जयपुर। राजस्थान की प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब भ्रष्टाचार के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हुए मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने एक साथ कई कड़े निर्णय लिए। राज्य सरकार की मंशा को साफ जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री ने भ्रष्ट और अनुशासनहीन लोक सेवकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिसके तहत अभियोजन स्वीकृति, अनिवार्य सेवानिवृत्ति और विभागीय जांच के कुल 24 महत्वपूर्ण प्रकरणों का त्वरित निस्तारण किया गया है। सुशासन का संकल्प दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि जनता के हक पर डाका डालने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।

इस कठोर कार्रवाई के केंद्र में पद और शक्तियों का दुरुपयोग करने वाले वे अधिकारी रहे जिन्होंने निजी स्वार्थ के लिए सरकारी तंत्र को ढाल बनाया। मुख्यमंत्री ने एक वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी और उद्योग विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा-19 के तहत अभियोजन स्वीकृति जारी कर उन्हें कानूनी शिकंजे में ला खड़ा किया है। इतना ही नहीं, सार्वजनिक निर्माण विभाग के तीन अधिकारियों पर भी गाज गिरी है, जिन्होंने ठेकेदारों से मिलीभगत कर सड़क निर्माण के कार्यों में सरकार को चूना लगाया और अवैध लाभ कमाया; इनके विरुद्ध धारा 13 (1) (डी) एवं 13 (2) के तहत कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।

प्रशासनिक स्तर पर शुचिता बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा के एक सेवानिवृत्त अधिकारी के विरुद्ध भी कड़ा रुख अपनाया है, जिन पर कूटरचित दस्तावेजों के जरिए सरकारी भूमि को निजी व्यक्ति के नाम करने का गंभीर आरोप है। इनके खिलाफ धारा 17-ए के तहत विस्तृत जांच का पूर्वानुमोदन कर दिया गया है। अनुशासन का पाठ पढ़ाते हुए श्री शर्मा ने राजस्थान सिविल सेवाएं (सी.सी.ए.) नियम 1958 के अंतर्गत चार अधिकारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोक दी है। वहीं, सेवानिवृत्त अधिकारियों के पांच मामलों में पेंशन रोकने की शास्ति लगाई गई है। इनमें से दो अधिकारियों की संलिप्तता और सरकार को हुई भारी आर्थिक हानि को देखते हुए उनकी 100 प्रतिशत पेंशन रोकने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया है, जबकि चार अन्य मामलों के निष्कर्ष माननीय राज्यपाल महोदय को अनुमोदन हेतु भेजे गए हैं।

मुख्यमंत्री के इस निर्णय ने न केवल व्यवस्था में पारदर्शिता का संचार किया है, बल्कि उन लोक सेवकों को भी कड़ी चेतावनी दी है जो नियमों की अनदेखी करते हैं। सी.सी.ए. नियम-16 के तहत दायर की गई चार पुनरावलोकन याचिकाओं को खारिज करना और अनिवार्य सेवानिवृत्ति के पूर्व निर्णय को यथावत रखना यह दर्शाता है कि अब जवाबदेही से कोई बच नहीं पाएगा। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की यह सक्रियता राजस्थान में एक संवेदनशील और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की नींव को और मजबूत करती नजर आ रही है।

Pratahkal Bureau

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