जयपुर यातायात व्यवस्था सुधार: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दी नई कार्ययोजना को मंजूरी
एडीसीपी और एसीपी के नए पदों का सृजन, 72 ट्रैफिक बीट प्रणाली और यादगार से सांगानेर तक मॉडल कॉरिडोर निर्माण से बदलेगी गुलाबी नगर की सूरत।

जयपुर में सुगम यातायात सुनिश्चित करने के लिए तैनात यातायात पुलिसकर्मी; राज्य सरकार ने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए ढांचागत और तकनीकी बदलावों को मंजूरी दी है।
जयपुर, 13 अप्रेल। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर जयपुर शहर में यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ एवं आधुनिक बनाने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई गई है। इसी क्रम में जयपुर यातायात पुलिस ने देश के प्रमुख महानगरों की यातायात व्यवस्थाओं का गहन अध्ययन एवं फील्ड विजिट करने के बाद विस्तृत समीक्षा कर व्यापक सुधार की रूपरेखा बनाई है।
प्रशासनिक ढांचे में विस्तार और पदों की वृद्धि
मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। अब एडीसीपी (ट्रैफिक) के पदों की संख्या 2 से बढ़ाकर 4 करने से जयपुर शहर के प्रत्येक पुलिस जिले में एक-एक एडीसीपी (ट्रैफिक) की तैनाती सुनिश्चित होगी। जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आएगी तथा बेहतर निरीक्षण संभव होगा। इसी प्रकार एसीपी (ट्रैफिक) के पदों की संख्या भी 4 से बढ़ाकर 8 करने से प्रत्येक पुलिस जिले में 2 एसीपी (ट्रैफिक) नियुक्त किए जाएंगे। इससे निगरानी, प्रवर्तन एवं समन्वय का कार्य अधिक प्रभावी ढंग से संचालित हो सकेगा। वहीं, ट्रैफिक इंस्पेक्टर (टीआई) की संख्या 15 से बढ़ाकर 20 करने से प्रत्येक पुलिस जिले में औसतन 5 टीआई की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इससे स्थानीय स्तर पर जवाबदेही एवं नियंत्रण में सुधार सुनिश्चित हो पाएगा।
72 ट्रैफिक बीट प्रणाली और आधुनिक संसाधन
जयपुर शहर को 72 ट्रैफिक बीट्स में विभाजित करने से प्रत्येक क्षेत्र में स्पष्ट जिम्मेदारी निर्धारित हो सकेगी। प्रत्येक बीट में कार्मिकों की संख्या बढ़ाने के साथ ही उनकी तैनाती को तर्कसंगत बनाया जाएगा। इससे पीक ऑवर्स में प्रभावी यातायात नियंत्रण एवं त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित होगी। यातायात प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए बीट स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग, रिपोर्टिंग एवं जवाबदेही की प्रणाली विकसित होगी। ट्रैफिक इंस्पेक्टर्स को विशेष रूप से डिजाइन की गई 20 मॉडिफाइड मोटरसाइकिलें उपलब्ध होने से वे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में तेज मूवमेंट एवं त्वरित कार्यवाही कर सकेंगे। यातायात प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग भी बढ़ाया जाएगा, जिसमें अभय कमांड सेंटर से जुड़े अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरों की स्थापना शामिल है। इससे रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी।
तकनीक का समावेश और कार्यक्षमता में सुधार
ट्रैफिक की निगरानी एवं जाम की स्थिति का आकलन करने के लिए ड्रोन का उपयोग भी किया जाएगा। साथ ही, आवश्यकता के अनुसार इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) के तत्वों को भी चरणबद्ध रूप से लागू किया जाएगा। व्यापक सुधारों की इस कड़ी में ट्रैफिक इंस्पेक्टर्स की वर्दी में आवश्यक परिवर्तन होने से उनकी कार्यक्षमता और पहचान में सुधार आएगा। फील्ड ड्यूटी के अनुरूप सुविधाजनक एवं उपयोगी वर्दी से कार्य निष्पादन में भी गुणवत्ता आएगी। प्राथमिकता से रोड इंजीनियरिंग एवं इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार का कार्य होगा तथा अतिक्रमण हटाने एवं पार्किंग प्रबंधन से यातायात व्यवस्था मजबूत बनेगी।
मॉडल ट्रैफिक कॉरिडोर और वैज्ञानिक प्रबंधन
प्रारंभिक चरण में यादगार से सांगानेर तक टोंक रोड को "मॉडल ट्रैफिक कॉरिडोर" के रूप में विकसित किया जाएगा, जो भविष्य में अन्य प्रमुख मार्गों के लिए बेंचमार्क का कार्य करेगा। इस कॉरिडोर पर नगर निगम एवं जेडीए के समन्वय से विभिन्न कार्य किए जाएंगे। जिनमें सड़क डिजाइन में आवश्यक सुधार, अनावश्यक एवं असुरक्षित कट्स (मीडियन ओपनिंग) को बंद करना, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित एवं निरंतर फुटपाथ का निर्माण और यू-टर्न एवं क्रॉसिंग पॉइंट्स का वैज्ञानिक पुनर्निर्धारण जैसे कार्य शामिल हैं। सुधारों के इस चरण में सड़क एवं फुटपाथ से अतिक्रमण हटाना, अवैध पार्किंग हटाने हेतु अतिरिक्त क्रेनों की तैनाती, पार्किंग एवं नो-पार्किंग क्षेत्रों का स्पष्ट निर्धारण एवं अधिसूचना तथा उचित स्थानों पर पार्किंग सुविधाओं का विकास एवं संकेतक बोर्ड की स्थापना के कार्य किए जाएंगे।
डायनेमिक सिग्नल और सतत मूल्यांकन
ट्रैफिक सिग्नल टाइमिंग को वास्तविक यातायात दबाव के अनुसार डायनेमिक बनाया जाएगा। लेन मार्किंग, जेब्रा क्रॉसिंग एवं स्टॉप लाइन्स का स्पष्ट निर्धारण एवं पुनर्निर्माण तथा चौराहों का वैज्ञानिक प्रबंधन एवं जंक्शन इम्प्रूवमेंट भी होगा। इसी कड़ी में सतत निगरानी एवं मूल्यांकन प्रक्रिया में सभी सुधार उपायों की नियमित समीक्षा कर फील्ड से प्राप्त फीडबैक के आधार पर आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। अधिकारियों के लिए प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन प्रणाली लागू होगी जिससे सार्वजनिक परिवहन का पुनः संयोजन और जयपुर शहर में यातायात संचालन में सुधार आएगा। इन समस्त निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं सभी संबंधित विभागों जैसे- नगर निगम, जेडीए, परिवहन विभाग तथा आमजन के सक्रिय सहयोग से जयपुर शहर की यातायात व्यवस्था में स्थायी सुधार सुनिश्चित हो सकेगा।

Pratahkal Bureau
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