जयपुर। श्री राम मंदिर प्रन्यास एवं श्री सनातन धर्म सभा के तत्वावधान में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह की गुरुवार को पूर्णाहुति हुई। कथा व्यास आचार्य जैनेन्द्र कटारा ने व्यास पीठ से सुभद्रा-अर्जुन विवाह, 24 गुरुओं के प्रसंग, भगवान श्रीकृष्ण के गोलोक गमन तथा शुकदेव पूजन का वर्णन किया और श्रद्धालुओं को संपूर्ण कथा का सार सुनाया।

आचार्य कटारा ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल कथा नहीं, बल्कि मनुष्य को जीवन जीने की सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक ग्रंथ है। इसके प्रत्येक प्रसंग में जीवन के लिए कोई न कोई संदेश निहित है। उन्होंने सुभद्रा-अर्जुन विवाह प्रसंग के माध्यम से भगवान की लीला और धर्म की मर्यादा का वर्णन किया।

कथा के दौरान 24 गुरुओं के प्रसंग की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि मनुष्य प्रकृति और अपने आसपास के जीवन से भी निरंतर सीख सकता है। पृथ्वी से धैर्य, वायु से निर्लिप्तता, आकाश से व्यापकता, जल से निर्मलता और अग्नि से तेज एवं पवित्रता का संदेश मिलता है। उन्होंने कहा कि जीवन में सीखने की दृष्टि विकसित हो तो प्रत्येक अनुभव व्यक्ति का गुरु बन सकता है।

उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के गोलोक गमन का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान का अवतार धर्म की स्थापना और भक्तों के कल्याण के लिए होता है। भगवान की लीलाएं भौतिक दृष्टि से परे हैं और उनके स्मरण से मनुष्य के भीतर भक्ति, वैराग्य और आत्मचिंतन की भावना जागृत होती है।

अंतिम दिवस शुकदेव पूजन भी किया गया। कथा व्यास ने श्रीमद्भागवत कथा के प्रमुख प्रसंगों का सार बताते हुए श्रद्धालुओं से भगवान के नाम-स्मरण, सत्संग, सदाचार और सेवा को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भगवान का स्मरण किया और कथा श्रवण का लाभ लिया।

आरती में हरचरण लेकर, अनिल खुराना, लक्षमण मलिक, राजीव मनचंदा, रवि सचदेवा, जितेंद्र चड्डा सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।

Next Story