जयपुर के बर्फखाना, आदर्श नगर स्थित स्वामी गंगादास जी महाराज मंदिर में रविवार को 89वां वार्षिकोत्सव भंडारा अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। धार्मिक अनुष्ठानों, कथा-प्रवचन, भजन-कीर्तन और विशाल भंडारे से सजे इस आयोजन में पूरे परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।

मंदिर सभा के अध्यक्ष डॉ. महेश पोपली ने जानकारी दी कि स्वामी गंगादास जी महाराज अविभाजित भारत के वर्तमान पाकिस्तान स्थित उत्तर-पश्चिम क्षेत्र के टांक नगर में गुरु घर की सेवा करते थे। उन्होंने 32 वर्षों तक एक ही कुटिया में कठोर तपस्या की थी। मान्यता के अनुसार ब्रह्मलीन होने से पूर्व उन्होंने अनुयायियों को संदेश दिया था कि जिस दिन उनकी कुटिया में दरार दिखाई दे, उस नगर को छोड़कर अन्यत्र बस जाना चाहिए। बाद में कुटिया में दरार आने पर टांक बिरादरी ने उनके आदेश का पालन करते हुए पाकिस्तान से विस्थापन किया। बताया जाता है कि इस दौरान किसी भी परिवार को जनहानि नहीं हुई और समाज के लोग जयपुर, दिल्ली, अलवर सहित विभिन्न शहरों में आकर बस गए। इसी स्मृति में देशभर में वार्षिकोत्सव और भंडारों का आयोजन किया जाता है।

महासचिव उमेश तनेजा ने बताया कि मुख्य समारोह में स्वामी जी महाराज की प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक कर नवीन वस्त्र धारण कराए गए। विशेष फूल बंगला झांकी सजाकर उन्हें विराजमान किया गया, जिससे पूरा मंदिर परिसर पुष्पों की सुगंध से महक उठा। प्रातःकाल वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ में आहुतियां देकर विश्व कल्याण की कामना की गई। एक माह से चल रही पाठ साहिब की श्रृंखला का भी समापन हुआ। मंदिर परिसर को आम, लीची और केले जैसे ऋतु फलों की आकर्षक झांकी तथा गुलाब, गेंदा और चमेली के पुष्पों से भव्य रूप से सजाया गया। शिव परिवार, मां भगवती, राधा-कृष्ण, हनुमान जी और झूलेलाल जी के विग्रहों को भी नवीन वस्त्र अर्पित किए गए।

भक्ति संध्या के दौरान “जय संता दी” के उद्घोष से वातावरण गूंज उठा। श्रद्धालु “वी मैं टांक दा नजारा देखिया...” और “जय स्वामी जी महाराज दी कलगियां दे सरताज दी...” जैसे भजनों पर भावविभोर होकर झूम उठे। इस अवसर पर श्री हरि मंदिर, पटौदी से पधारे स्वामी धर्मदेव जी महाराज ने कथा-प्रवचन दिए, जबकि भाई मन्नी सिंह जी ने गुरु महिमा का गुणगान किया।

वार्षिकोत्सव के अंतर्गत आयोजित विशाल भंडारे में लगभग 10 हजार श्रद्धालुओं ने लंगर प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन में 1000 लीटर खीर, चार मन दाल, दस बोरी आटे की रोटियां, 15 किलो देसी घी का हलवा, 100 किलो पनीर-मटर की सब्जी तथा 250 लीटर से अधिक दूध की लस्सी वितरित की गई। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के लिए आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक और आम पना सहित विभिन्न प्रसाद भी उपलब्ध कराए गए।

व्यवस्थापक मनीष मेहंदीरत्ता ने बताया कि भंडारे की अधिकांश व्यवस्थाएं मंदिर के सेवादारों द्वारा स्वयं संभाली जाती हैं तथा टांक बिरादरी के परिवार अपने घरों से रोटियां बनाकर सेवा में सहयोग करते हैं। केवल तंदूर की व्यवस्था बाहरी सहयोग से ली जाती है। मंदिर के सामने स्थित दशहरा मैदान में विशाल लंगर की व्यवस्था की गई, जहां सैकड़ों कार्यकर्ताओं, विशेषकर महिलाओं और बच्चों ने सेवा कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाई।

समापन अवसर पर भाजपा नेता अशोक परनामी, रवि नय्यर, काले हनुमान जी मंदिर के महंत गोपाल दास जी महाराज, अवधेशाचार्य जी महाराज सहित अशोक भगत, किशोर मोतियानी, अनिल खुराना, रवि सचदेव, नितिन भाटिया, गुलशन मक्कड़ और तुलसी संगतानी सहित कई गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी ने स्वामी गंगादास जी महाराज के चरणों में श्रद्धा अर्पित करते हुए विश्व कल्याण की कामना की।

इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि श्रद्धा, सेवा और सामूहिकता के माध्यम से समाज में आध्यात्मिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं की धारा निरंतर प्रवाहित होती रहती है।

Pratahkal Bureau

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