जयपुर: राजीविका की विज़न बोर्ड कार्यशाला से महिला शिल्पकारों ने बुने सुनहरे कल के सपने
जयपुर में राजीविका और कमला पोद्दार इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित विज़न बोर्ड कार्यशाला में 20 महिला शिल्पकारों ने अगले 5 वर्षों के लिए अपने लक्ष्यों का निर्धारण किया। डॉ. रमणिका कौर, जसमीत कौर और श्रुति के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उनके हस्तशिल्प व्यवसाय को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

जयपुर, 12 जनवरी। राजस्थान की ग्रामीण महिलाओं के हुनर को वैश्विक पहचान दिलाने और उन्हें आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के संकल्प के साथ जयपुर में एक अभिनव पहल की गई। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) के तत्वावधान में आयोजित 'विज़न बोर्ड कार्यशाला' ने महिला शिल्पकारों के जीवन में न केवल आशा की एक नई किरण जगाई है, बल्कि उन्हें अगले पांच वर्षों के लिए एक ठोस रोडमैप भी प्रदान किया है। कमला पोद्दार इंस्टीट्यूट के सहयोग से आयोजित इस गरिमामयी कार्यशाला का मुख्य ध्येय शिल्पकारों की क्षमता वृद्धि और उनके दीर्घकालिक आजीविका सुदृढ़ीकरण की नींव रखना रहा।
कार्यक्रम का संचालन कमला पोद्दार इंस्टीट्यूट की अनुभवी विशेषज्ञ टीम द्वारा किया गया, जिसमें श्रीमती जसमीत कौर एवं श्रीमती श्रुति ने अपनी प्रभावी भूमिका निभाई। इस अवसर पर राजीविका की राज्य परियोजना प्रबंधक (नॉन फ़ार्म) डॉ. रमणिका कौर की विशेष उपस्थिति रही, जिन्होंने महिला सदस्यों का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें अपनी पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकलकर बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला का मुख्य आकर्षण 'विज़न बोर्ड' का निर्माण रहा, जहाँ राज्य के विभिन्न जिलों से आई 20 महिला शिल्पकारों ने अपनी कलात्मक सोच और भविष्य की योजनाओं को एक रचनात्मक धरातल पर उतारा।
इस कार्यशाला के दौरान महिलाओं ने केवल दैनिक आय तक सीमित न रहकर आगामी पांच वर्षों की एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की। इसमें व्यवसाय विस्तार को गति देने वाले आधुनिक आयामों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। शिल्पकारों ने अपने विज़न बोर्ड के माध्यम से आर्थिक स्थिरता, सामाजिक पहचान, बच्चों की उच्च शिक्षा और एक बेहतर जीवन स्तर जैसे लक्ष्यों को रेखांकित किया। यह गतिविधि न केवल एक कागजी योजना थी, बल्कि उनके आत्मविश्वास को नई उड़ान देने वाला एक सशक्त माध्यम भी सिद्ध हुई। विशेषज्ञों ने रणनीति साझा करते हुए बताया कि कैसे सुनियोजित विकास और अटूट संकल्प के माध्यम से इन छोटे-छोटे लक्ष्यों को बड़ी सफलता में बदला जा सकता है।
राजीविका द्वारा की गई यह पहल ग्रामीण उद्यमिता के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हो रही है। इस कार्यशाला ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब हुनर को सही दिशा और स्पष्ट लक्ष्य मिल जाते हैं, तो आत्मनिर्भरता का मार्ग सुगम हो जाता है। इन 20 महिला शिल्पकारों द्वारा निर्धारित किए गए ये लक्ष्य न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन में बदलाव लाएंगे, बल्कि पूरे प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

Pratahkal Bureau
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