जयपुर, 4 जनवरी 2026। राजस्थान की राजधानी जयपुर के एंटरटेनमेंट पैराडाइज में रविवार को भक्ति, संस्कृति और सामाजिक समरसता का अनूठा संगम देखने को मिला। सप्तऋषि मंडल द्वारा आयोजित भव्य 'पौषबड़ा महोत्सव' में प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। भगवान परशुराम की विधि-विधान से आरती कर मुख्यमंत्री ने प्रदेश की खुशहाली की कामना की और इस आयोजन को सनातन मूल्यों के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन न केवल हमारी युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और सनातन संस्कृति से जोड़ते हैं, बल्कि समाज में अटूट एकता और बंधुत्व की भावना को भी पल्लवित करते हैं। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे सपरिवार ऐसे आयोजनों का हिस्सा बनें ताकि सांस्कृतिक विरासत का प्रवाह निरंतर बना रहे।

शासन के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड भी जनता के समक्ष रखा। उन्होंने दृढ़ता के साथ कहा कि वर्तमान सरकार संकल्प पत्र के हर वादे को धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है और 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र के साथ समाज के हर वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि पानी, बिजली और औद्योगिक विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सरकार ने साहसिक और दूरगामी निर्णय लिए हैं। किसान, मजदूर, महिला और गरीब कल्याण को अपनी प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ अब पंक्ति के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुँच रहा है।

प्रशासनिक पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य पर बात करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पिछली सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश अब पेपर लीक जैसी घटनाओं से मुक्त हो चुका है। पिछले दो वर्षों के कार्यकाल में एक भी पेपर लीक की घटना नहीं हुई है, जो सुशासन का प्रत्यक्ष प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ साझा किया कि अब तक 92 हजार से अधिक युवाओं को नियुक्तियां दी जा चुकी हैं और आगामी 10 जनवरी को 10 हजार नवनियुक्त कॉन्स्टेबलों को नियुक्ति पत्र सौंपे जाएंगे। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को उनके नागरिक कर्तव्यों की याद दिलाते हुए सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने की अपील की।

इस गरिमामयी समारोह में मुख्यमंत्री के साथ राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी, मोती डूंगरी गणेश जी मंदिर के महंत कैलाश शर्मा सहित विप्र समाज के विशिष्टजन और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे। सप्तऋषि मंडल का यह आयोजन न केवल धार्मिक श्रद्धा का केंद्र बना, बल्कि इसने राज्य सरकार के विकासोन्मुख विजन और सांस्कृतिक गौरव के प्रति उसकी अटूट निष्ठा को भी रेखांकित किया।

Pratahkal Newsroom

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