जयपुर: प्रकृति के उपासक आदिवासी युवाओं ने एमिटी में बिखेरी अपनी संस्कृति की आभा, मुकेश कलाल ने दिया आधुनिक भारत के नेतृत्व का मंत्र

जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर के चंदवाजी स्थित एमिटी विश्वविद्यालय की फिजाओं में शनिवार को एक अनूठा संगम देखने को मिला, जहाँ जंगल की सादगी और आधुनिक भारत के संकल्प एक साथ धड़कते नजर आए। गृह मंत्रालय के सौजन्य से 'माय भारत' और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित 17वें आदिवासी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के दूसरे दिन ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिकता की ऐसी त्रिवेणी बही, जिसने न केवल युवाओं को अपनी जड़ों की याद दिलाई, बल्कि उन्हें भविष्य के सशक्त भारत का नेतृत्व करने के लिए भी तैयार किया।

कार्यक्रम के मुख्य सत्र में युवाओं के बीच पहुंचे लोकभवन के उपसचिव श्री मुकेश कलाल ने एक अत्यंत प्रेरक और गहरा संदेश दिया। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि प्रकृति की गोद में रहने वाला आदिवासी युवा अपनी सहजता और आंतरिक शक्ति के बल पर आध्यात्मिक भारत का नेतृत्व करने की पूर्ण क्षमता रखता है। युवाओं में मौजूद असीम ऊर्जा को सही दिशा देने की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने 'हार्टफुलनेस और मेडिटेशन' के महत्व को रेखांकित किया। श्री कलाल ने न केवल सैद्धांतिक बातें कीं, बल्कि ध्यान (Meditation) के माध्यम से मानसिक एकाग्रता हासिल करने और तनाव से मुक्ति पाने के व्यावहारिक गुर भी सिखाए, जिससे वहां मौजूद युवा अपने अंतर्मन को सुदृढ़ करने की प्रेरणा लेकर उठे।

इतिहास और संरक्षण के सत्रों में ज्ञान की गहराइयों को छूते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर डॉ. ममता यादव ने जयपुर और राजस्थान के गौरवशाली इतिहास का अध्याय खोला। उन्होंने युवाओं को अपनी लोककला और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का संवाहक बनने के लिए प्रेरित किया। इसी कड़ी में विषय विशेषज्ञ विनोद शर्मा ने 'जल-जंगल-जमीन' के संरक्षण और आदिवासी संस्कृति के उत्थान पर गंभीर मंथन किया। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा आदिवासी कल्याण हेतु चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी साझा की, ताकि यह युवा अपने क्षेत्रों में लौटकर विकास का लाभ समाज के अंतिम छोर तक पहुँचा सकें।

तकनीक और कला के क्षेत्र में युवाओं को दक्ष बनाने के लिए जयेंद्र राने ने 'डिजिटल फोटोग्राफी वर्कशॉप' का संचालन किया। यहाँ कैमरा एंगल, लाइटिंग और विजुअल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों के माध्यम से युवाओं को यह सिखाया गया कि वे अपनी पारंपरिक संस्कृति को आधुनिक डिजिटल दुनिया के सामने किस तरह प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके बाद 'देशभक्ति एवं राष्ट्र निर्माण' विषय पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में युवाओं का जोश देखने लायक था। 'हम हिन्दुस्तानी हैं' और 'स्वच्छता ही सेवा है' जैसे विषयों पर कालाहांडी, उड़ीसा के जकसया कटीमांजी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि प. सिंहभूम की अनिता सिंह कुंतिया ने द्वितीय और कालाहांडी के दीपित निहाल ने तृतीय स्थान हासिल किया। दंतेवाड़ा के महेश चौथे और गढ़चिरौली की रानीमंडी पूँजाटी पांचवें स्थान पर रहीं।

इस प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल के रूप में असिस्टेंट प्रोफेसर विनोद कुमार शर्मा ने राष्ट्रवाद के मूल्यों पर प्रकाश डाला, प्रज्ञा शर्मा ने युवाओं में मंच का आत्मविश्वास भरने के तरीके सुझाए और सचिन बंसल ने राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। दिन का समापन एक भव्य सांस्कृतिक संध्या के साथ हुआ, जहाँ पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवाओं ने रैंपवॉक कर एक 'लघु भारत' की जीवंत तस्वीर पेश की। यह आयोजन न केवल एक संवाद था, बल्कि आदिवासी युवाओं के भीतर राष्ट्र के प्रति उनके उत्तरदायित्वों का नया संचार करने वाला एक महाकुंभ बन गया।

Pratahkal Bureau

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