जयपुर में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर 10 अक्टूबर 2026 को मानसिक बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उनसे जुड़े सामाजिक पूर्वाग्रहों को दूर करने के उद्देश्य से कार्यशाला आयोजित की गई। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के तत्वावधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर महानगर द्वितीय, एसएमएस अस्पताल और एसएमएस मेडिकल कॉलेज की ओर से एसएमएस मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित एलटी-1 में यह कार्यक्रम हुआ। इसमें मानसिक स्वास्थ्य, समय पर उपचार, परामर्श और ध्यान के महत्व पर चर्चा की गई।

कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में जयपुर महानगर द्वितीय के पोक्सो एक्ट प्रकरण क्रमांक-1 के विशिष्ट न्यायाधीश श्री विकास खण्डेलवाल उपस्थित रहे। मनोस्वास्थ्य संस्थान, जयपुर के वरिष्ठ प्राध्यापक एवं अध्यक्ष डॉ. शिव गौतम विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।

कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए श्री विकास खण्डेलवाल ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य को समझना आवश्यक है। यह केवल दिखाई देने वाली बीमारियों तक सीमित नहीं है। किसी आघात या दुर्घटना के कारण उत्पन्न होने वाली मानसिक बीमारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए दवाओं, परामर्श और अन्य उपचारों के माध्यम से सार्थक प्रयास किए जा सकते हैं। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए ध्यान को भी एक उपयुक्त उपाय बताया। इसी क्रम में कार्यशाला के दौरान ‘हार्टफुलनेस’ ध्यान सत्र का आयोजन किया गया।

डॉ. शिव गौतम ने मानसिक बीमारियों की मूलभूत जानकारी देते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ी में मानसिक या शारीरिक विसंगतियों की संभावना के संबंध में गर्भावस्था के दौरान ही स्थिति निर्धारित होने की बात कही जाती है और ऐसी स्थितियों की रोकथाम के प्रयास शुरुआती चरण में किए जाने आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक बीमारियों को लेकर समाज में पूर्वाग्रह अब भी गहराई तक मौजूद हैं। आम लोगों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बारे में समझाना और बचाव एवं उपचार के लिए समय पर कदम उठाना जरूरी है। उपचार में देरी होने से गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

डॉ. गौतम ने भगवान श्रीकृष्ण को विश्व का पहला मनोचिकित्सक बताते हुए कहा कि सृष्टि के प्रारंभ से ही मानव को समय-समय पर मानसिक स्वास्थ्य के लिए परामर्श की आवश्यकता रही है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में सामाजिक पूर्वाग्रहों से दूर रहने की आवश्यकता पर जोर दिया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर महानगर द्वितीय की सचिव श्रीमती पल्लवी शर्मा ने कार्यशाला में महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि उम्र के साथ महिलाओं के जीवन में होने वाले विभिन्न परिवर्तनों के कारण उन्हें मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है, जो अवसाद सहित कई मानसिक बीमारियों का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से आमजन में जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है, ताकि मानसिक बीमारियों को केवल एक पहलू से देखने के बजाय उनके विभिन्न प्रभावों को समझकर जरूरी कदम उठाए जा सकें।

श्रीमती शर्मा ने बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण ‘न्याय आपके द्वार’ की अवधारणा के तहत न्याय के विभिन्न पहलुओं को आमजन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। इसी उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया, ताकि विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यक्षेत्र और आयामों को एक नया स्तर प्रदान किया जा सके। उन्होंने कहा कि मानसिक बीमारियों से संबंधित पूर्वाग्रहों को दूर करना और आमजन को इनके बारे में जानकारी देना इस विशेष जागरूकता कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है।

कार्यक्रम का संचालन राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर की उप सचिव सुश्री कोमल मोट्यार ने किया। इस अवसर पर एसएमएस चिकित्सालय के अतिरिक्त अधीक्षक डॉ. सतीश वर्मा, मनोचिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. सुरेश गुप्ता, एसएमएस चिकित्सालय, जयपुर की उप निदेशक डॉ. आशा लता, एसएमएस मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ शिक्षक, विद्यार्थी और विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारी उपस्थित रहे।

कार्यशाला के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, समय पर उपचार और परामर्श के महत्व को समझाने तथा मानसिक बीमारियों से जुड़े सामाजिक पूर्वाग्रहों को दूर करने पर जोर दिया गया।

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