जयपुर में ‘शक्ति संगम’ बना महिला सशक्तिकरण और पुनर्चक्रण का मॉडल, जरूरतमंदों तक पहुंचेगी उपयोगी सामग्री
जिला परिषद जयपुर ने आरआरआर सेंटर "शक्ति संगम" के जरिए महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की नई पहल शुरू की है। अनुपयोगी वस्तुओं को उपयोगी बनाकर जरूरतमंदों तक पहुंचाने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की यह पहल अब राज्यभर में पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

तस्वीर में जिला परिषद जयपुर के अधिकारी और कर्मचारी 'शक्ति संगम' आरआरआर सेंटर के डोनेशन बॉक्स के साथ खड़े हैं।
जयपुर, 17 जुलाई। जिला परिषद जयपुर ने महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में अभिनव पहल करते हुए आरआरआर (रिड्यूस, रियूज, रिसाइकिल) सेंटर "शक्ति संगम" के माध्यम से पुनर्चक्रण और सामाजिक सहयोग का प्रभावी मॉडल विकसित किया है। इस पहल के तहत अनुपयोगी वस्तुओं को उपयोगी बनाकर जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ा जा रहा है।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद जयपुर प्रतिभा वर्मा ने बताया कि इस पहल के अंतर्गत जयपुर जिले की पंचायत समिति जोबनेर की ग्राम पंचायत खेजड़ावास में 14 मार्च 2026 को आरआरआर सेंटर की स्थापना की गई थी। यहां महिलाएं पुराने कपड़े, खिलौने, पुस्तकें और अन्य अनुपयोगी सामग्री से आकर्षक एवं उपयोगी वस्तुएं तैयार कर आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि इस नवाचार को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की निदेशक सलोनी खेमका द्वारा राज्यभर में पहचान दिलाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
प्रतिभा वर्मा ने बताया कि 17 जुलाई 2026 को जिला स्तर पर अनुपयोगी वस्तुओं के संग्रहण के लिए विशेष अभियान संचालित किया गया। इसके तहत जिला परिषद परिसर में डोनेशन बॉक्स स्थापित कर अधिकारियों और कर्मचारियों से अपने घरों में उपलब्ध पुराने कपड़े, खिलौने, पुस्तकें, जूते तथा अन्य उपयोगी सामग्री जमा कराने का आह्वान किया गया। संग्रहित सामग्री को उपयोग योग्य बनाकर प्रतिदिन जरूरतमंद और गरीब लोगों में वितरित किया जाएगा। इसके साथ ही इन वस्तुओं से उपयोगी एवं कलात्मक सामग्री का निर्माण भी किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिला परिषद जयपुर और "शक्ति संगम" के संयुक्त प्रयास से यह पहल स्वच्छता, पुनर्चक्रण और सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण बन रही है। इससे जरूरतमंद लोगों को उपयोगी सामग्री उपलब्ध होने के साथ-साथ सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग में भी कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि यह नवाचार स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के उद्देश्यों को साकार करने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण, महिला उत्थान और समाज के कमजोर वर्गों के जीवन स्तर में सुधार की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जिला परिषद जयपुर की यह पहल पुनर्चक्रण, सामाजिक सहयोग और महिला आत्मनिर्भरता को एक साथ जोड़ते हुए प्रभावी मॉडल के रूप में सामने आई है।

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