जयपुर: हक की हुंकार के साथ सड़कों पर उतरेंगे आवासन मण्डल के हजारों कर्मचारी, चेतावनी महारैली की तैयारियां पूर्ण
जयपुर में 12 जनवरी को होने वाली 'चेतावनी महारैली' में राजस्थान आवासन बोर्ड के हजारों कर्मचारी मोहन सिंह के नेतृत्व में शामिल होंगे। रमेश चन्द शर्मा और गोविन्द नाटाणी ने स्पष्ट किया कि 11 सूत्रीय मांगों और प्रशासनिक अधिकारों के लिए रामनिवास बाग से सिविल लाइन फाटक तक विशाल विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। जानिए क्यों कर्मचारी सरकार के खिलाफ हुंकार भर रहे हैं।

जयपुर। राजस्थान की राजधानी के गलियारों में एक बार फिर कर्मचारी आंदोलनों की गूंज सुनाई देने वाली है। प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर सरकार की कथित संवेदनहीनता के खिलाफ अब राजस्थान आवासन बोर्ड कर्मचारी संघ ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। आगामी 12 जनवरी 2026, सोमवार को आयोजित होने वाली अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी महासंघ की 'चेतावनी महारैली' को आवासन मण्डल के कर्मियों ने अपना पूर्ण और पुरजोर समर्थन देने का ऐलान किया है। यह रैली न केवल कर्मचारियों की संख्या बल का प्रदर्शन होगी, बल्कि राज्य सरकार के लिए एक कड़ा संदेश भी मानी जा रही है।
राजस्थान आवासन बोर्ड कर्मचारी संघ के प्रदेश महासचिव रमेश चन्द शर्मा ने इस रणभेरी का आधिकारिक विवरण साझा करते हुए बताया कि मण्डल के प्रदेशभर के तमाम कर्मचारी इस ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनेंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार, सोमवार सुबह 10 बजे रामनिवास बाग से हुंकार भरते हुए कर्मचारियों का सैलाब सिविल लाइन फाटक तक एक विशाल चेतावनी रैली के रूप में कूच करेगा। इस समूचे प्रदर्शन का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन सिंह करेंगे, जिनके निर्देशन में प्रदेश के कोने-कोने से आए आवासन मण्डल के कर्मी अपनी एकजुटता का परिचय देंगे।
इस आंदोलन की गहराई और इसके पीछे की वैचारिक पृष्ठभूमि को स्पष्ट करते हुए संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के प्रवक्ता गोविन्द नाटाणी ने तीखे स्वर में अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि महासंघ के ग्यारह सूत्रीय मांग पत्र और सात संकल्पों को अमलीजामा पहनाने के लिए किया जा रहा एक धर्मयुद्ध है। मण्डल के कर्मचारी अपने प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकारों की रक्षा और अपने स्वाभिमान की सुरक्षा के लिए इस संघर्ष में शामिल हो रहे हैं। गोविन्द नाटाणी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की निरंतर बनी हुई संवेदनहीनता ने कर्मचारियों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया है।
जैसे-जैसे 12 जनवरी की तारीख नजदीक आ रही है, जयपुर के प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। यह रैली न केवल राजधानी की यातायात व्यवस्था के लिए चुनौती होगी, बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजस्थान आवासन बोर्ड कर्मचारी संघ के इस व्यापक समर्थन ने महासंघ की ताकत को दोगुना कर दिया है। अब देखना यह होगा कि रामनिवास बाग से उठी यह चेतावनी की लहर सिविल लाइन के सत्ता गलियारों में कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचती है और क्या सरकार इन मांगों पर कोई ठोस निर्णय लेने के लिए विवश होती है।

Pratahkal Bureau
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