मकानों की रैकी कर चोरी की वारदात को अंजाम देते थे। तय समय पर वाहन लौटने के बाद आरोपी अपने साथियों के साथ सीधे बेंगू निकल जाते थे। इस तरीके से गैंग वारदात के बाद घटनास्थल से दूर निकल जाती थी।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी जसवंत कंजर के विरुद्ध बूंदी, भीलवाड़ा, पाली, नागौर और सिरोही जिलों के विभिन्न थानों में वर्ष 2019 से 2022 के बीच नकबजनी, चोरी और आर्म्स एक्ट के 16 प्रकरण दर्ज हैं।

फिलहाल आरोपियों से अन्य वारदातों के संबंध में गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस का अग्रिम अनुसंधान जारी है। जैसलमेर जिले में एक ही रात दो घरों में हुई चोरी से शुरू हुई जांच के बाद पुलिस ने अंतरराज्यीय गैंग तक पहुंचकर कई वारदातों का खुलासा किया है।

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