जयपुर: गोविंद देव जी मंदिर से सिंधी समाज की भव्य कलश यात्रा निकली
चेटीचंड से पूर्व आयोजित इस शोभायात्रा में 551 महिलाओं ने भाग लिया और भगवान झूलेलाल की 1100 दीपकों से महाआरती कर विश्व शांति की कामना की गई।

जयपुर के आराध्य गोविंद देव जी मंदिर से शुरू हुई कलश यात्रा में सिर पर गंगाजल पूरित कलश धारण कर चलतीं सिंधी समाज की महिलाएं और उपस्थित जनसमूह।
जयपुर 18/03/2026। आदि काल से सिंधी समुदाय जल और ज्योति की आराधना करता है। इसी परंपरा के अंतर्गत चेटीचंड से पूर्व जल देवता की पूजा के तहत जयपुर के आराध्य भगवान गोविंद देव जी के मंदिर प्रांगण से सिंधी समाज की महिलाओं की विशाल कलश यात्रा निकली। चेटीचंड सिंधी मेला समिति के द्वारा आयोजित इस भव्य कलश शोभायात्रा में 551 महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया।
वैदिक मंत्रोच्चार और गजराज की अगुआई में शोभायात्रा
कलश यात्रा प्रमुख मीना मूलचंदानी ने बताया कि "महिलाएं गंगाजल पूरीत कलश सिर पर धारण कर मंगल गीत गाती चल रहीं थीं।" प्रवक्ता तुलसी संगतानी ने जानकारी दी कि विद्वान ब्राह्मणों द्वारा कलश यात्रा आरंभ होने से पूर्व सभी कलशों का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत पूजन किया गया। इस भव्य कलश यात्रा की अगुआई गजराज कर रहे थे और उनके पीछे सजे-धजे ऊंट व घोड़े शोभायमान हो रहे थे।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति और मार्ग
अध्यक्ष नरेंद्र मूलचंदानी और महासचिव प्रमोद नवानी ने बताया कि विशिष्ट अतिथि भाजपा नेत्री सुमन शर्मा ने कलश यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर विधायक गोपाल शर्मा, अमित गोयल, राखी राठौड़, सेंट्रल पंचायत के गिरधारी मनकाणी, छबल दास नवलानी और अशोक छाबड़ा भी सम्मिलित हुए। यह यात्रा चांदी की टकसाल और काले हनुमान जी का मंदिर होते हुए कंवर नगर स्थित श्री झूलेलाल मंदिर पहुंची, जहां यह एक विशाल धर्म सभा में परिवर्तित हो गई।
1100 दीपकों से महाआरती और छेज लोकनृत्य प्रतियोगिता
संध्या काल में भगवान श्री झूलेलाल की घंटे-घड़ियाल बजाकर 1100 दीपकों से भव्य महाआरती संपन्न हुई। इस महाआरती में नरेश मूलराजानी, सुरेश टेकवानी, किशोर खत्री, जे के आडवाणी, हरीश लौंगानी और मातृ शक्ति से गुल सजनानी, भूमि कृपलानी, ऊषा वाधवा, सिंधु श्रीचंदानी, ज्योति छतवानी, ज्योति बागवानी सहित कई समाज बंधु उपस्थित रहे।
नृत्य केवल मनोरंजन ही नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग है, जिसे भावनाओं की अभिव्यक्ति और ईश्वर भक्ति का सशक्त साधन माना गया है। जैसे राजस्थान का घूमर, पंजाब का भांगड़ा और गुजरात का गरबा प्रसिद्ध है, वैसे ही सिंध का छेज लोक नृत्य अत्यंत प्रसिद्ध है। आगामी गुरुवार 19 मार्च को शाम 6:00 बजे बनी पार्क के श्री झूलेलाल मंदिर में लोकनृत्य छेज की प्रतियोगिता आयोजित होगी। संयोजक राकेश कृपलानी ने बताया कि इस प्रतियोगिता में शहर की 20 से अधिक टीमें डांडिया खनकाएंगी, जिसमें विशेष रूप से महिलाओं की टीमें भी भाग लेंगी।

Pratahkal Bureau
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